हमारे बारे में

परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) की स्थापना 1996 में हुयी थी। तब से लेकर अब तक संगठन ने तमाम राजनीतिक, सामाजिक, शैक्षणिक मुद्दों पर क्षमताभर योगदान किया है। शहीद भगत सिंह के क्रांतिकारी विचारों को छात्र समुदाय के बीच स्थापित करने के लिए संगठन प्रयासरत है। छात्र समुदाय को क्रांतिकारी छात्र राजनीति के बैनर तले एकजुट करने के लिए पछास संकल्पबद्ध है।

पछास का उद्देश्य 

भारतीय समाज के अनुरूप भारतीय शिक्षा भी पूंजीवादी है जोे सबको शिक्षा के अवसर तक प्रदान नही करती। यह शिक्षा छात्रों को पूंजीवाद के व्यक्तिवादी मूल्यों-आदर्शो एवं संस्कृति पर खड़ा कर एकांगी व आत्मकेन्द्रित बनाती है।
        पछास पूंजीवादी शिक्षा के बरक्स समाजवादी शिक्षा के लिए संघर्ष करेगा। पछास तार्किक-ऐतिहासिक-वैज्ञानिक व जीवन श्रम से जुड़ी समाजवादी शिक्षा को हासिल करने के लिए व्यापक छात्र आबादी को एकजुट करेगा। इस हेतु समाजवादी व वैज्ञानिक विचारधारा को प्रचारित करने के साथ-साथ समाज में अन्य उत्पीड़ित वर्गो-तबकों के न्यायप्रिय आंदोलनों का सक्रिय सहयोग व समर्थन करेगा।

हम संघर्षरत हैं 

पछास लगातार विभिन्न समाजिक समस्याओं, छात्रों की समस्याओं, विभिन्न वर्गो-तबकों के संघर्षो में शामिल रहा है। कालेज परिसरों में गैरजनवादी माहौल, सरकार-कालेज प्रशासन की छात्र विरोधी नीतियों के खिलाफ संगठन द्वारा विभिन्न मौकों पर संघर्ष लड़े गए। शिक्षा के निजीकरण के खिलाफ संगठन द्वारा लगातार छात्रों के बीच उद्देलन पैदा करने का प्रयास किया गया। निजी कालेजों की मनमानी, धोखाधड़ी के खिलाफ भी कई मौकों पर संगठन द्वारा आंदोलन विकसित किए गए।
        देश में बढ़ रही बेरोजगारी, जिसे विश्व आर्थिक संकट ने और भी भयावह स्तर पर पहुंचा दिया है के खिलाफ भी संगठन द्वारा व्यापक अभियान चलाए गए। सरकार की बेरोजगारी पैदा करने वाली नीतियों और पूंजीवादी व्यवस्था के बेरोजगारी को पैदा करने के चरित्र को छात्रों के बीच बेनकाब किया गया।
        साम्प्रदायिकता, जातिवाद, क्षेत्रवाद आदि विघटनकारी विचारों का संगठन द्वारा मुखर विरोध किया गया। बीते कुछ वर्षो से देश में बढ़ रहे फासीवादी आंदोलन का भी संगठन द्वारा तीखा विरोध किया गया। परचों, पुस्तिकाओं, सेमिनार, आंदोलनों के जरिए फासीवादी आंदोलन के खतरों और क्रांति की जरूरत सम्बन्धित विचारों को छात्रों के बीच प्रचारित किया गया।
        महिलाओं के खिलाफ बढ़ रहे अपराधों के खिलाफ पछास लगातार संघर्षरत रहा है साथ ही महिलाओं की समानता के लिए चल रहे संघर्षो का संगठन प्रबल समर्थक रहा है। इसके लिए चल रहे तमाम संघर्षो का संगठन हिस्सा रहा है। कालेजों में छात्राओं के साथ गैरबराबरी पूर्ण व्यवहार के खिलाफ भी संगठन द्वारा कई अभियान व संघर्ष खड़े किए गए।
        इन सब के अतिरिक्त संगठन मजदूरों, किसानों व समाज के अन्य शोषित-उत्पीड़ित तबको के संघर्षो में शिरकत कर अपनी एकजुटता प्रदर्शित करता रहा है।

चुनौतियां और रास्ता 

छात्र समुदाय के सामने मुख्य तौर पर चुनौती यह पूंजीवादी व्यवस्था है। इस व्यवस्था में निरंतर अंतराल पर आने वाली मंदियां पहले से मौजूद बेरोजगारी की समस्या को और विकाराल बना देती हैं। यह पूंजीवादी व्यवस्था की मुनाफे की हवस ही है जो तमाम छात्रों को पढ़ने तक का अवसर तक नही देती है। शिक्षा का निजीकरण कर ये शिक्षा से भी भारी मुनाफा पीटती है। 
        यह पूंजीवादी व्यवस्था ही है जो जनता को निर्ममता से कुचलने के लिए फासीवाद कायम करती है। जिसका खतरा आज भारत पर भी मंडरा रहा है। जिसके खिलाफ छात्र समुदाय को एकजुट होने की आवश्यकता है। 
        उपरोक्त समस्याओं को खत्म करने का रास्ता भगतसिंह द्वारा दिखाया रास्ता ही है यानि क्रांति का रास्ता, समाजवाद का रास्ता। आज इस बात की सख्त आवश्यकता है कि छात्र-नौजवान भगतसिंह के विचारों को गहराई से समझें और इन विचारों को अपने जीवन में उतारें। तभी हम पूंजीवादी व्यवस्था को खत्म कर एक नए समाज समाजवादी व्यवस्था को कायम कर सकते हैं।

आप पछास का सहयोग कैसे कर सकते हैं-

1. पछास के सदस्य व कार्यकर्ता बनकर।
2. पछास द्वारा वितरित किए जा रहे साहित्य का अध्ययन करके व             दूसरे लोगों के बीच इसका वितरण करके।
3. पछास द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न अभियानों, जुलूस, गोष्ठियों,             आंदोलनों आदि में शिरकत करके।
4. संगठन की कार्यवाहियों की आलोचना व नए सुझाव हम तक प्रेषित           करके।
5. छात्र समुदाय व समाज में लोगों के साथ हो रहे अन्याय, उत्पीड़न की         घटना की सूचना हमको देकर।
6. पछास की कार्यवाहियों के लिए आर्थिक सहयोग करके व दूसरे लोगों         से आर्थिक सहयोग जुटाकर।

क्रांतिकारी छात्रों-युवाओं के संघर्षों को आगे बढ़ाने के लिए पछास को आर्थिक सहयोग करें!


 

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