कोरोना महामारी की शुरुआत दुनिया भर में दिसंबर के समय चीन से हो चुकी थी। उस समय भारत सरकार का रुख उदासीनता भरा था। यहां तक की 30 जनवरी को भारत में कोरोना का पहला मरीज मिलने के बावजूद सरकार के रुख में कोई गंभीरता नहीं आई। पहला लॉकडाउन लगाए जाने तक सरकार ने फरवरी-मार्च के माह तक भी कोई विशेष तैयारी नहीं की थी। इस दौरान चर्चाएं चीन को महामारी से होने वाले नुकसान का फायदा भारतीय उद्योग व अर्थव्यवस्था को मिलने के कयास लगाए जा रहे थे, ट्रंप के स्वागत में भीड़भाड़ भरे भव्य कार्यक्रम, मध्यप्रदेश में सरकार बनाने बिगाड़ने का खेल, विदेश से आने वाले लोगों पर भी कोई रोक या समुचित जांच न करना, आदि सरकार की मुख्य हरकतें थी। इस बीच कोरोना के बारे में खतरनाक तरीके से अंधविश्वासों और कूपमंडूकता भरी बातों ने जगह पाई। गाय के गोबर, गोमूत्र, हल्दी, लहसुन, अदरक, गिलोय, आदि से कोरोना के इलाज के दावे किए जाने लगे। मांसाहार को कोरोना का कारण गिनाया जाने लगा। लेकिन वक्त के साथ संकट (कोरोना) के अधिकाधिक वास्तविक होते जाने के बाद अंधविश्वास और कूपमंडूकता भरी बातें कमजोर तो हुईं, पर सरकार से लेकर मीडिया तक ने उनके लिए जगह बचाये रखी।
26 June 2020
22 June 2020
अन्धराष्ट्रवाद, युद्धोन्माद- मुर्दाबाद!
बीते कई दिनों से भारत-चीन सीमा पर पैदा हुआ सीमा विवाद कई सैनिकों की मृत्यु का कारण बना। 20 भारतीय सैनिक इस विवाद की भेट चढ़े, तो दूसरी तरफ चीन ने अपने हताहत व घायल सैनिकों की कोई आधिकारिक सूचना जारी नहीं की है। हालांकि लगभग 40 चीनी सैनिकों के भी मारे जाने की खबर भारत के मीडिया व सोशल मीडिया में चल रही हैं।
18 June 2020
अभिनेता सुशांत का यों चले जाना क्या बताता है...
14 जून को हिंदी सिनेमा जगत के अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के आत्महत्या की खबर आई। काई पो चे, ब्योमकेश बख्शी, पीके, छिछोरे, सोनचिड़िया, आदि फिल्मों में अपने अभिनय के लिए सुशांत जाने गए।
25 April 2020
पछास के साथी महेश पर लगाया फर्जी मुकदमा वापस लो
लॉकडाउन की मार झेल रहे गरीब मजदूरों - छात्रों के लिए घर पर रहकर भूख हड़ताल करने पर दर्ज किया मुकदमा
परिवर्तनकामी में छात्र संगठन के लालकुआं इकाई सचिव महेश पर पुलिस ने फर्जी मुकदमा दर्ज किया है। अखबार के हवाले से यह मुकदमा पुलिस ने सोशल मीडिया पर उकसाने के आरोप में दर्ज किया है। पुलिस ने यह मुकदमा धारा 188, 269, 270 और आपदा प्रबंधन एक्ट 51 के तहत दर्ज किया है।
20 April 2020
10 April 2020
लाॅकडाउन के बहाने मजदूरों व मजदूर नेताओं का दमन-उत्पीड़न बंद करो!
मजदूर नेता अभिलाख के बाद अब इमके अध्यक्ष कैलाश भटट का उत्पीड़न!
उत्तराखंड राज्य के उधम सिंह नगर पुलिस द्वारा इंकलाबी मजदूर केन्द्र के अध्यक्ष कैलाश भटट को दिनांक 9/04/2020 को फोन कर रूद्रपुर कोतवाली बुलाया गया। कोतवाली में पुलिस ने उनके द्वारा एक व्हाट्सएप ग्रुप में डाले गये फोटो पर देशद्रोह का मुकदमा लगाने की धमकी दी है। आश्चर्य की बात यह है कि देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की बात उस फोटो पर की गयी है जो कि पिछले दिनों सोशल मीडिया में लगभग पूरे ही देश में घूम रहे थे। यह फोटो लाॅकडाउन के दौरान पुलिस द्वारा मजदूरों को मुर्गा बनाकर पीटने का है। जाहिर सी बात है कि लाॅकडाउन की सबसे ज्यादा मार मजदूरों-मेहनतकशों पर पड़ी है। और जब लगभग पूरे देश में ही ये मजदूर अपने घरों की तरफ पैदल ही मार्च करने को मजबूर हुए तो पुलिस द्वारा उनके साथ मारपीट की गयी। जो पूरी तरह अमानवीय व्यवहार है।
3 April 2020
मजदूर नेता अभिलाख पर लगाया गया फर्जी राजद्रोह का मुकदमा वापस लो !
लाॅकडाउन में पुलिस द्वारा मजदूरों के किए जा रहे दमन को सोशल मीडिया में उठाने पर पुलिस ने दर्ज किया फर्जी मुकदमा !!
उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन शर्म करो !!!
छात्र-मजदूर एकता जिंदाबाद !!!!
अभिलाख सिंह पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर, जिला उधम सिंह नगर (उत्तराखंड) में विगत लगभग 2 दशकों से एक मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं। 1 अप्रैल की सुबह पंतनगर पुलिस द्वारा उन पर राजद्रोह के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया गया है।
25 March 2020
इंकलाब की तलवार विचारों की सान पर तेज होती है
प्रिय साथियों,
आशा है आप स्वस्थ होंगे।
'कोरोना' नामक महामारी के चलते हमारे संगठन की गतिविधियां बुरी तरह से बाधित हो गई हैं। हम अपने साथियों सहित जनता से कट गए हैं। यह स्थिती अभी कई दिन कायम रहनी है।
'कोरोना' नामक महामारी के चलते हमारे संगठन की गतिविधियां बुरी तरह से बाधित हो गई हैं। हम अपने साथियों सहित जनता से कट गए हैं। यह स्थिती अभी कई दिन कायम रहनी है।
6 March 2020
8 मार्च: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
शिगूफे- प्रपंच की कोई जगह नहीं
8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय मजदूर महिला दिवस जो कि वास्तव में महिला मजदूरों की पूंजीवाद के खिलाफ लंबी संघर्ष गाथा का एक प्रतीक दिवस है। पूरी दुनिया में ही मजदूर-मेहनतकश महिलायें इस दिवस को मनाने की जोर-शोर से तैयारी कर रही हैं। विगत दशकों में देश-दुनिया का कोई भी ऐसा संघर्ष नहीं रहा जिसमें महिलाओं की शानदार, प्रेरणादाई भूमिका ना रही हो। भारत में ही देखें तो पूरे देश भर में सीएए/एनआरसी/एनपीआर के विरोध प्रदर्शनों में महिलाओं की शानदार भूमिका रही है। शाहीन बाग जैसा संघर्ष का मजबूत किला महिलाओं के दम पर ही बनाया जा सका। तमाम दुख,कष्ट, दमन का इन महिलाओं द्वारा बहुत बहादुरी से मुकाबला किया गया। इनके हौसले के सामने दुख और दमन दम तोड़ता नजर आया।
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