8 March 2024

अंकिता भंडारी के अपराधियों को सख्त सजा दो!


पत्रकार आशुतोष नेगी को तुरंत रिहा करो!!

     उत्तराखंड में बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच की मांग को लेकर प्रदर्शनरत स्थानीय पत्रकार आशुतोष नेगी को पौड़ी गढ़वाल की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आशुतोष नेगी साप्ताहिक समाचार पत्र 'जागो उत्तराखंड' के संपादक, प्रकाशक थे। इसी नाम से वह वेब पोर्टल भी चलाते थे। वेबसाइट ब्लॉक कर दी गयी है। खबरों के मुताबिक उन पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति रोकथाम अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। इसके अलावा कई और धाराओं पर भी उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज किए गए हैं। 5 मार्च को गिरफ्तारी के बाद 15 मार्च तक की न्यायिक हिरासत लेकर जेल में भेज दिया गया है। पत्रकार आशुतोष नेगी अनिश्चितकालीन धरने पर थे और वह आंदोलन में मुख्य नेतृत्वकारी भूमिका में थे।

     संज्ञान में रहे कि 18 सितंबर, 2022 में 19 साल की अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गई थी। वो ऋषिकेश के पास भोगपुर में बने वनतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। रिजॉर्ट संचालक पुलकित आर्य (जो भाजपा के पूर्व राज्य मंत्री विनोद आर्य का बेटा है) ने अंकिता पर किसी वीआईपी को खुश करने(शारीरिक संबंध बनाने) का दबाव बनाया था, जिससे अंकिता ने माना कर दिया था। हत्या के आरोप रिजॉर्ट के संचालक पुलकित आर्य और दो सहकर्मियों पर लगे। प्रबंधक सौरभ भास्कर और सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता हैं।

     अंकिता भंडारी की न्याय की मांग को लेकर 27 फरवरी मंगलवार से पीपलचौरी श्रीनगर में अंकिता के माता-पिता सहित आशुतोष नेगी और जागरूक स्थानीय लोग अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे थे। पौड़ी गढ़वाल की पुलिस के अनुसार आशुतोष नेगी की 2022 के पुराने मामले में गिरफ्तारी की गई है। समझा जा सकता है कि आंदोलन को दबाने के लिए उनकी गिरफ्तारी की गई है। ताकि न्याय की आवाज को कुचला जा सके। यह सब हर भाजपा सरकार की नई पहचान बन चुकी है।

     दरअसल पत्रकार आशुतोष नेगी भी दिगवंत अंकिता भंडारी के पौड़ी डोभ गांव के ही निवासी हैं। वह पहले दिन से ही इस केस की पैरवी करते नजर आये। एक बार एक पत्रकार ने उनसे पूछा आपको डर नहीं लगता तो उन्होंने कहा कि "अपनी बेटी के लिए आवाज उठाना और न्याय मांगना कहाँ का डर, वह मेरे गांव की बेटी है और उसके लिए मैं लडूंगा।" आशुतोष नेगी ने पिछले कुछ दिनों से इस केस को अपने साप्ताहिक समाचार पत्र जागो उत्तराखंड के कवर स्टोरी में जगह देकर छापना शुरू कर दिया था। जिसके बाद से यह मामला लगातार सुर्खियों में बना रहा। अंकिता के माता-पिता के साथ वह धरने पर बैठ गए और लगातार मार्च निकाल रहे थे। लेकिन पुलिस ने आशुतोष नेगी को बीते पांच मार्च को SC/ST एक्ट का एक पुराना मामला बताकर पौड़ी से गिरफ्तार कर लिया था।

     उत्तराखंड के पुलिस महानिदेशक अभिनव कुमार ने इस मामले में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि "आशुतोष नेगी के द्वारा अंकिता भंडारी हत्याकांड मामले में जनता के बीच अविश्वास पैदा करने की कोशिश की जा रही थी। उन्होंने आगे कहा कि आशुतोष नेगी के पास कोई सबूत नहीं है। वो बिना सूबत के उत्पात मचा रहा था। इस मामले में उसकी संलिप्तता की भी जांच की जा रही है।"

     गिरफ्तारी से एक दिन पहले 4 मार्च को आशुतोष नेगी ने अपनी एक्स पोस्ट पर लिखा "पुख़्ता सूत्रों के हवाले से ख़बर, डीजीपी अभिनव कुमार के एसएसपी पौड़ी श्वेता चौबे को निर्देश किसी भी तरह आशुतोष नेगी को नई धाराएं जोड़ जेल में धरो, मेरे जेल में जाने के बाद भी अंकिता को न्याय दिलाने के लिये लड़ाई जारी रहे...।"

     19 साल की अंकित भंडारी गरीब परिवार से आती थी। वह ऋषिकेश के पास एक रिसॉर्ट में दस हजार में रिशेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थी। उत्तराखंड में यह रिजॉर्ट अमीरों के लिए अय्याशी के केंद्र बन रहे हैं। जिसमें यहां के नवयुवक चंद पैसों में काम करने को मजबूर हैं। उनमें महिलाओं से जिस्मफरोशी का धन्धा करवाने को मजबूर किया जा रहा है। जब अंकिता ने इसके लिए मना किया तो भाजपा नेता के बेटे पुलकित आर्य ने उसकी हत्या करवा दी। अंकिता भंडारी की हत्या के तुरंत बाद सबूत नष्ट करने के लिए रिजॉर्ट में बुलडोजर चला दिया गया। लेकिन उत्तराखंड में बड़े-बड़े भू-माफिया, नकल माफियाओं से लेकर तमाम तरह के अपराधी खुलेआम घूम रहे हैं।

     अंकिता को न्याय दिलाने के लिए उत्तराखंड सहित देश के अलग-अलग हिस्सों में न्यायप्रिय लोगों ने विरोध प्रदर्शन आयोजित किए थे। लेकिन उत्तराखंड सरकार आरोपियों को बचाने में ही लगी रही। एक साल से ऊपर बीतने के बावजूद भी अभी तक अंकिता को न्याय नहीं मिला है। अंकिता के परिवार जनों सहित पत्रकार आशुतोष नेगी और अन्य न्याय प्रिय लोग सड़कों पर उतर लगातार सरकार पर दबाव बनाते रहे हैं। 27 फरवरी से वह अनिश्चितकालीन धरने पर थे। वह जुल्म, अन्नाय के खिलाफ न्याय की मांग कर रहे थे। हर जुल्म की आवाज उठाने वालों के साथ भाजपा सरकार दमन करती रही है। यहां भी अंकिता भंडारी के मामले को मुखर तरीके से उठाने वाले पत्रकार आशुतोष नेगी को गिरफ्तार कर केस और आंदोलन को कमजोर करने की ही कोशिश की जा रही है। यह कोशिश सच बोलने और लिखने वालों को चुप कराने की है। आखिर वह वीआईपी कौन था जिसके लिए पुलकित आर्य अंकिता भंडारी को मजबूर कर रहा था? उस वीआईपी का नाम उजागर करने वालों को सरकार चुप करा रही है। समझा जा सकता है कि यह संघ-भाजपा का कोई खास आदमी है। इसी लिए उसका नाम उजागर न हो इसके लिए धामी सरकार पूरा जोर लगा रही है।

     केंद्र की मोदी सरकार हो या राज्य की भाजपा सरकारें यह सभी सरकारें महिला विरोधी हैं। 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' का नारा देने वाले अंकिता भंडारी के मामले में न्याय नहीं कर पा रहे हैं और न्याय की आवाज उठाने वालों को जेल में डाला जा रहा है। बीएचयू में भाजपा के पदाधिकारी छात्रा के साथ सामूहिक बलात्कार करने के मामले में पकड़े गए। जिनको भाजपा सरकार बचाती रही और मध्य प्रदेश में उनसे चुनाव प्रचार तक करवाया गया। इससे पहले दिल्ली में महिला पहलवानों ने भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह के यौन उत्पीड़न के खिलाफ लंबा संघर्ष चलाया। भाजपा सरकार ने उनका दमन किया और उनको सड़कों पर घसीटकर उनका आंदोलन खत्म कर दिया। इसी तरह हाथरस से लेकर अलग-अलग जगह महिला हिंसा के अपराध भाजपा राज में बढ़ते जा रहे हैं। जिनकी आवाज उठाने वालों को इसी प्रकार चुप कराया गया। पत्रकारों को संगीन आरोप लगाकर जेलों में डाला गया।

     परिवर्तनकामी छात्र संगठन अंकिता भंडारी के अपराधियों को सख्त से सख्त सजा देने की मांग करता है और अंकिता के मामले को पुरजोर तरीके से उठाने वाले संघर्षशील पत्रकार आशुतोष नेगी की तुरंत रिहाई की मांग करता है।


परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)

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