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22 December 2014

साम्प्रदायिकता के खिलाफ जुलूस-प्रदर्शन

19 दिसम्बर काकोरी के शहीदों की शहादत दिवस के अवसर पर परिवर्तनकामी छात्र संगठन ने रामलीला मैदान से जंतर-मंतर तक एक रैली निकाली तथा जंतर-मंतर पर साम्प्रदायिकता के खिलाफ एक सभा की।
    सभा को संबोधित करते हुए पछास के महेन्द्र ने कहा कि काकोरी के शहीद अशफाक और बिस्मिल साम्प्रदायिक सौहार्द की एक मिसाल हैं। उन्होनें धर्म भेद भुलाकर एक साथ ब्रिटिश साम्राज्यवाद का विरोध करते हुए शहादत दी। लेकिन अशफाक-बिस्मिल-रोशन सिंह-राजेन्द्र नाथ लहिड़ी के देश में RSS-BJP जैसे संगठन साम्प्रदायिकता फैलाकर उनके विचारों को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

    लोकसभा चुनाव से पूर्व ही RSS-BJP ने मिलकर देश के विभिन्न स्थानों पर दंगे करवाकर वोटों का ध्रुवीकरण कराया। कारपोरेट मीडिया और एकाधिकारी पूंजीपति वर्ग ने मोदी के पक्ष में मदहोश कर देने वाला प्रचार किया। मोदी की साम्प्रदायिक शख्सियत को बदलकर विकास पुरूष की एक भ्रामक छवि गढ़ी गयी। असल में 2007 के बाद से ही देशी-विदेशी पूंजी और अधिक हमलावर हो गयी है। वे और ज्यादा आर्थिक सुधारों की मांग कर रही हैं। ऐसे में कांग्रेस सरकार उसमें हिचकी तो मोदी ने आर्थिक सुधारों को पूंजीपतियों की सेवा में कर गुजरात में उन्हें खुली लूट की छूट देकर अपना चहेता बनवाया। आज दुनियाभर में कटटरपंथी ताकतों को पूंजीपति वर्ग आगे बढ़ा रहा है।
    प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र की रिचा ने महिला सुरक्षा और बेटी बचाओ अभियान को भाजपा का पाखण्ड बताया। उन्होने कहा कि श्रम सुधारों द्वारा महिलाओं से रात की पाली में काम करवाकर मोदी-भाजपा सरकार कौन सी महिला सुरक्षा देने वाली है। वहीं तथाकथित जव जेहाद अल्पसंख्यकों के साथ-साथ महिलाओं की आजादी का भी विरोधी है।
    सभा को आगे संबोधित करते हुए इंकलाबी मजदूर केन्द्र के नगेन्द्र ने कहा कि साम्प्रदायिक काली ताकतों का मुकाबला करने के लिए आज हमें अपने कंधे मजबूत करने की जरूरत है। देश में सूफी अंबा प्रसाद से लेकर अशफाक उल्ला खां तक अनगिनत मुस्लिम क्रांतिकारियों ने देश को आजाद कराने में अपनी शहादतें दी हैं। परन्तु आज साम्प्रदायिक ताकतें इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश कर रही हैं। शिक्षा के भगवाकरण के जरिए छात्रों-नौजवानों के दिमागों को कुंठित करने की साजिशें रची जा रही हैं। मजदूर वर्ग की फौलादी एकता ही साम्प्रदायिक ताकतों को पीछे धकेल सकती है।
    क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के भूपाल ने कहा कि देश के भीतर साम्प्रदायिक और फासिस्ट ताकतों के खिलाफ लड़ने के लिए मेहनतकशों की एकजुटता ही एकमात्र विकल्प है। अतीत में फासिस्ट हिटलर और मुसोलिनी को भी जनता की एकजुटता ने कब्र में पहुंचाया था और आज भी यही होना तय है।
    पछास के कमलेश ने कहा कि मेहनतकश जनता और छात्रों-नौजवानों की विरासत भगत सिंह, अशफाक-बिस्मिल जैसे क्रांतिकारी हैं। इनके विचारों पर जनता को खड़ा करके ही साम्प्रदायिकता के खिलाफ मुकाबला किया जा सकता है। मौजूदा पूंजीवादी व्यवस्था जोकि साम्प्रदायिक शक्तियों को खाद-पानी मुहैया करवा रही है के खात्मे व एक नए समाज समाजवाद के निर्माण से ही इन ताकतों को परास्त किया जा सकता है। पछास ने पिछले एक माह से विभिन्न क्षेत्रों में साम्प्रदायिकता कि खिलाफ अभियान चलाया हुआ है और ये प्रर्दशन उसी दिशा में उठाया गया कदम है। आगे भी पछास निरन्तर साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ संघर्ष करते हुए छात्रों को साम्प्रदायिक ताकतों के खिलाफ एकजुट करता रहेगा।
सभा के अन्त में पेशावर, पाकिस्तान में आतंकवादियों द्वारा मारे गए 132 बच्चों के लिए 2 मिनट का मौन रखा गया।
सभा को DUTA अध्यक्ष नंदिता नारायण, AISA के मोहित, AITUF(NEW) के शाही जी, PDFI के अर्जुन प्रसाद, DTF की प्रो. नजमा आदि ने भी सम्बोधित किया।सभी ने पछास के कार्यक्रम को समर्थन देते हुए आगे भी एकजुट होकर संघर्ष करने की बात कही।










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