अभी कुछ ही दिन बीते हैं जब लाल किले के प्राचीर से हमें आजादी के हसीन
ख्वाब दिखाए जा रहे थे। ये आजादी कितनी अधूरी है, इसे 1947 के बाद से ही आम
मेहनतकश जनता रोज-बा-रोज के अपनी जिंदगी के कटु अनुभवों से देखती आ रही
है। इन्हीं उदाहरणों में एक और इजाफा हुआ है। भारतीय फिल्म एण्ड टेलीविजन
संस्थान (FTII) पुणे, के 5 छात्रों को 18 अगस्त को आधी रात में पुलिस ने
गैर जमानती धाराओं में गिरफ्तार कर लिया। ये छात्र पिछले 68 दिनों से
संस्थान में गजेन्द्र चैहान समेत 5 अयोग्य
व्यक्तियों की नियुक्ति का विरोध कर रहे थे। इन पांचों को संघ व भाजपा से
जुड़े होने व संघी विचारधारा पर चलने के चलते इनाम स्वरूप ये पद दिए गए थे।
ऐसा नहीं है कि ये गिरफ्तारी अचानक हुयी है। हड़ताल के पहले दिन से ही छात्रों को निरंतर डराया-धमकाया जा रहा था। हड़ताल को तुड़वाने के लिए सरकार द्वारा संस्थान का निजीकरण करने की धमकी भी दी गयी। संघी मण्डली द्वारा छात्रों को देशद्रोही-हिन्दू विरोधी आदि तमगों से नवाजकर आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश भी की गयी । इन सबके बाद भी जब सरकार के प्रपंच छात्रों को डिगा नही सके तो उसने खुद अपने कुरूप चेहरे से नकाब उतारते हुए, छात्रों पर फर्जी मुकदमें लादकर जेलों में पहुंचा दिया।
सरकार की नजर में ये छात्र अपराधी हैं। क्योकि? इन्होने मोदी सरकार के शिक्षा संस्थानों के भगवाकरण करने की राह में रोड़े अटकाए हैं। क्योंकि? वे ‘अयोग्य’ व्यक्तियों की नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं। क्योंकि? वेे विरोध करने की आजादी को अपना हक मानते हैं।
पर आम छात्रों और देश की करोड़ों-करोड़ मेहनतकश जनता की नजरों में वे हमारे साथी हैं। क्योंकि वो ऐसी सरकार से संघर्ष कर रहे हैं, जिसके हर कदम फासिस्ट हिटलर के पद-चिन्हों पर चल रहे हैं। जो अपनी साम्प्रदायिक मानसिकता से शिक्षा संस्थानों को दूषित करना चाहते हैं। जो विरोध करने के जनवादी अधिकार को कुचलना चाहते हैं।
इसलिए जरूरी हो जाता है कि हम FTII के संघर्षरत छात्रों के साथ अपनी एकजुटता जाहिर करते हुए बुलंद आवाज में दोहराए-
FTII के सभी गिरफ्तार छात्रों को रिहा करो।
गजेन्द्र चैहान FTII से बाहर जाओ।
मोदी सरकार शिक्षा का भगवाकरण बंद करो।
ऐसा नहीं है कि ये गिरफ्तारी अचानक हुयी है। हड़ताल के पहले दिन से ही छात्रों को निरंतर डराया-धमकाया जा रहा था। हड़ताल को तुड़वाने के लिए सरकार द्वारा संस्थान का निजीकरण करने की धमकी भी दी गयी। संघी मण्डली द्वारा छात्रों को देशद्रोही-हिन्दू विरोधी आदि तमगों से नवाजकर आंदोलन को बदनाम करने की कोशिश भी की गयी । इन सबके बाद भी जब सरकार के प्रपंच छात्रों को डिगा नही सके तो उसने खुद अपने कुरूप चेहरे से नकाब उतारते हुए, छात्रों पर फर्जी मुकदमें लादकर जेलों में पहुंचा दिया।
सरकार की नजर में ये छात्र अपराधी हैं। क्योकि? इन्होने मोदी सरकार के शिक्षा संस्थानों के भगवाकरण करने की राह में रोड़े अटकाए हैं। क्योंकि? वे ‘अयोग्य’ व्यक्तियों की नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं। क्योंकि? वेे विरोध करने की आजादी को अपना हक मानते हैं।
पर आम छात्रों और देश की करोड़ों-करोड़ मेहनतकश जनता की नजरों में वे हमारे साथी हैं। क्योंकि वो ऐसी सरकार से संघर्ष कर रहे हैं, जिसके हर कदम फासिस्ट हिटलर के पद-चिन्हों पर चल रहे हैं। जो अपनी साम्प्रदायिक मानसिकता से शिक्षा संस्थानों को दूषित करना चाहते हैं। जो विरोध करने के जनवादी अधिकार को कुचलना चाहते हैं।
इसलिए जरूरी हो जाता है कि हम FTII के संघर्षरत छात्रों के साथ अपनी एकजुटता जाहिर करते हुए बुलंद आवाज में दोहराए-
FTII के सभी गिरफ्तार छात्रों को रिहा करो।
गजेन्द्र चैहान FTII से बाहर जाओ।
मोदी सरकार शिक्षा का भगवाकरण बंद करो।

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