28 September 2025
लद्दाख में जनता के आंदोलन का दमन बंद करो!
1 May 2025
नैनीताल में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की कोशिशों पर रोक लगाओ।
21 March 2025
अमर शहीदों का अधूरा सपना मिलकर हमें है पूरा करना…
25 December 2024
भगतसिंह पर हमले का विरोध करें!
27 November 2024
काकोरी ट्रेन एक्शन के सौ साल
16 March 2024
आइये! शहीदों की क्रांतिकारी विरासत को आगे बढ़ायें।
12 December 2023
आओ! काकोरी शहीदों, क्रांतिकारियों की विरासत को आगे बढ़ाएं!
19 May 2023
नगीना कालोनी को रेलवे, शासन-प्रशासन द्वारा उजाड़े जाने का विरोध करो!
11 May 2023
ब्रज भूषण शरण सिंह को गिरफ्तार करो!
22 March 2023
‘‘हवा में रहेगी मेरे ख्याल की बिजली’’
क्रांतिकारी कभी मरते नहीं हैं। वे बार-बार पीड़ित मेहनतकश जनता के दिलों में, संघर्षों में जिंदा हो जाते हैं। ऐसे ही क्रांतिकारियों में हैं- शहीद-ए-आजम भगत सिंह और उन्हीं के साथ शहीद हुए उनके साथी सुखदेव और राजगुरू। बल्कि कहा जाए तो उस समय की क्रांतिकारी धारा के चन्द्रशेखर आजाद, गणेश शंकर विद्यार्थी सहित तमाम क्रांतिकारी अजर-अमर हैं। 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू को क्रूर ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने शहीद कर दिया। 27 फरवरी 1931 को चन्द्रशेखर आजाद अल्फ्रेड पार्क, इलाहाबाद में लड़ते हुए शहीद हो गये। वहीं 25 मार्च 1931 को गणेश शंकर विद्यार्थी कानपुर में साम्प्रदायिक दंगों को रोकते हुए दंगाइयों द्वारा शहीद कर दिये गये। ब्रिटिश साम्राज्यवादी और सांप्रदायिक संगठन-लोग क्रांतिकारियों से बराबर घृणा करते थे। यही बात आजाद भारत की सरकारों और फासीवादियों-कट्टरपंथियों पर भी लागू होती है। वहीं दूसरी तरफ मेहनतकश जनता क्रांतिकारियों को बार-बार याद करते हुए गौरवान्वित महसूस करती है।
21 September 2022
भगत सिंह ने दी आवाज, बदलो-बदलो देश-समाज!
19 June 2022
छात्र-युवा विरोधी 'अग्निपथ' योजना को तत्काल वापस लो!
25 January 2022
10 June 2021
कामरेड नगेंद्र को लाल सलाम! ✊✊✊
17 May 2021
प्रो. लाल बहादुर वर्मा को विनम्र श्रद्धांजलि
ये मौतें नहीं नरसंहार है!
23 February 2021
एक अविस्मणीय व्यक्तित्व
25 November 2020
26 नवंबर देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में ....
छात्र-मजदूर-किसान एकता जिन्दाबाद !









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