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13 March 2024

नागरिकता संशोधन कानून के नाम पर सांप्रदायिकता का जहर घोलने की कोशिशों का विरोध करो!


विश्वविद्यालय कैंपसों में छात्रों का दमन बंद करो।

      11 दिसंबर 2019 को संसद में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पारित कर दिया गया। धर्म के आधार पर नागरिकता देने में भेदभाव करने वाले इस कानून का उस समय देशभर में तीखा विरोध हुआ था। भारी विरोध के कारण मोदी सरकार कानून को लागू करने के लिए बनने वाली नियमावली जारी करने से बचती रही। अब मोदी सरकार ने 11 मार्च को सीएए कानून की नियमावली जारी कर दी। जिस बिल को पढ़ते वक्त भारत के गृह मंत्री अमित शाह बोलते हैं कि इस बिल के द्वारा पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से मुस्लिमों को छोड़कर हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई, पारसी सभी अल्पसंख्यकों (उक्त देशों के) को नागरिकता देने का रास्ता प्रशस्त होगा।

     धार्मिक आधार पर नागरिकता में विभाजन करने वाले इस कानून के खिलाफ देशभर में तमाम संगठनों, इंसाफ पसंद लोगों, बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों ने भागीदारी की थी। इस आंदोलन में विश्वविद्यालय के छात्र ना केवल शामिल हुए बल्कि स्टेट के बर्बरतापूर्ण दमन का डटकर सामना किया

     छात्रों को बड़ी संख्या में जेल में डाला गया एवं कई छात्र पुलिस के हमले का शिकार हुए। सरकार के बहुतेरे मंत्री और खुद देश के प्रधानमंत्री सार्वजनिक मंचों से बोलने में नहीं हिचकिचाते थे कि जो लोग CAA का विरोध कर रहे हैं आप उनकी वेशभूषा देखकर उन्हें कपड़ों से पहचान सकते हैं।

     प्रदर्शनकारी छात्र-नौजवानों के खिलाफ सरकार ने UAPA के तहत फर्जी मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेलों में डाला। कई आज तक भी जेलों में ही बंद हैं।

     कोरोना संकट के दौरान और जबरदस्त जनाक्रोश को देखते हुए सरकार भी जबरन CAA लागू करने की बात से पीछे हटी थी और आंदोलन भी थम गया था। लेकिन 11 मार्च 2024 लोकसभा चुनावों से ठीक पहले हिंदू फासीवादी सरकार ने CAA को देश में लागू कर दिया। जिसके विरोध में असम, गुवाहाटी, कामरूप, बारपेट लखीमपुर, नलबाड़ी, द्रिबूगढ़, गोलाघाट और तेजपुर सहित देश के अन्य स्थानों पर CAA विरोधी रैलियां निकाली गई और CAA अधिनियम की प्रतियां जलाई गई। असम के लोगों ने इसको अपनी अस्मिता से जोड़ते हुए किसी को भी नागरिकता देने का विरोध किया। वही अन्य जगह पर इसकी सांप्रदायिक चरित्र के कारण विरोध हुआ।

     12 मार्च मंगलवार को जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय और डीयू में CAA के खिलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुआ जिसमें छात्रों ने सरकार को सांप्रदायिक CAA कानून को रद्द करने, CAA आंदोलन के दौरान फर्जी मुकदमे दर्ज करके जेल में डाले गए छात्रों की रिहाई की मांग की गई थी। लेकिन आज भी सरकार का रुख छात्रों के प्रति दमनात्मक ही है, विश्वविद्यालय और पुलिस प्रशासन के नापाक गठबंधन ने छात्रों को पीटा, छात्रा साथियों के साथ बदसलूकी की। इस संघर्ष में कई छात्राओं-छात्रों को चोटें आई हैं।

     परिवर्तनकामी छात्र संगठन धार्मिक आधार पर नागरिकता देने वाले इस विभाजनकारी कानून को वापस लेने की मांग करता है। विवादित सीएए कानून का विरोध कर रहे छात्रों-नौजवानों, आम नागरिकों के पुलिसिया दमन का पुरजोर विरोध करता है।

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