5 January 2026

हमलावर अमेरिकी साम्राज्यवादियों का विरोध करें!



अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश से 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला पर हमला कर उसके राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अगवा कर लिया गया। अमेरिकी सैनिक मादुरो व उनकी पत्नी को अगवा कर अमेरिका ले आये। जहां उन पर ड्रग माफियाओं से सम्बन्ध के तथाकथित आरोप में मुकदमा चलाया जाएगा। वेनेजुएला में हुई इस अस्थिरता को सामान्य करने के लिए सैनिक रखने तक कि बात डोनाल्ड ट्रंप ने कही।

एक संप्रभु देश पर किसी भी देश का हमला 'युद्ध की कार्यवाही' माना जाता है। अमेरिकी शासक इसके लिए कुख्यात हैं। कहीं वे इजरायल-फिलिस्तीन के युद्ध में पीछे से मुख्य ताकत थे तो अब वेनेजुएला पर सामने से हमला कर दिया है। 

यह जगजाहिर है कि हमला किसी "लोकतांत्रिक" उद्देश्य या ड्रग माफिया को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं बल्कि अमेरिकी शासकों की दादागिरी है। अपने कमजोर होते प्रभुत्व को बनाए रखने की कोशिश है। अमेरिकी साम्राज्यवादी वेनेजुएला के प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा जमाना चाहते हैं। एक समय वह यहां के संसाधनों का दोहन करते भी थे। लेकिन ह्यूगो शावेज़ व निकोलस मादुरो के शासन काल में तेल व्यवसाय का राष्ट्रीयकरण कर दिया गया और अमेरिकी साम्राज्यवादी कंपनियां यहां से बाहर हो गई। 

इनकी करतूतों के चलते आम जनता में इनके प्रति नफरत का इस्तेमाल कर भी वेनेजुएला के शासक अमेरिकी साम्राज्यवादियों के खिलाफ कदम उठाते रहे हैं। तभी से वेनेजुएला के शासक अमेरिकी साम्राज्यवादियों की आंखों में खटकते रहे हैं। अब इस तख्तापलट के जरिए अमेरिकी साम्राज्यवादी वेनेजुएला में अपनी पसंदीदा सरकार बैठाकर वहां के तेल, खनिज आदि भंडारों पर प्रभुत्व जमाना चाहते हैं।

दुनियाभर के शासकों ने शांति की अपील करते हुए अमेरिका के कदम को गलत या आपराधिक माना है। लेकिन दुनियाभर में लोकतंत्र का ढोल पीटने वाले अमेरिकी शासकों की आक्रामकता में कोई फर्क नहीं आया है। राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने से पहले वहां किये गए हवाई हमले में कई बेगुनाह आम जन मारे गए। जिनकी हत्या के जिम्मेदार अमेरिकी शासक और उनका सरगना डोनाल्ड ट्रम्प है।
परिवर्तनकामी छात्र संगठन संप्रभुता सम्पन्न देश वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले की निंदा करता है। मांग करता है वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को तत्काल रिहा किया जाए। हम छात्रों-नौजवानों सहित इंसाफपसंद लोगों से अपील करते हैं कि वेनेजुएला पर अमेरिकी साम्राज्यवादियों के हमले का हरसंभव विरोध करें।

क्रांतिकारी अभिवादन के बाद 
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)

29 December 2025

एंजेल चकमा के हत्यारों को सजा दो!

9 दिसंबर की शाम देहरादून के सेलाकुई इलाके में एक साधारण खरीददारी का सफर मौत का पैगाम बन गया। 24 वर्षीय त्रिपुरा निवासी आदिवासी छात्र एंजेल चकमा, जो जिज्ञासा यूनिवर्सिटी में एमबीए अंतिम सेमेस्टर का छात्र था, अपने छोटे भाई माइकल के साथ बाजार गया था। नशे में धुत कुछ स्थानीय युवकों ने उन्हें नस्लीय गालियां दीं।

एंजेल ने शांति से विरोध किया और कहा, "हम इंडियन हैं... अपनी भारतीयता साबित करने के लिए कौन सा सर्टिफिकेट दिखाएं?" यह सवाल उनकी आखिरी आवाज बन गया। इस पर हमलावरों ने चाकू और कड़े से उन पर जानलेवा हमला कर दिया। एंजेल को सिर, गर्दन, पीठ, रीढ़ और पेट में गंभीर चोटें आईं। 18 दिनों तक अस्पताल में वेंटिलेटर पर जिंदगी-मौत से जूझने के बाद 26 दिसंबर को उनकी मृत्यु हो गई। यह घटना महज एक हत्या नहीं बल्कि लोगों के बीच गहरी जड़ें जमा चुकी नस्लीय घृणा का खौफनाक उदाहरण है।

देश में रहने वाले युवाओं, नागरिकों को उनकी त्वचा, चेहरे और भाषा के कारण "विदेशी" मानना, उनकी भारतीयता पर सवाल उठाना यह दर्द सिर्फ एंजेल के परिवार का नहीं बल्कि जिनके साथ नस्लीय हिंसा होती है, उन सबका है।

पुलिस ने अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है जबकि मुख्य आरोपी फरार है। इस घटना के खिलाफ त्रिपुरा, उत्तराखंड सहित देश में विरोध प्रदर्शन और श्रद्धांजलि सभाएं हो रही हैं। एंजेल की मौत हमें याद दिलाती है कि असली एकता तभी संभव है जब देश-दुनिया में मौजूद तमाम तरह की विविधताओं का सम्मान करें।


पिछले कुछ समय से देश में नस्लीय, धार्मिक, जातीय, इत्यादि हिंसाएं बढ़ती जा रही हैं। इसके पीछे आज की फासीवादी राजनीति है। जो देश के नागरिकों को इंसान के तौर नहीं नस्ल और धर्म के बतौर देखती है। राजनीतिक लोग इससे अपनी सत्ताएं पाते हैं। समाज को बांटने वाली उनकी घृणित और जहरीली राजनीति के बहकावे में आने वाले लोग ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं। और अपने जीवन में पुलिस-कोर्ट-कचहरी के चक्कर काटते हैं।

पछास एंजेल चकमा की नस्लीय हिंसा की घोर निंदा करता है। उत्तराखंड सरकार से मांग करता है, आरोपियों को तुरंत पकड़कर सख्त सजा दी जाए। साथ ही केंद्र सरकार देश में नस्लीय, धार्मिक और जातीय हिंसाओं पर रोक लगाये।

क्रांतिकारी अभिवादन के साथ 
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)

27 November 2025

VIT भोपाल के छात्रों से मारपीट के दोषी मैनेजमेंट पर कार्यवाही करो!


छात्रों का दमन बंद करो!

मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में स्थित वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT) के भोपाल कैंपस में 25 नवंबर की रात के लगभग 10 बजे कुछ छात्र मेस के खराब खाने और गंदे पानी की शिकायत लेकर अपने असिस्टेंट प्रोफेसर प्रशांत कुमार पांडे के पास पहुंचे थे. उन्हें उम्मीद थी कि उनकी समस्या सुनी जाएगी. लेकिन जो हुआ वह किसी ने सोचा भी नहीं था. प्रोफेसर ने छात्रों की शिकायत सुनने के बजाय आपा खो दिया और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी. छात्रों के बालों को पकड़कर घसीटा गया, उन्हें थप्पड़ मारे गए और जलील किया गया. यही रात में छात्रों के आक्रोश का कारण बना.

पिछले डेढ़ महीने में 100 से ज़्यादा छात्र पीलिया (जॉन्डिस) की चपेट में आए. महीनों से छात्र चीख-चीखकर बता रहे थे—पानी में बदबू है, मेस में कीड़े हैं, RO खराब पड़ा है. VC ऑफिस से लेकर वार्डन तक 'किसी के कान में जूं तक नहीं रेंगी'. कहीं भी सुनवाई न होती और उल्टा शिकायतकर्ता छात्रों के साथ मारपीट और अभद्रता करने पर आखिरकार 25-26 नवंबर की रात क्षुब्ध छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा. लगभग चार हज़ार छात्र कैंपस में उतरे. VC की गाड़ी, बस में आगजनी, तोड़फोड़ की.

इस घटनाक्रम के बाद हास्टल में बिजली-पानी बंद कर दिया. दूर-दूर से आए 13 हज़ार से अधिक छात्रों को रातों रात घर जाने को कह दिया गया. जाने के लिए बिना यात्रा टिकिट आदि सुविधा किए कैंपस 8 दिसंबर तक बंद कर दिया है और इसको फिलहाल पुलिस छावनी बना दिया है.VIT लाखों रुपये की फीस लेकर छात्रों को सपने बेचता है और बदले में छात्रों को दूषित पानी और जहरीला खाना ही नहीं देता बल्कि छात्रों की जायज और बहुत छोटी मांगों का गुंडागर्दी से दमन करता है. मगर सवाल वही है—इतनी मोटी फीस लेने वाले संस्थान बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं दे पाते? क्या छात्रों की जान से बड़ी है संस्थान की इमेज?

VIT भोपाल की यह त्रासदी सिर्फ एक विश्वविद्यालय की नहीं, पूरे शिक्षा तंत्र की नाकामी है. सरकारें न सिर्फ मोटी फीस लेने वाले लुटेरे निजी विश्वविद्यालयों के साथ में खड़ी हैं बल्कि बची-खुची सार्वजनिक शिक्षा भी निजी संस्थानों को सौंपने पर आमादा हैं. इन निजी संस्थानों के लुटेरे मालिक एक तरफ छात्रों की जेब पर हाथ साफ करते हैं तो दूसरी तरफ आंदोलित छात्रों का तीखा दमन करते हैं. 


परिवर्तनकामी छात्र संगठन VIT के छात्रों की जायज मांगों के साथ में खड़ा है और मध्य प्रदेश सरकार से मांग करता है कि-

# VIT कैंपस भोपाल में स्वच्छ पानी, खाने की व्यवस्था की जाए. 
# छात्रों के साथ मारपीट करने वाले और छात्रों की बीमारी के लिए दोषी मैनेजमेंट पर कार्यवाही करे.

25 November 2025

शिक्षण संस्थाओं का साम्प्रदायिक विभाजन के लिए दुरुपयोग


    जम्मू-कश्मीर के 'श्री माता वैष्णो देवी इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस' में 2025-26 के सत्र में 90% कश्मीरी मुस्लिम छात्रों का चयन हुआ। यानी 50 सीटों में 42 पर कश्मीरी और 8 सीटों पर जम्मू के छात्रों का नाम आया। जम्मू कश्मीर बोर्ड ऑफ प्रोफेशनल एंट्रेंस एग्जामिनेशन (जेकेबीओपीईई) पर किसी तरह की अनियमितता का आरोप भी नहीं है। तब भाजपा ने वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा मेडिकल इंस्टिट्यूट के संचालन का हवाला दे, प्रवेश रद्द करने की मांग की। केंद्र की भाजपा सरकार द्वारा नियुक्त राज्यपाल मनोज सिन्हा ने ज्ञापन स्वीकार कर लिया।

22 November 2025

पंजाब विश्‍वविद्यालय में संघर्षरत छात्रों के समर्थन में

    केन्द्र सरकार ने पंजाब विश्‍वविद्यालय की सीनेट को भंग करने के इरादे से 28 अक्टूबर को एक 'नोटिफ़िकेशन' जारी किया था। इस नोटिफिकेशन में सीनेट-सिण्डिकेट में चुनाव की प्रक्रिया को रद्द करके इसे पूरी तरह नामांकित पदों वाली संस्था बना दिये जाने का प्रावधान था। यही नहीं इसके सदस्यों की संख्या को 91 से कम करके 31 कर दिया गया।

1 November 2025

उत्तराखण्ड UKSSSC पेपर लीक


छात्रों के संघर्ष से सरकार के होश ठिकाने पर 

       विगत 21 सितम्बर 2025 को उत्तराखण्ड में समूह ‘ग’ की भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा का पेपर लीक हो गया था। परीक्षा शुरू होने के आधे घण्टे के अंदर पेपर लीक की खबर सार्वजनिक हो गयी थी। इस पर छात्रों का रोष उमड़ पड़ा। देहरादून का परेड ग्राउण्ड छात्रों के धरने प्रदर्शन का केन्द्र बन गया। 

28 September 2025

लद्दाख में जनता के आंदोलन का दमन बंद करो!


    बीते दिन उत्तराखंड से लेकर लद्दाख तक छात्र-युवाओं के संघर्ष के नाम रहे हैं। लद्दाख की जनता अपने जनवादी अधिकारों के लिए, युवाओं को सम्मानजनक रोजगार दिलाने के लिए संघर्ष कर रही है।

21 September 2025

फिर पेपर लीक.....


    21 सितम्बर 2025, रविवार को उत्तराखंड में ग्रुप- सी के 416 पदों के लिए परीक्षा हुई। जिसके तहत पटवारी, लेखपाल, ग्राम विकास अधिकारी, आदि पदों के लिए सुबह 11 बजे परीक्षा शुरू हुई। परीक्षा शुरू होने के आधे घंटे बाद पेपर के स्क्रीन शॉट और उसके जवाब सोशल मीडिया में घूमने लगे।

8 September 2025

नेपाल के संघर्ष को हमारा सलाम!


     परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) नेपाल में हो रहे Gen Z के आंदोलन के साथ सम्पूर्ण एकता व्यक्त करते हैं। यह संघर्ष भ्रष्टाचार, सोशल मीडिया प्रतिबंध और राजनीतिक दमन के खिलाफ उठ खड़ा हुआ है।

21 July 2025

क्लस्टर/मर्जर के नाम पर स्कूलों को बंद करना नहीं चलेगा!


जनविरोधी राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 वापस लो!!

    'राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020' के कुप्रभावों में से एक 'स्कूलों को मर्जर/क्लस्टर के नाम पर बंद करने' के खिलाफ खासा विरोध हो रहा है। उत्तर प्रदेश में लगभग 27,000 स्कूलों के बन्द होने की संभावना के खिलाफ प्रदेश भर में छात्रों, शिक्षकों, अभिभावकों की विरोध में आवाज़ उठ रही है। उत्तराखंड में भी कई जिलों से स्कूलों के मर्जर का विरोध हो रहा है। इससे पहले हरियाणा, मध्य प्रदेश में भी सरकारें स्कूल बन्द कर चुकी हैं।