योगी-मोदी डरता है, पुलिस को आगे करता है
बरेली (यूपी) में भारत बंद के समर्थन और छोटे मझोले किसान विरोधी कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग करते इमके, पछास, क्रालोस के साथियों को योगी की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारियां आंदोलन को रोक नहीं पाएंगी। अंबानी-अडानी की चाकर मोदी सरकार को समझना होगा कि दमन से इस जन आंदोलन को नहीं रोका जा सकता।
छोटे-मझौले किसानों को खेती से बाहर करने वाले कृषि कानून वापस लो!
छात्र-मजदूर-किसान एकता जिन्दाबाद !!
29 नवम्बर को पछास के साथियों ने सिंधु बॉर्डर पर किसान आन्दोलन में भागीदारी की। साथ ही किसानों के बीच कृषि संकट और मौजदा कानूनों पर जारी पुस्तिका का वितरण भी किया गया।
हम मानते हैं कि मौजूदा कृषि बिल खेती को पूंजीपतियों और बहुराष्ट्रीय निगमों के हवाले करने के उद्देश्य से लाया गया है। जो पहले से तबाह छोटे-मझौले किसानों की बर्बादी की प्रक्रिया को द्रुत गति से बढ़ा देगा और बड़े पैमाने पर छोटे-मझौले किसानों की तबाही-बर्बादी के द्वारा भयंकर मानवीय त्रासदी को जन्म देगा। ऐसे में हमें छोटे-मझोले किसानों को पूंजीवादी उत्पादन प्रणाली के तहत उनकी अवश्यम्भावी तबाही-बर्बादी के प्रति आगाह करते हुए उन्हें बताना होगा कि समाजवाद में ही उनकी समस्याओं का मूलभूत समाधान किया जा सकता है। इसके बावजूद उनको तात्कालिक राहत दिलाने के लिए उनकी मांगों को उठाते हुए हमें इस आन्दोलन का समर्थन करना चाहिए।
उत्तराखंड में सभा की गई।
हल्द्वानी (उत्तराखण्ड) में मजदूर हड़ताल 26 नवंबर पर बुद्ध पार्क में सभा की गई। पछास के साथियों ने भी जोश खरोश के साथ प्रदर्शन में भागीदारी कर के मेहनतकशों के साथ अपनी एकजुटता जाहिर की।
सभा में बात रखते हुए वक्ताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने देश के छात्रों, मजदूरों, किसानों, महिलाओं, दलितों, अल्पसंख्यकों सब पर हमला बोला हुआ है। आज जरूरी है कि हम जाति धर्म के झगड़ों को छोड़कर मेहनतकशों की एकता स्थापित करें और फासिस्ट मोदी सरकार को मुंहतोड़ जवाब दें।
कौन बनाता हिन्दुस्तान, भारत का मजदूर किसान
छात्र-मजदूर-किसान एकता जिन्दाबाद !
आज 26 नवंबर को श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी बदलाव के खिलाफ और पूंजीपरस्त तीन कृषि कानूनों के खिलाफ मजदूर-किसानों द्वारा बुलाई गई हड़ताल के समर्थन में पछास के साथियों ने पोस्टरों के माध्यम से मेहनतकशों के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित की।
हाथरस की घटना के विरोध में शाहबाद डेरी (दिल्ली) में प्रदर्शन और सभा
हाथरस की घटना पर लालकुआं (उत्तराखण्ड) में जुलूस निकालकर पुतला दहन किया गया।
लालकुआं (उत्तराखण्ड) प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, प्रगतिशील युवा संगठन, इंकलाबी मजदूर केंद्र, सर्व श्रमिक निर्माण कर्मकार संगठन व दलित संगठनों ने संयुक्त रुप से आज कार रोड, बिंदुखत्ता (उत्तराखंड) में हाथरस की घटना के विरोध में जुलूस निकालकर अश्लील उपभोक्तावादी संस्कृति व उत्तर प्रदेश सरकार का पुतला दहन किया।
हाथरस की दलित युवती के बलात्कारी हत्यारों को सजा दो !
बरेली (उत्तर प्रदेश) हाथरस में दलित युवती मनीषा के साथ हुई अमानवीय घटना (बलात्कार व हत्या) के विरोध में कई संगठनों ने प्रदर्शन, ज्ञापन और कैंडल मार्च निकाला। परिवर्तनकामी छात्र संगठन, इंकलाबी मजदूर केंद्र, क्रांतिकारी लोक आधिकार संगठन, प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच संगठनों ने भी अपनी भागीदारी की ।
इन घटनाओं की जिम्मेदार ये पूंजीवादी व्यवस्था है। ये व्यवस्था ही ऐसे अपराधियों को पैदा करती है, जो ऐसी घटना को अंजाम देते हैं। पूंजीवादी समाज में हर चीज के तरह माहिलाओ को भी माल के रूप में पेश किया जाता है। उन्हें यौन वस्तु के रूप में पेश किया जाता है। पूंजीपति वर्ग और उसका प्रचार माध्यम सचेत रूप से अपने मुनाफे को और बढ़ाने के लिए महिलाओं को सेक्स ऑब्जेक्ट के रूप में पेश करता है। अश्लील गाने से लेकर पोर्न साइटों का पूरा मकड़जाल पूरी दुनिया के अंदर फैला हुआ है। ये पूंजीवादी व साम्राज्यवादी अश्लील संस्कृति ही ऐसे कुंठित नौजवानों को पैदा करती है। जो कहीं भी कभी भी ऐसी वीभत्स घटनाएं अंजाम देते हैं। कई मामले में तो परिवार के लोग ही शामिल होते हैं। जितना वो अपराधी इस वीभत्स घटना के लिए जिम्मेदार है उतना ही जिम्मेदार ये पूंजीवादी व्यवस्था है। हमें ऐसे अपराधों को जड़ से मिटाने के लिए इस पूरी ही पूंजीवादी निजाम को खत्म करना होगा। तभी आगे मनीषा जैसी लड़कियों के साथ ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।
हाथरस की दलित युवती के बलात्कारियों को सजा दो!
पतित उपभोक्तावादी पूंजीवादी-साम्राजवादी अश्लील संस्कृति मुर्दाबाद!
जातिवादी व्यवस्था का नाश हो!
हाथरस के बलात्कारी हत्यारों को सजा दो !
भगत सिंह के जन्मदिन के उपलक्ष में बरेली में मेहनतकशों की बस्तियों में निकाली गई प्रभात फेरी
बरेली (उत्तर प्रदेश) आज 28 सितंबर 2020 को बाकरगंज में एक प्रभात फेरी निकाली गई जिसके अंत में एक नुक्कड़ सभा की गई।
इस सभा व रैली का मुख्य उद्देश्य था कि भगत सिंह के विचारों कों देश के मेहनत करने वालों तक पहुँचाना । इससे पूंजीवादी समाज को बदलकर एक नई समाजवादी व्यवस्था को कायम करने की ओर संघर्षों को आगे बढ़ाना और जनता को इंकलाब के रास्ते पर अग्रसर होने का संदेश देना।
भगत सिंह ने कहा था आम तौर पर लोग जैसी चीजें है उसके आदि हो जाते और बदलाव के विचार से ही कांपने लगते है आज हमको इसी निष्क्रियता कि भावना को क्रांतिकारी भावना से बदलने की जरूरत है।
अतः आज हम सभी छात्रों, युवा,मजदूर - मेहनतकशों, शोषित उत्पीड़ितों को एकजुट होकर इस पूरी पूंजीवादी व्यवस्था का नाश करने की आवश्यकता है।
इंकलाब जिंदाबाद
सम्राज्यवाद मुर्दाबाद
मजदूरों का राज समाजवाद जिंदाबाद
भगत सिंह की बात सुनो,
समाजवाद की राह चुनो।
देहरादून (उत्तराखंड) साथियो, आज 28 सितंबर को शहीद-ए-आज़म भगत सिंह का जन्म दिवस है। भगत सिंह ने शोषण- अन्याय मुक्त व बराबरी पर आधारित जिस आज़ाद भारत का सपना देखा था वह उनकी शहादत के इतने साल बाद भी अधूरा है। उस दौर में भगत सिंह द्वारा व्यक्त किये गए विचार आज भी समाज को बेहतर बनाने के संघर्ष में हमारे मार्गदर्शक हैं। आज शहीद भगत सिंह के विचारों को जानने- समझने व जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता है।
भगत सिंह के जन्मदिवस पर परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) व क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन (क्रालोस) की देहरादून इकाई ने भी हस्त लिखित पोस्टर के माध्यम से भगत सिंह के संघर्ष व बलिदान को याद किया तथा उनके विचारों को जनता तक पहुँचाने का प्रयास किया।
भगत सिंह की 113 वीं जयंती पर सभा की
लालकुआं (उत्तराखंड) आज 28 सितम्बर शहीद- ए- आजम भगत सिंह के जन्म दिवस के अवसर पर 'अवैध नशा विरोधी संयुक्त संघर्ष मोर्चा, बिंदुखत्ता' के कार्यकर्ताओं व गांववासियों द्वारा अंबेडकर भवन, संजय नगर- lll में उनकी 113 वीं जयन्ती मनाई।
इस दौरान साथियों ने कहा की आज भगत सिंह को याद करने की जरूरत बहुत ज्यादा है। भगत सिंह का आजादी के आंदोलन में एक महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वह क्रांतिकारी धारा के मुख्य प्रतिनिधि के तौर पर बने रहे। और राजनीतिक विचारों से हमेशा समाज में अपना योगदान देते रहे। आज भगत सिंह के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने की जरूरत है। लोग भी उनके विचारों को जान सकें और भगत सिंह के बताए रास्ते पर आगे चलें।
भगत सिंह को आज जानने की जरूरत किसी भी दौर से अधिक है। क्योंकि भगत सिंह ने आजादी के दौरान जो अन्याय- शोषण, उत्पीड़न, गुलामी आदि समस्याओं के खिलाफ लड़ने के लिए अलग जगाई थी। आज भी वही समस्याएं हमारे सामने मुँह बाये खड़ी हैं। उन्होंने छोटा जीवन जिया परन्तु इसी दौरान समाज को आगे बढ़ाने में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया। और क्रांतिकारी आंदोलन में अपना सम्पूर्ण जीवन झोंक दिया। जो समस्याएं भगत सिंह के दौर में थी वह आज भी बनी हुई है। बेरोजगारी पिछले 45 सालों में इस दौरान सबसे अधिक है। शिक्षा के हालात पहले से ही बत्तर थे। अब कोढ़ में खाज यह राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद तो गरीब मजदूर- मेहनतकशों को उससे भी दूर किया जा रहा है। इस तरह की तमाम समस्याओं से लड़ने के लिए भगत सिंह ने अपने दौर में जिन विचारों को लेकर समाज में गये थे। आज उसी तरह नौजवान पीढ़ी को भगत सिंह के विचारों समाजवादी भारत बनाने पर दृढ़ संकल्प होकर आगे बढ़ने की जरूरत है।
भगत सिंह के जन्म दिवस पर जखीरा में सभा
दिल्ली पछास द्वारा रेलवे लाइन के किनारे बसी बस्ती में जुलूस निकालते हुए अमर पार्क पर सभा की गई। इस दौरान लोगों के बीच भगत सिंह के विचारों का प्रचार करते हुए उन्हें आज की लूटेरी सरकार और व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करने के लिए संगठित होने का आह्वान किया गया।
शाहबाद डेरी में भगत सिंह के जन्म दिवस की पूर्व संध्या पर जुलूस
दिल्ली 27 सितंबर को भगत सिंह के जन्म दिवस की पूर्व संध्या पर इंकलाबी मजदूर केंद्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन द्वारा शाहबाद डेरी मजदूर बस्ती में जुलूस निकाला गया।
इस दौरान हुई सभा में बात रखते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज बेरोजगारी अपने चरम पर है। सरकार मजदूरों-किसानों को पूरी तरह से गुलाम बनाने के लिए कानूनों में संशोधन कर रही है। जनता की जिन्दगी लगातार रसातल में जाती जा रही है। ऐसे में भगत सिंह के विचारों को अपनाते हुए बदलाव की लड़ाई, क्रान्ति की लड़ाई को आगे बढ़ाने की जरूरत है।
भगत सिंह के जन्म की पूर्व संध्या पर बैठक
काशीपुर (उत्तराखंड) आज 27 सितम्बर को शहीद भगत सिंह के विचारों पर हिम्मतपुर में छात्रों-नौजवानों के बीच चर्चा की गई। इस दौरान भगत सिंह के लेखों के कुछ कोटेशन पर पोस्टर भी रखे गए। शोषण मुक्त समाज के निर्माण के लिए, शहीदों के भारत को बनाने के लिए, हमें इस पूंजीवादी व्यवस्था को ही खत्म करना होगा। यही आज छात्रों-नौजवानों पर सामाजिक जिम्मेदारी है।
अवैध नशों के खिलाफ जारी है संघर्ष
लालकुआं (उत्तराखंड) "अवैध नशा विरोधी संयुक्त संघर्ष मोर्चा, बिन्दुखत्ता" द्वारा 17 सितम्बर को रावत नगर- I में कच्ची शराब व अवैध नशों के खिलाफ अभियान चलाया। इस दौरान कई घरों में गए और इन नशों से होने वाले नुकसान व गांव के खराब होते माहौल पर बात की।
आज अभियान के दौरान आबकारी विभाग के लोगों को भी बुलाया गया था। आबकारी विभाग के लोगों ने बताया कि आप लोग जो कार्यवाही कर रहे है। अभियान चला रहे है, यह अच्छी कार्यवाही है और आप लोग इसको जारी रखिए, हम आपके साथ हैं। आप जब भी कहेंगे हम अवैध नशों का धंधा करने वालों के खिलाफ कार्यवाही करने आएंगे। आप हमें अवैध नशों का कारोबार करने वाले लोगों की नामजद रिपोर्ट दीजिए। हम उनको गिरफ्तार करेंगे। ऐसा व्यक्ति एक बार में छूट जाता है। तो हम उसको दोबारा गिरफ्तार करेंगे। दुबारा छूटने पर अगर वह व्यक्ति तीसरी बार गिरफ्तार हो गया तो उस व्यक्ति पर गुंडा एक्ट लग जाएगा। और वह व्यक्ति इस जिले में नहीं रह पाएगा। तमाम सारे जो अवैध नशा कारोबारी हैं उनके विरोध में तो यह अभियान चलाया गया है उनसे भी अपील की जाती है कि वह इस तरह का अवैध धंधे को छोड़कर मुख्य कामों से जुड़कर गांव व समाज को आगे बढ़ाने का काम करें। अन्यथा संघर्ष मोर्चा व गाँव के लोग उनके विरुद्ध कानूनी कार्यवाही करने को विवश होंगे।
इस दौरान बढ़ती बेरोजगारी पर भी चर्चा कर उसका विरोध किया गया। बेरोजगारों से एकजुटता प्रदर्शित की गई।
सबको शिक्षा, सबको काम
लड़कर लेंगे, नौजवान!
आवाज़ दो, हम एक हैं!
देहरादून (उत्तराखंड) 17 सितंबर को परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) सहित विभिन्न जनसंगठन बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर व रोजगार के अधिकार के लिए नौजवानों के साथ एकजुटता जाहिर करने हेतु दीन दयाल पार्क (तहसील चौक के पास) पर एकत्रित हुए और निम्नलिखित मांगों के लिए अपनी आवाज़ बुलंद की-
सभी रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्तियां करो। रुकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं को अविलंब पूरा करो।
प्रत्येक काम करने योग्य व्यक्ति को उसकी योग्यतानुसार रोजगार दो, रोजगार न दिए जाने पर प्रत्येक बेरोजगार को ₹ 10,000 प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता दो।
निजीकरण- विनिवेशीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाओ।
ठेकेदारी प्रथा खत्म कर सभी को स्थायी रोजगार दो।
बेरोजगारी का एक इलाज, ख़त्म करो पूंजी का राज।
करोड़ों लोग हैं बेरोजगार, कौन है इसका जिम्मेदार।
ये सरकार वो सरकार, अम्बानी- अडानी की सरकार।।
कार्यक्रम में परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास), पीपुल्स फोरम उत्तराखंड, जन संवाद समिति, जनहस्तक्षेप, एसएफ़आई, दून नागरिक राहत समूह आदि संगठनों तथा सीपीएम व सीपीआई (एम एल) के लोग शामिल रहे।
बेरोजगारी के खिलाफ बरेली में नौजवानों का धरना प्रदर्शन व ज्ञापन
बरेली (उत्तर प्रदेश) 17 सितम्बर को परिवर्तनकामी छात्र संगठन व विभिन्न बेरोजगार छात्रों द्वारा बेरोजगारी के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। देश में बढ़ रही बेरोजगारी से आज देश का युवा बेहद आक्रोशित है। सरकार की एक के बाद दूसरी नीति बेरोजगारी को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार है।
केंद्र सरकार ने नौकरियों में रोक लगा दी है तो योगी सरकार 5 वर्ष का संविदा का प्रस्ताव लाकर बेरोजगारों के जख्मो पर मिर्च डालने जैसा काम कर रही है। कोरोना महामारी की आड़ में सरकार एक के बाद दूसरी सरकारी कम्पनियो को बेचकर नौकरी पाने की सम्भावनाओं को खत्म कर रही है।
सरकार की नीतियों से आज यह स्पष्ट हो गया है कि सरकार देश के पूंजीपतियों के लिए काम कर रही है। पूंजीवादी व्यवस्था का सदैव हित बेरोजगारी को बनाकर रखने में है क्योंकि इससे उसे हमेशा सस्ता मजदूर मिलता रहता है। जिसका वह बेतहाशा शोषण कर मुनाफा कमाता है। इसलिए बेरोजगारी के खिलाफ संघर्षो का निशाना हमें पूंजीवाद को भी बनाना होगा और समाजवादी क्रांति की राह भी चुननी होगी । तभी हमें बेरोजगारी जैसी तमाम समस्याओं से मुक्ति मिल सकती।
बेरोजगारी के खिलाफ कार्यक्रम की शुरूआत दामोदर स्वरूप पार्क में सभा से हुई। सभा मे वक्ताओं ने बेरोजगारी फैलाने वाली सरकार की नीतियों का खुलासा किया व सरकार के कामो की आलोचना की। सभा में सास्कृतिक मंच द्वारा 'जागो फिर एक बार जागो जागो रे' गीत गाकर नौजवानों में उत्साह का संचार किया। सभा के बाद जोरदार नारों के साथ एक जुलूस कचहरी पंहुचा। जहां एस डी एम के माध्यम से राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजा गया।
सबको शिक्षा,सबको काम
लड़कर लेंगें नौजवान
सभी रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्तियां करो। रुकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं को अविलंब पूरा करो।
प्रत्येक काम करने योग्य व्यक्ति को उसकी योग्यतानुसार रोजगार दो, रोजगार न दिए जाने पर प्रत्येक बेरोजगार को ₹ 10,000 प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता दो।
निजीकरण- विनिवेशीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाओ।
ठेकेदारी प्रथा खत्म कर सभी को स्थायी रोजगार दो।
बेरोजगारी का एक इलाज, ख़त्म करो पूंजी का राज।
बेरोजगारी जैसी तमाम समस्याओं से निजात कहाँ मिलेगी?
समाजवाद में, मजदूर राज में!
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
परिवर्तनकामी छात्र संगठन ( पछास )
बेरोजगारी के खिलाफ हल्द्वानी में धरना
हल्द्वानी (उत्तराखंड) परिवर्तनकामी छात्र संगठन, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन व भाकपा ( माले) के कार्यकर्ताओं द्वारा बेरोजगारी के खिलाफ बुद्ध पार्क हल्द्वानी में सांकेतिक धरना प्रदर्शन किया गया।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि देश में बेरोजगारी भयावह होती जा रही है। सरकारों का ध्यान आकर्षित करते हुए खाली पदों को शीघ्र भरने की मांग की। वक्ताओं ने कहा की रोजगार का सवाल पूंजीपतियों के रहमो करम, पर छोड़ दिया गया है। कोरोना महामारी की आड़ में मजदूरों के रोजगार एक मुश्त छीन लिए गए। सरकार रोजगार छिनने में अगुआ बन कर सक्रीय हुई। लेकिन जीविका के सवाल पर मौन साध लिया गया।
व्यापक समाज आज बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहा है। रोजगार का मामला केवल नौजवानों की समस्या नही है। बल्कि समाज में हर परिवार इस त्रासदी को सहन कर रहा है। यह प्रतिरोध सभा संपूर्ण समाज से आवाहन करती है कि इस विकराल समस्या से संघर्ष में एकजुट हो।
23 करोड़ हैं बेरोजगार कौन है इसका जिम्मेदार
ये सरकार वो सरकार, अडानी अंबानी की सरकार
फरीदाबाद (हरियाणा) 17 सितम्बर, बेरोजगार दिवस पर परिवर्तनकामी छात्र संगठन और इंकलाबी मजदूर केंद्र के साथियों ने आज़ाद नगर झुग्गी में बेरोजगारी के खिलाफ प्रदर्शन किया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विरोध में देहरादून में प्रदर्शन
देहरादून (उत्तराखंड) में विभिन्न जनसंगठनों द्वारा आज 5 सितंबर को दीन दयाल पार्क पर अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम में परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) के लोग भी शामिल रहे।
पछास के साथियों द्वारा नयी शिक्षा नीति 2020 का विरोध करते हुए कहा गया कि यह नीति शिक्षा को आम आदमी की पहुँच से बाहर कर देगी। यह शिक्षा नीति देश के पूंजीपति वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार की गयी है और उनके हितों के अनुरूप ही यह शिक्षा में बदलाव की बात करती है। यह नीति पूर्व माध्यमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक में निजी स्कूलों-कॉलेजों को खोलने की छूट प्रदान करती है। साथ ही यह निजी स्कूलों-कालेजों को अपनी फीस खुद तय करने की छूट भी प्रदान करती है। यह नीति माध्यमिक व उच्च शिक्षा में वोकेशनल (व्यावसायिक) कोर्सों को बढ़ावा देने की बात करते हुए पूंजीपतियों की आज की जरूरतों के अनुरूप कई तरह के कामों को करने में सक्षम मजदूरों को तैयार करने की वकालत करती है। इसीलिए यह शिक्षा नीति बहु विषयक कोर्स लागू करने की बात करती है। यह शिक्षा नीति उधोगों की जरूरतों के अनुरूप शोध कार्यों की सिफारिश करती है। यह शिक्षा नीति सीधे-सीधे शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने व पूंजीपतियों को शिक्षा के क्षेत्र में लूट की और छूट प्रदान करने की नीति है। इस तरह यह शिक्षा नीति आम मज़दूर-मेहनतकशों के खिलाफ है। यह गरीब और सामाजिक-आर्थिक-सांस्कृतिक रूप से पिछड़े समूह के छात्र- छात्राओं को शिक्षा पाने से वंचित कर देगी। इसी तरह यह शिक्षा में भगवाकरण को आगे बढ़ाने की भी बात करती है। इस शिक्षा नीति का पुरजोर विरोध करते हुए सबको निःशुल्क और एकसमान शिक्षा प्रणाली के लिए आवाज बुलंद करने की जरुरत है।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने बढ़ती महिला हिंसा, बढ़ती बेरोजगारी, श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी बदलाव, बदहाल व लचर स्वास्थ्य सेवाओं, फासीवाद के बढ़ते खतरे व छिनते जनवादी अधिकारों के विरोध में भी अपनी बातें रखी।
काशीपुर में ज्ञापन देकर विरोध जताया
काशीपुर (उत्तराखंड) में आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विरोध में ज्ञापन देते परिवर्तनकामी छात्र संगठन के कार्यकर्ता। इस दौरान साथियों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को वापस लेकर इसकी जगह एकसमान, निशुल्क, वैज्ञानिक, व तार्किक शिक्षा प्रदान करने की मांग की।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विरोध में नारेबाजी करते हुए ज्ञापन देकर विरोध जताया
लालकुआं (उत्तराखंड) परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) ने आज राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के विरोध में एसडीएम के माध्यम से राष्ट्रपति महोदय भारत सरकार को ज्ञापन प्रेषित किया।
इस दौरान चली सभा में बात रखते हुए पछास के साथी ने कहा कि केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 जारी कर दी है। इस शिक्षा नीति में शिक्षा के निजीकरण और कारपोरेट के हितों को आगे बढ़ाने के कई प्रावधान इसमें किए गए हैं। प्राथमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा में यह इस तरह के प्रावधानों को लागू करने की अनुशंसा करती है। यह पूर्व माध्यमिक शिक्षा से लेकर उच्च शिक्षा तक निजी स्कूलों-कॉलेजों को खोलने की छूट प्रदान करती है। साथ ही यह शिक्षा नीति निजी स्कूलों-कालेजों को अपनी फीस खुद तय करने की छूट प्रदान करती है। यह उच्च शिक्षा में व्यावसायिक कोर्स को तैयार करना इसे ज्यादा से ज्यादा छात्रों तक इसकी पहुंच को सुलभ करने की बात करती है। उद्योगों की जरूरतों के अनुसार शोध कार्य करवाने की बात करती है। इसी तरह यह शिक्षा नीति बहू विषयक कोर्स लागू करने की बात करती है। यह शिक्षा नीति कक्षा 6 से ही शिक्षा के व्यवसायीकरण और ओपन स्कूल के तहत शिक्षा देने की बात करती है। यह सीधे-सीधे शिक्षा के निजीकरण को बढ़ावा देने व पूंजीपतियों को शिक्षा के क्षेत्र में और छूट प्रदान करने की नीति है। इस तरह गरीब और सामाजिक-आर्थिक-सांस्कृतिक रूप से पिछड़े समूह के छात्र शिक्षा पाने से वंचित हो जाएंगे। इसी तरह यह शिक्षा में भगवाकरण को आगे बढ़ाने की बात करती है।
पछास की साथी ने कहा कि इस समय कोरोना संकट के कारण केंद्रीय शिक्षा बोर्ड सीबीएसई ने पाठ्यक्रम को कम करने के नाम पर कक्षा 9 वीं व 11 वीं में पढ़ाए जाने वाले संघीय ढांचा, राज्य सरकार, नागरिकता, राष्ट्रवाद और धर्मनिरपेक्षता जैसे अध्याय इस वर्ष पाठ्यक्रम से कम कर दिए है। चुन-चुन कर प्रगतिशील लोकतांत्रिक पाठ्यक्रमों को हटाया गया है। एक लोकतांत्रिक देश में इन्हीं विषयों को हटाना सीधे-सीधे संघीय ढांचे में हमला है। यह दिखाता है कि भाजपा को जो भी विषय पसंद नहीं आते है उनको चुन-चुन कर खतम कर रही है। और इसको लगातार आगे बढ़ा रही है। कोरोना संकट के समय में भी इस तरह की कोशिशें जारी है।
पछास की अन्य साथी ने कहा कि संविधान के अनुसार शिक्षा एक मौलिक अधिकार है। गरीब, शोषित-वंचित तबके के छात्रों को सरकार-राज्य की जिम्मेदारी है कि वह उनको शिक्षा प्रदान करें। परंतु यह शिक्षा नीति उनको शिक्षा देना छोड़ कर उनको शिक्षा से बाहर करने का रास्ता प्रदान करती है और शिक्षा के मौलिक अधिकार से उनको वंचित करती है।
इस दौरान अन्य साथियों ने भी मांग की कि-
1- राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को वापस लेकर सबको सार्वजनिक, निशुल्क व एकसमान शिक्षा प्रणाली लागू की जाए।
2- सीबीएसई द्वारा कोरोना संकट का बहाना बनाकर पाठ्यक्रम से प्रगतिशील लोकतांत्रिक पाठों को हटाने पर रोक लगाई जाए।
3- शिक्षा के निजीकरण पर तत्काल रोक लगाई जाए।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) रद्द करो !
बरेली (उत्तर प्रदेश) में आज परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) और क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन ने मिलकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के खिलाफ डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति शिक्षा में निजीकरण को बढ़ाकर उसे पूर्णता पूजीपतियों के मुनाफे की वस्तु बना देने की नीति है। साथ ही सुंदर-सुंदर बाते कहकर शिक्षा के भगवाकरण की नीति है। यह नीति छात्रों को शिक्षित नोजवान बनाने के स्थान पर उसे एक रोबोट में बदलने के लिए है ताकि वह पूंजीपतियों की सेवा में लग सके। यह नीति छात्रों के जनवादी अधिकारों उसके आवाज उठाने की बात तक नही करती है। छात्रों को इस नीति का हर सम्भव विरोध करना चहिये।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति रदद करो !
शिक्षा का निजीकरण करना बंद करो !
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
परिवर्तनकामी छात्र संगठन
अवैध नशे के खात्मे के लिए बिन्दुखत्ता में संघर्ष हेतु बैठक की गई
लालकुआं (उत्तराखंड) बिन्दुखत्ता में अवैध नशा (कच्ची शराब, चरस, स्मैक, ड्रग्स आदि) का कारोबार व सेवन बढ़ता जा रहा है। इसी को लेकर आज संजय नगर 3, अंबेडकर पार्क में एक बैठक का आयोजन किया गया। इससे पूर्व 16 अगस्त को बैठक करके "अवैध नशा विरोधी संयुक्त संघर्ष मोर्चा बिन्दुखत्ता" का गठन किया गया था। इस मोर्चे की संयोजिका पुष्पा को चुना गया। इसके बाद पिछले 4 दिनों से इलाके में अभियान चलाकर आज आम सभा का आयोजन किया गया।
इस दौरान प्रगतिशील महिला एकता केंद्र व मोर्चे की संयोजिका पुष्पा ने कहा कि आज गांव के अंदर नशे का प्रचलन काफी बढ़ गया है। अवैध नशे के कारोबारी कच्ची शराब व नशे के नाम पर लोगों को जहर बांट रहे है। इसके बाद इसका प्रभाव महिलाओं पर पढ़ता है उनके साथ उत्पीड़न, छेड़छाड़, हिंसा की घटनाओं में बढ़ोतरी होती जा रही है। नशेड़ी पार्क व गांवों में झुंड बनाकर गाली-गलौज, लड़ाई-झगड़ा करते हैं। इससे महिलाओं, गाँव के नागरिकों का शाम होते ही बाहर निकलना मुश्किल होता जा रहा हैं।
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) के महेश ने कहा कि छोटे-छोटे बच्चों से लेकर युवाओं को नशे की गर्त में डुबाया जा रहा है। युवाओं को स्मैक, चरस, अफीम, गांजा आदि नशों का आदि बनाकर उनको बर्बाद किया जा रहा है। युवाओं-मेहनतकशों के पास बेहतर जीवन व रोजगार नहीं है, अगर जिनके पास रोजगार है भी तो वह इतना मामूली सा रोजगार है कि उनका जीवन इससे चलना मुश्किल है। इस तरह की तमाम सारी समस्याओं, परेशानियों को जहां इन्हें हल करने में लगाना चाहिए था इसकी जगह व नशे का सेवन कर रहे हैं। यह नशा तत्काल तो उनको इन चीजों से राहत दे सकता है परन्तु उनकी समस्याएं हल नहीं होती हैं। और वह नशे की गर्त में डूब जाते हैं। जहां अमीर लोगों के पास पैसा है वह पैसे के दम पर कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र हैं। अच्छा जीवन, शरीर को नुकसान ना पहुंचाएं और पर्याप्त पौष्टिक भोजन के साथ उनके लिए महंगी शराब आदि उनको उपलब्ध है। परंतु गरीब-मेहनतकशों के पास पैसा नहीं है अपने जीवन को चला पाना ही इनके लिए मुश्किल है ऐसे में यह सस्ते व जहरीले नशों की ओर बढ़ जाते हैं। और इसके साथ ही अपने शरीर, परिवार, घर, समाज, बच्चों का जीवन व भविष्य सब कुछ खतरे में डाल बर्बादी की कगार तक पहुँच जाते हैं। नशे की पूर्ति करने के लिए चोरी, डकैती तक कर देते हैं। इसके भयावह व बुरे परिणाम मेहनतकशों को भुगतने पड़ते हैं।
प्रगतिशील युवा संगठन के रमेश ने कहा कि गांव के गांव नशों से बर्बाद किए जा रहे है हम इस बर्बादी के खिलाफ संघर्ष करते रहेंगे। सर्व श्रमिक निर्माण कामगार संगठन के उमेद ने कहा कि आज मजदूर दिन भर की थकान को उतारने के लिए अपने कम आर्थिक हैसियत के कारण सस्ते व जहरीले नसों की ओर बढ़ रहे हैं। सर्वोदय शिल्पकार सेवा समिति के लक्ष्मण धपोला ने भी अपनी बात रखी।
इसके अलावा गांव के तमाम ग्रामीणों ने सभा में अपनी बात रखी और कहा कि यह काम शासन-प्रशासन का है कि वह अवैध नशे के कारोबारियों व नशेड़ियों पर अंकुश लगाए। परंतु प्रशासन अपना काम नहीं कर रहा है इसलिए गांव के जो प्रगतिशील युवा है, संघर्षशील महिलाएं है, जागरूक नागरिक है उनको आगे बढ़ करके अपनी भूमिका निभानी पड़ रही है। शासन-प्रशासन से मांग की गई कि वह अपना काम ज्यादा मुस्तैदी से करे। इस काले धन्धे के गठजोड़ का तुरन्त खात्मा करें। और शाम होते ही गांव, पार्कों व सार्वजनिक स्थलों पर गस्त करें। ग्रामीण भी इसमें अपना सहयोग करेंगे। मोर्चे की तरफ़ से अवैध कारोबारियों को रोकने, नशेड़ियों की बतमीजी व गुंडागर्दी रोकने के लिए रात्रि गश्त टीम का गठन किया गया। इस दौरान सामाजिक दूरी व शोशल दूरी का पालन किया गया।
महामारी के दौर में स्कूल ना खुलने तक छात्रों की फीस माफ करो!
प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों के लिए सरकार द्वारा राहत कोष बनाकर दिया जाए वेतन
हल्द्वानी (उत्तराखण्ड) के बुद्ध पार्क मे पिछले 16 दिन से प्राइवेट स्कूलों मे ऑनलाइन शिक्षा के नाम पर फीस वसूलने के विरोध मे धरना प्रदर्शन चल रहा है। जो 17 अगस्त से क्रमिक भूख हड़ताल मे तब्दील हो गया।
लॉकडाउन से "छात्रों की फीस माफ़ करो", "प्राइवेट स्कूलों के शिक्षकों की सैलरी के लिए राज्य सरकार एक राहत कोष बनाये", "NO SCHOOL- NO FEES", NO INCOME - NO FEES" की माँगो तले यह आंदोलन चल रहा है। क्रमिक भूख हड़ताल के चौथे दिन समर्थन मे परिवर्तनकामी छात्र संगठन के साथी 24 घण्टे के भूख हड़ताल पर बेठें। आंदोलन के संयोजक रोहित कुमार ने बताया कि 16 दिन हो गए अभी तक कोई भी मंत्री या प्रशासनिक अधिकारी आंदोलन स्थल मे बात करने तक नहीं आया। अगर सरकार का रुख आगे भी यही रहता है तो वह इसको आमरण अनशन मे तब्दील करेंगे। पछास की ओर से, इसको आम जन तक पहुँचाने और संघर्ष मे उनको साथ लाने की अपील की गयी।
अवैध नशे के विरोध में अभियान
लालकुआं (उत्तराखंड) कच्ची शराब, चरस, स्मैक आदि अवैध नशों के विरोध में आज संजय नगर- 3 बिन्दुखत्ता में अभियान चलाते पछास, मोर्चे के अन्य साथी व गांव के लोग। इस दौरान डोर-टू-डोर अभियान चलाए गए।
कच्ची शराब व अवैध नशे के खिलाफ संजय नगर, बिन्दुखत्ता में एकजुट हुए गाँववासी
लालकुआं (उत्तराखंड) अंबेडकर पार्क, संजय नगर, नंबर- 3 में ग्रामीणों द्वारा आम सभा का आयोजन किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में चल रहे अवैध नशे के कारोबार को बन्द करवाना था। बिन्दुखत्ता क्षेत्र में तमाम जगहों पर कुछ लोगों द्वारा (कच्ची शराब, स्मैक और चरस) अवैध नशे का धड़ल्ले से कारोबार व सेवन किया जा रहा है। जिससे महिलाओं व गाँव के लोगों का शाम होते ही सड़कों पर निकलना मुश्किल होता जा रहा है। जिसको लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। ग्रामीणों ने बैठक में तय किया कि नशे के कारोबार के खिलाफ गांव के प्रगतिशील नौजवानों, महिलाओं नागरिकों की टीमों का गठन किया जाय जो नशे के कारोबारियों पर नजर रखेंगे तथा गांव में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाएंगे। जो युवा नशे में लिप्त हैं उन को मुख्यधारा में लाने का प्रयास करेंगे। अवैध कारोबारियों को समझाया जाए ना सुधरने पर उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही की जाएगी। इसी बैठक में 17 अगस्त से इलाके में अभियान तय किये गये हैं।
बैठक में "अवैध नशा विरोधी संयुक्त संघर्ष मोर्चा" का गठन किया गया। उक्त मोर्चे की संयोजिका पुष्पा (प्रगतिशील महिला एकता केंद्र) को सर्वसम्मति से चुना गया। साथ ही मोर्चे में अन्य सदस्य भी चुने गये। इस दौरान सामाजिक दूरी का पालन किया गया। अन्त में कामगार संगठन के साथियों ने मास्क का वितरण किया।
बैठक में-
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)
प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र
इंक़लाबी मज़दूर केन्द्र
प्रगतिशील युवा संगठन
सर्व श्रमिक निर्माण कामगार संगठन
के कार्यकर्ताओं सहित गाँव के तमाम लोग व समाजसेवी उपस्थित रहे।
दिल्ली पुलिस शर्म करो !
गिरफ्तार छात्रों को रिहा करो !!
दिल्ली साथियों आज डीयू के प्रोफेसर हनी बाबू की रिहाई की मांग को लेकर डीयू में प्रोटेस्ट कर के लौट रहे छात्रों में से 6 को पुलिस ने गिरफतार कर लिया है। पछास के एक साथी Salman Hussain भी अन्य संगठनों के साथियों के साथ डिटेन किए गए हैं। अभी पूरी सूचना नहीं मिली है। बता दें कि कैम्पस में धारा 144 नहीं लगी है फिर भी छात्रों को क्यों गिरफतार किया गया इसका जवाब दिल्ली पुलिस को देना चाहिए। पुलिस का कहना है कि स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों को देखते हुए विरोध-प्रदर्शनों पर रोक लगाई गयी है परंतु यदि कैम्पस में शांतिपूर्ण तरीके से अपने शिक्षक की रिहाई की मांग उठाना भी गलत है तो लगातार घटती ‘स्वतंत्रता़’ की वास्तविकता को भी समझाा जा सकता है।
कच्ची शराब व अवैध नशे के खिलाफ एकजुट हुए बिन्दुखत्ता के गाँववासी
लालकुआं (उत्तराखंड) आज इंदिरा नगर व राजीव नगर में ग्रामीणों द्वारा आम सभा का आयोजन किया गया। जिसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में चल रहे अवैध नशे के कारोबार (कच्ची शराब, स्मैक, चरस आदि) को रोकना था। गाँव में अवैध नशे का कारोबार किया जा रहा है। जिसको लेकर ग्रामीणों में आक्रोश था।
1 अगस्त को ग्रामीणों ने बैठक में तय किया था कि नशे के कारोबार के खिलाफ गांव के प्रगतिशील युवा, महिलाएं आदि नागरिक अभियान चलाएंगे। बैठक के उपरान्त कई टीमों का गठन किया गया था जो नशे के कारोबारियों पर नजर रखने व गांव में नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चला रहे थे। जो युवा नशे में लिप्त हैं उनको समझाते हुए इससे उबरने की अपील की जा रही थी।
आज बैठक में आघे भी इस तरह के अभियान गाँव में चलाने व पूरे इलाके के स्तर पर मोर्चा बनाने पर जोर दिया गया। इस दौरान सभा में-
परिवर्तनकामी छात्र संगठन
प्रगतिशील महिला एकता केंद्र
प्रगतिशील युवा संगठन
व गाँव के नागरिकों ने भागीदारी की। इस दौरान भौतिक दूरी का पालन किया गया।






































































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