नैनीताल में एक नाबालिग बच्ची से बलात्कार की घटना हुई थी। घटना सामने आने के बाद पुलिस ने उस आरोपी उस्मान को गिरफ्तार कर लिया और उसे 1 मई को कोर्ट में पेश कर दिया गया। घटना में कानून ने अपना काम किया, लेकिन आरोपी का धर्म देखकर साम्प्रदायिक ताकतों को उत्पात मचाने का अवसर मिल गया।
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1 May 2025
8 March 2024
अंकिता भंडारी के अपराधियों को सख्त सजा दो!
पत्रकार आशुतोष नेगी को तुरंत रिहा करो!!
उत्तराखंड में बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच की मांग को लेकर प्रदर्शनरत स्थानीय पत्रकार आशुतोष नेगी को पौड़ी गढ़वाल की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आशुतोष नेगी साप्ताहिक समाचार पत्र 'जागो उत्तराखंड' के संपादक, प्रकाशक थे। इसी नाम से वह वेब पोर्टल भी चलाते थे। वेबसाइट ब्लॉक कर दी गयी है। खबरों के मुताबिक उन पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति रोकथाम अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा कई और धाराओं पर भी उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं। 5 मार्च को गिरफ्तारी के बाद 15 मार्च तक की न्यायिक हिरासत लेकर जेल में भेज दिया गया है। पत्रकार आशुतोष नेगी अनिश्चितकालीन धरने पर थे और वह आंदोलन में मुख्य नेतृत्वकारी भूमिका में थे।
2 November 2023
आईआईटी BHU में छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठायें!
वाराणसी में IIT BHU के हजारों छात्र कक्षाएं छोड़कर धरना दे रहे हैं। वजह है, बीती 1 नवंबर (बुधवार) की देर रात बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) कैंपस में एक छात्रा का यौन उत्पीड़न। छात्रा IIT BHU में सेकेंड ईयर में अध्ययनरत है, परिसर में ही यौन उत्पीड़न हुआ। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार मामले में दर्ज शिकायत के मुताबिक कुछ युवकों ने छात्रा के साथ मारपीट की, जबरन उसके कपड़े उतरवाए और तस्वीरें खींचीं। इस मामले में IPC की 354, 506 धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। इतनी गंभीर घटना होने के बावजूद अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी व छात्रा की मेडिकल जांच नहीं की गई है। आईआईटी के निदेशक आंदोलित छात्रों से बात करने को तैयार नहीं हैं।
11 May 2023
ब्रज भूषण शरण सिंह को गिरफ्तार करो!
भाजपा सरकार यौन शोषण के आरोपी को बचाना बंद करो!
'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ ' का नारा देने वालों से आज देश की बेटियां न्याय की गुहार लगा रही हैं। लेकिन इस पर प्रधानमंत्री और अन्य तमाम नेताओं की चुप्पी यही साबित कर रही है कि इस देश में अब न्याय गुहार लगा के नहीं बल्कि लड़ के ही लिए जा सकता है।
6 March 2020
8 मार्च: अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस
शिगूफे- प्रपंच की कोई जगह नहीं
8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय मजदूर महिला दिवस जो कि वास्तव में महिला मजदूरों की पूंजीवाद के खिलाफ लंबी संघर्ष गाथा का एक प्रतीक दिवस है। पूरी दुनिया में ही मजदूर-मेहनतकश महिलायें इस दिवस को मनाने की जोर-शोर से तैयारी कर रही हैं। विगत दशकों में देश-दुनिया का कोई भी ऐसा संघर्ष नहीं रहा जिसमें महिलाओं की शानदार, प्रेरणादाई भूमिका ना रही हो। भारत में ही देखें तो पूरे देश भर में सीएए/एनआरसी/एनपीआर के विरोध प्रदर्शनों में महिलाओं की शानदार भूमिका रही है। शाहीन बाग जैसा संघर्ष का मजबूत किला महिलाओं के दम पर ही बनाया जा सका। तमाम दुख,कष्ट, दमन का इन महिलाओं द्वारा बहुत बहादुरी से मुकाबला किया गया। इनके हौसले के सामने दुख और दमन दम तोड़ता नजर आया।
5 March 2020
दिल्ली सुनियोजित हमलों द्वारा शाहीन बाग आंदोलन को कुचलने की संघी कोशिश को ध्वस्त करो
अपने जन्म से ही संघ व संघ जैसे दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा जनता के बीच मुस्लिमों की कट्टरता, क्रूरता को लेकर एक से बढ़कर एक झूठ फैलाए गए हैं। CAA, NRC/NPR विरोधी आंदोलन की शुरूआत में राज्य द्वारा प्रायोजित हिंसा को भी वो मुस्लिमों द्वारा की गयी हिसा के रूप में प्रचारित करने में सफल रहे। परंतु उसके बाद पैदा हुए शाहीन बाग आंदोलन ने उसे बैकफुट पर धकेल दिया।
भारत के इतिहास में ये एक नए तरीके का आंदोलन था। जिसमें मुस्लिम महिलाओं (जिन्हें सबसे पिछड़ा हुआ माना जाता था) ने भारी संख्या में भागीदारी की। बात केवल भागीदारी तक नहीं रही अधिकांश जगहों पर मुस्लिम महिलाओं ने इस आंदोलन का नेतृत्व भी किया। पूरे आंदोलन का स्वरूप अहिंसावादी और धर्मनिरपेक्ष बनाकर रखा गया। सभी धर्मो के लोगों को इस आंदोलन से जोड़ने की कोशिश की गयी। पुराने नेतृत्व को नकारते हुए लगभग सभी जगह नए नेतृत्व ने आंदोलन की कमान संभाली। सदियों से जिनसे बोलने का हक छीन लिया गया था वो स्टेज पर चढ़कर घंटो भाषण देने लगे। यही नही बाहर से भागीदारी करने वाले प्रगतिशील संगठनों द्वारा भी इस आंदोलन की चेतना को आगे बढ़ाने का काम किया गया।
13 December 2019
यौन हिंसा एनकाउण्टर और हमारा समाज
27 नवम्बर हैदराबाद में 26 वर्षीय वेटनरी डॉक्टर की गैंग रेप कर नृशंस हत्या कर दी गयी। समाज में महिलाअें के खिलाफ हो रहे ऐसे नृशंस अपराधों में क्षुब्ध व आक्रोशित तमाम लोगों द्वारा हैदराबाद सहित पूरे देश में ढेरों प्रदर्शन किये गये। रोज ब रोज महिलाओं के साथ आपराधिक घटनायें हमारे समाज की एक कड़वी सच्चाई बन चुकी है। घृणित पूंजीवादी व्यवस्था महिलाओं को सुरक्षा व बराबरी देने में सर्वथा अक्षम रही है। या ज्यादा सही कहें तो यह पूंजीवादी व्यवस्था ही मुख्यतः, मूलतः ऐसे अपराधों के लिए जिम्मेदार है। यह व्यवस्था पुरुषप्रधानता की सोच को बनाये हुए है। अश्लील उपभोक्तावादी संस्कृति को पाल-पोस रही है और समाज में कुण्ठित-विकृत मानसिकता के लोगों को पैदा कर रही है।
24 December 2018
पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष ही महिला हिंसा से रोकथाम करेगा
महिला हिंसा की दो वीभत्स और क्रूर घटनायें पिछले दिनों घटी। एक घटना उत्तराखण्ड के पौड़ी जिले कि थी तो दूसरी घटना उत्तर प्रदेश के आगरा की। आगरा की छात्रा संजलि जहां 10वीं की छात्रा थी वहीं पौड़ी की छात्रा बी.एस.सी. द्वितीय वर्ष में पढ़ाई कर रही थी। दोनों ही घटनाओं में आरोपियों ने पीड़िता को जिन्दा जला दिया।जिन्दगी की जंग लड़ते हुए आगरा की छात्रा ने 20 दिसम्बर को तो पौड़ी की छात्रा ने 23 दिसम्बर को अंतिम सांस ली।
10वीं की छात्रा की हत्या के कारणों का, आरोपियों का पता नहीं है परन्तु संदेह के घेरे में आये उसके चचेरे भाई ने आत्महत्या कर ली। वहीं पौड़ी की घटना में वहशी लम्पट, छात्रा से छेड़छाड़ कर रहा था और छात्रा के द्वारा विरोध करने पर उसने छात्रा को जिन्दा जला दिया।
17 October 2018
'सड़ते -गलते समाज में ‘‘मी टू’’ अभियान'
“मी टू'' अभियान में इन दिन कई भारतीय हस्तियां बेनकाब हो रही है। फ़िल्मी कलाकारों से लेकर राजनेता आदि कई चर्चित नामो का खुलासा बीते दिनों में हुए। समाज ने एक बहस “मी टू" को लेकर चल रही है। इस पूरे मामले को छात्र-नौजवानों को कैसे देखना चाहिए इसे समझने के लिए नागरिक समाचार पत्र में छपा यह लेख बहुत उपयोगी है।
सड़ते-गलते पूंजीवादी समाज की एक ऐसी सच्चाई जिसे हर सामान्य, हर मजदूर-मेहनतकश स्त्री अपने रोज के अनुभव से जानती है, वह है उसके साथ होने वाला यौन दुर्व्यवहार। यह यौन दुर्व्यवहार सामान्य छेड़छाड़, फब्तियां कसने से लेकर वीभत्स गैंग रेप से आगे हत्या तक जाता है।
28 April 2018
कठुआ, उन्नाव गैंगरेप और झलकती संघी महिला विरोधी मानसिकता
पिछले दिनों उन्नाव में भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर, उसके भाई व अन्य पर सामूहिक बलात्कार का मामला प्रकाश में आया। मामला पिछले साल जून,2017 का था। जो तब प्रकाश में आया जब पीड़िता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सामने आत्मदाह करने का प्रयास किया। तब मामले ने और जोर पकड़ा जब पीड़िता के पिता को ही पुलिस ने उल्टा गिरफ्तार कर लिया तथा पुलिस कस्टडी में ही उसके पिता की हत्या कर दी गयी।
इसी दौरान जम्मू के कठुआ जिले में भी नाबालिग 8 वर्षीय बच्ची के साथ बलात्कार का मामला सामने आया। यहां बलात्कारियों के समर्थन में संघियों ने प्रदर्शन तक आयोजित कर दिये। शुरु से ही संघियों ने इस मामले को हिन्दू-मुस्लिम रंग देने की कोशिश की।
3 January 2017
नारी मुक्ति आंदोलन की पुरोधा सावित्री बाई फुले
(ये लेख परचम पत्रिका के अंक जनवरी-मार्च, 2016 से साभार लिया गया है। 3 जनवरी, सावित्री बाई फुले के जन्मदिवस पर हम इसे अपने ब्लाॅग पर जगह दे रहे हैं। आशा करते हैं के ये लेख सावित्री बाई फुले व उनके विचारों को समझने में कारगर होगा)
सावित्री बाई फुले भारत की प्रथम महिला अध्यापिका तथा भारत में नारी मुक्ति आंदोलन की नींव रखने वाली पहली महिला थी। उन्होंने अपने पति महात्मा ज्योतिबा फुले के सहयोग से हमारे देश में महिला शिक्षा की नींव रखी। उन्नीसवीं सदी में भारतीय समाज में शिक्षा पर चन्द पुरुष सवर्णों का ही अधिकार था। स्त्रियों तथा शूद्रों को शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार नहीं था। समाज में जात-पात, छुआ-छूत, बाल विवाह, सती प्रथा, विधवा विवाह निषेध जैसी कई कुरीतियां मौजूद थीं। सम्पूर्ण भारत में घोर ब्राह्मणवादी पाखण्ड व मनुवादी विचारों के चलते महिलाएं गुलामी का सा जीवन जीने को मजबूर थीं। महिलाओं को कोई अधिकार तथा सामाजिक समानता प्राप्त नहीं थी। ऐसे में सावित्री बाई फुले ने अपने पति के साथ मिलकर स्त्री शिक्षा, समानता तथा विधवा पुनर्विवाह जैसे सामाजिक कार्यों को अपने लक्ष्य में लिया तथा आजीवन इन कार्यों को जारी रखा।
6 March 2014
महिलाओं के मुक्ति-संघर्ष का आह्वान करने वाला दिन
08 मार्च मेहनतकश महिलाओं के न्यायसंगत विद्रोहों का प्रतीक दिवस है। इसकी शुरूआत 1910 में यूरोप की समाजवादी क्रांतिकारी महिलाओं ने की थी। इन क्रांतिकारी महिलाओं के नेतृत्व में उस समय मेहनतकश महिलायें ‘घरेलू दासता से मुक्ति’, ‘समान काम का समान वेतन’, ‘10 घंटे का कार्य दिवस’, ‘यूनियन बनाने का अधिकार’, ‘सार्विक मताधिकार’ जैसे न्यायपूर्ण मांगों के लिए लड़ रही थीं।
8 March 2013
8 मार्च अन्तर्राष्ट्रीय कामगार महिला दिवस के अवसर पर
इंकलाब ज़िन्दाबाद! समाजवाद ज़िन्दाबाद!!
8
मार्च अन्तर्राष्ट्रीय कामगार महिला दिवस के अवसर पर
पुरूष प्रधान मूल्य-मान्यताओं और नारी
विरोधी उपभोक्तावादी संस्कृति पर धावा बोलो!
अंतर्राष्ट्रीय कामगार महिला दिवस की
क्रांतिकारी विरासत को आगे बढ़ाओं!!
कामगार
बहिनों और भाइयों! भारत में महिलाओं को कितनी बेखौफ आज़ादी और सुरक्षा हासिल है,
राजधानी
दिल्ली में पैरामेडिकल की छात्रा दामिनी के साथ हुये सामूहिक बलात्कार की दर्दनाक
घटना इसका प्रतीक उदाहरण है। कार्यस्थलों से लेकर घर के भीतर तक महिलायें
असुरक्षित हैं। यहां तक कि कोख में भी बच्चियां असुरक्षित हैं।
5 January 2013
दिल्ली गैंगरेप कांड मानवद्रोही पूंजीवाद की कोख से जन्म लेते नरपिशाच
दिल्ली गैंगरेप से जुङे सवालों पर पछास की तरफ से जारी पर्चा, पर्चे का लिंक
https://docs.google.com/file/d/0B9x6noly2bhUaHJLZGUyR1J3LWc/edit
https://docs.google.com/file/d/0B9x6noly2bhUaHJLZGUyR1J3LWc/edit
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