28 September 2017
23 September 2017
Invitation For Seminar
Seminar 28th September
“The Rising Fascist Attacks on Colleges-Campuses and Our Challenges."
Friends, the coming 28th of September is the birth anniversary of Shahid Bhagat Singh. Bhagat Singh is one of the revolutionaries who struggled lifelong against British imperialism, and happily gave his life for India’s freedom. Involved in India’s freedom struggle, he also endlessly fought against communal forces within the country. After so many years of his martyrdom, his thoughts and his struggle have become even more pertinent for us today.
13 August 2017
मासूमों की हत्यारी व्यवस्था का नाश हो!
गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में 34 बच्चों की मौत
गोरखपुर के बाबा रामदास मेडिकल कालेज (बीआरडी अस्पताल) में 34 बच्चों समेत 63 लोगों की मौत ने एक बार फिर व्यवस्था और सरकार के अमानवीय चरित्र को उजागर कर दिया। 34 मासूम व अन्य की मौत की इस घटना ने एक बार और स्पष्ट कर दिया कि व्यवस्था व सरकार की नजरों में आम गरीब मेहनतकशों की क्या कीमत है?
30 July 2017
30 May 2017
सहारनपुर दलितों पर हिंसा: मनुवादी भाजपा सरकार और घृणित पूंजीवादी व्यवस्था
उत्तर प्रदेश में जब योगी अपने दो माह के कार्यकाल का गुणगान करते नहीं थक रहे हैं तब प्रदेश के सहारनपुर में दलितों पर हमले हो रहे हैं। सहारनपुर के शब्बीरपुर गांव में 5 मई को ठाकुरों ने दलितों के 60 से ज्यादा घरों में आग लगा दी। जिसमें घर पूरी तरह जल गये। लेकिन जान का कोई नुकसान नहीं हुुआ। इसके बावजूद तनाव बना रहा और कई हिंसक झड़पे जारी रही। इसके बाद 23 मई को सहारनपुर आयी बसपा नेता मायावती की रैली से लौट रहे दलितों की कार पर हमला कर उन्हें घायल कर दिया, जिसमें एक दलित युवक की मौत हो गयी।
18 April 2017
कश्मीरी छात्रों के दमन का विरोध करो !
बीते सोमवार को हजारों की संख्या में कश्मीरी छात्रों ने सड़कों पर उतरकर भारतीय सेना द्वारा किए जा रहे दमन के विरोध में प्रदर्शन आयोजित किए। कश्मीर में रोज ही भारतीय राजसत्ता के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। सोमवार को हुए प्रदर्शनों की खास बात ये थी कि इसमें मुख्यतः कालेजों-स्कूलों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। भारतीय सेना द्वारा इन प्रदर्शनों का व्यापक दमन किया गया। कालेजों में घुसकर आंसू गैस, पैलेट गन से छात्र-छात्राओं पर हमला किया गया। सेना द्वारा की गयी इस दमनात्मक कार्यवाही के बाद लगभग 60 से अधिक छात्र-छात्राएं गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घटना के बाद से घाटी में प्राथमिक स्कूलों को छोड़कर सभी तरह के शिक्षण संस्थानों को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है। कई कालेजों ने अपनी परिक्षाएं स्थगित कर दी हैं। तो एक बार फिर से घाटी में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गयी हैं।
12 April 2017
पंजाब यूनीवर्सिटी के छात्रों का साथ दो!
11 अप्रैल को पंजाब यूनीवर्सिटी में फीस वृद्धि के खिलाफ आंदोलन कर रहे हजारों छात्रों पर पुलिस द्वारा बर्बर तरीके से लाठीचार्ज किया गया। 58 छात्रों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है तो कई अन्य छात्र नेताओं को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस लगातार पूरे इलाके में दबिश दे रही है। पुलिसीया दमन की आलम ये था कि बिना किसी सबूत के 66 छात्रों पर राजद्रोह का मुकदमा ठोंक दिया गया। पूरे देश में इस मामले पर थू-थू होने के बाद ही चण्डीगढ़ पुलिस ने छात्रों पर से राजद्रोह का मुकदमा हटाया। परंतु दमन और खौफ का माहौल कैम्पस में बना हुआ है। गिरफ्तार छात्रों पर आईपीसी की धारा 147, 148, 308, 186, 353, 322 के तहत मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया है।
16 January 2017
रोहित वेमुला की आत्म(हत्या) के 1 साल............
कैम्पसों के जनवादीकरण के लिए संघर्ष तेज करो!
फासीवादी-जातिवादी ताकतों के खिलाफ एकजुट हों!!
आज 17 जनवरी को हैदराबाद विश्वविद्यालय के दलित छात्र रोहित वेमुला की सांस्थानिक हत्या के 1 साल पूरे हो गए हैं। आज से ठीक 1 साल पहले रोहित ने विवि. प्रशासन व संघी ताकतों द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न के दवाब में आत्म(हत्या) कर ली थी। रोहित की मौत के बाद पूरी संघी सरकार व विवि. प्रशासन रोहित की हत्या को आत्महत्या में बदलने का प्रयास करता रहा। जबकि ये जगजाहिर था कि आरएसएस का लम्पट छात्र संगठन एबीवीपी रोहित की आत्म(हत्या) में प्रत्यक्ष तौर पर शामिल था। यही नहीं पूरे विवि. प्रशासन ने संघ के इशारों पर उस फंदे को तैयार किया जिसपर अन्ततः मजबूर होकर रोहित वेमुला को झूलना पड़ा।
5 January 2017
नोटबंदी के 50 दिन: दावे सारे फेल
30 दिसम्बर को नोटबंदी को 50 दिन पूरे हो गये। यह 50 दिन देश में अफरा-तफरी भरे रहे। मोदी ने अपने तुगलकी फरमान से देश की जनता को हैरान-परेशान कर दिया। शुरूआती दिन तो ‘अच्छे दिन’ की उम्मीद में कट गये कुछ और दिन जनता ने मन को दिलासा देकर काट लिए। किन्तु निर्लज्ज मोदी सरकार अपनी लफ्फाजियों को जारी रखे रही। उसे घंटो लाइन में खड़े बुर्जुग, महिला, अपना काम छोड़ लाइन में लगे व्यक्तियों का कष्ट नही दिखाई दे रहा था। कई लोगों ने तो लाइन में ही दम तोड़ दिया तब भी निर्लज्ज सरकार मिठाई बंटवाकर बधाई दे रही थी।
3 January 2017
नारी मुक्ति आंदोलन की पुरोधा सावित्री बाई फुले
(ये लेख परचम पत्रिका के अंक जनवरी-मार्च, 2016 से साभार लिया गया है। 3 जनवरी, सावित्री बाई फुले के जन्मदिवस पर हम इसे अपने ब्लाॅग पर जगह दे रहे हैं। आशा करते हैं के ये लेख सावित्री बाई फुले व उनके विचारों को समझने में कारगर होगा)
सावित्री बाई फुले भारत की प्रथम महिला अध्यापिका तथा भारत में नारी मुक्ति आंदोलन की नींव रखने वाली पहली महिला थी। उन्होंने अपने पति महात्मा ज्योतिबा फुले के सहयोग से हमारे देश में महिला शिक्षा की नींव रखी। उन्नीसवीं सदी में भारतीय समाज में शिक्षा पर चन्द पुरुष सवर्णों का ही अधिकार था। स्त्रियों तथा शूद्रों को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार नहीं था। समाज में जात-पात, छुआ-छूत, बाल विवाह, सती प्रथा, विधवा विवाह निषेध जैसी कई कुरीतियां मौजूद थीं। सम्पूर्ण भारत में घोर ब्राह्मणवादी पाखण्ड व मनुवादी विचारों के चलते महिलाएं गुलामी का सा जीवन जीने को मजबूर थीं। महिलाओं को कोई अधिकार तथा सामाजिक समानता प्राप्त नहीं थी। ऐसे में सावित्री बाई फुले ने अपने पति के साथ मिलकर स्त्री शिक्षा, समानता तथा विधवा पुनर्विवाह जैसे सामाजिक कार्यों को अपने लक्ष्य में लिया तथा आजीवन इन कार्यों को जारी रखा।
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