जम्मू-कश्मीर के 'श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस' में 2025-26 के सत्र में 90% कश्मीरी मुस्लिम छात्रों का चयन हुआ। यानी 50 सीटों में 42 पर कश्मीरी और 8 सीटों पर जम्मू के छात्रों का नाम आया। जम्मू कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशन (जेकेबीओपीईई) पर किसी तरह की अनियमितता का आरोप भी नहीं है। तब भाजपा ने वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा मेडिकल इंस्टिट्यूट के संचालन का हवाला दे, प्रवेश रद्द करने की मांग की। केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा नियुक्त राज्यपाल मनोज सिन्हा ने ज्ञापन स्वीकार कर लिया।
भाजपा की साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की घटिया राजनीति संस्थानों में भी हिन्दू-मुस्लिम कर रही है। यह अल्पसंख्यक मुस्लिम छात्रों पर तो हमला होने के साथ ही छात्रों को भी हिन्दू-मुस्लिम बंटवारे के तौर पर देखने को मजबूर कर रहे हैं। इस तरह दाखिले से वंचित कर दिए गए छात्रों के साथ अन्याय का फायदा उठाकर दाखिल लेने वाले छात्र इनकी राजनीति के मोहरे बनाये जाएंगे।
जम्मू-कश्मीर के छात्रों सहित राजनीतिक पार्टियां भी इस कदम का विरोध कर रही हैं। स्कूल, कॉलेज, अस्पताल, सड़क, सार्वजनिक परिवहन, इत्यादि में साम्प्रदायिक आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। यहां खुद संविधान की बार-बार दुहाई देते हुए भाजपा संविधान में वर्णित मौलिक अधिकारों का ही हनन कर रही है। अव्वल तो निजी जीवन में भी हर तरह के भेदभाव के नजरिये को पिछड़ी और दकियानूसी सोच कहा जाता है।
मोदी सरकार ने 2020 में जारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) में शिक्षा के भगवाकरण की साम्प्रदायिक योजना रखी है। जिसे अब सिलेबस से लेकर स्कूल-कॉलेज हर जगह देखा जा रहा है। आम राजनीति में तो संघ-भाजपा की फासीवादी "हिन्दू राष्ट्र" की घोषणा जगजाहिर ही है।
परिवर्तनकामी छात्र संगठन 'श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस' में दाखिला पाए छात्रों को प्रवेश देने की मांग करता है। भाजपा की बहुसंख्यकवादी साम्प्रदायिक राजनीति में राज्यपाल के शामिल होने का विरोध करता है। NEP, 2020 के जरिये शिक्षा के भगवाकरण पर रोक लगाने की मांग करता है।
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)

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