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28 September 2025

लद्दाख में जनता के आंदोलन का दमन बंद करो!


    बीते दिन उत्तराखंड से लेकर लद्दाख तक छात्र-युवाओं के संघर्ष के नाम रहे हैं। लद्दाख की जनता अपने जनवादी अधिकारों के लिए, युवाओं को सम्मानजनक रोजगार दिलाने के लिए संघर्ष कर रही है।

1 May 2025

नैनीताल में सांप्रदायिक तनाव बढ़ाने की कोशिशों पर रोक लगाओ।


   नैनीताल में एक नाबालिग बच्ची से बलात्कार की घटना हुई थी। घटना सामने आने के बाद पुलिस ने उस आरोपी उस्मान को गिरफ्तार कर लिया और उसे 1 मई को कोर्ट में पेश कर दिया गया। घटना में कानून ने अपना काम किया, लेकिन आरोपी का धर्म देखकर साम्प्रदायिक ताकतों को उत्पात मचाने का अवसर मिल गया।

21 March 2025

अमर शहीदों का अधूरा सपना मिलकर हमें है पूरा करना…


अमर शहीदों के 94वें शहादत दिवस पर छात्रों-नौजवानों को हमारा आह्वान।

साथियो,
          यह साल भारत की आजादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण घटनाक्रम काकोरी ट्रेन एक्शन का सौवां साल है। इस घटना ने लुटेरे अंग्रेजी साम्राज्य को सीधी चुनौती दी। देश की आजादी के लिए ही 27 फरवरी 1931 को चंद्रशेखर आज़ाद और 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु शहीद हो गए थे। आज उनकी शहादत को लगभग 100 साल पूरे होने को हैं, उन्हें याद करते हुए आज हमारे मन में कुछ सवाल उभरते हैं; कौन थे वे लोग जिन्होंने एक आदर्श के लिए अपने को कुर्बान कर दिया? कैसा देश बनाना चाहते थे वो और क्या उनके सपनों का भारत हम बना पाए हैं? आइए, इन सवालों पर विचार करें:

25 December 2024

भगतसिंह पर हमले का विरोध करें!


     कानपुर लिटरेचर फेस्टिवल में इतिहासकार अपर्णा वैदिक और कारवां नाम से इतिहास संबंधी विषयों पर एक प्लेटफार्म चलाने वाले ईशान शर्मा ने शहीद ए आज़म भगत सिंह को लेकर अपमानजनक शब्दों का चयन किया। दर्शकों ने इस पर कठोर आपत्ति जताई, जिसके बाद इन्होंने "शब्दों के गलत चयन" की गलती मानी और माफी मांगी। आयोजक अतुल तिवारी ने भी इसके लिए माफी मांगी। परिवर्तनकामी छात्र संगठन शहीद भगत सिंह व अन्य क्रांतिकारियों के अपमान की निंदा करता है, साथ ही ऐसी गलती का दोहराव न करने की अपील करता है।

27 November 2024

काकोरी ट्रेन एक्शन के सौ साल

"खूं से ही हम शहीदों के, फौज बना देंगे!”


   11 जून, 1897 को शाहजहांपुर में जन्मे रामप्रसाद को 19 दिसंबर, 1927 को गोरखपुर जेल में फांसी दी गई। आप उम्दा शायर भी थे। औपनिवेशिक शासन से आहत होकर 'बिस्मिल' उपनाम अपनाया। "हम अमन चाहते हैं जुल्म के खिलाफ/फैसला गर जंग से होगा तो जंग ही सही।"


   22 अक्टूबर, 1900 को शाहजहांपुर में जन्मे अशफाक उल्ला खान को 19 दिसंबर, 1927 को फैजाबाद जेल में फांसी दी गई। रामप्रसाद से मित्रता-प्रेमभाव ऐसा कि अशफाक-बिस्मिल का नाम एक साथ ही लिया जाता है। "दिलवाओ हमें फांसी ऐलान से कहते हैं/खूं से ही हम शहीदों के फौज बना देंगे।"

16 March 2024

आइये! शहीदों की क्रांतिकारी विरासत को आगे बढ़ायें।

शहीद भगतसिंह

     23 मार्च, शहीदे आजम भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू का शहादत दिवस है। भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू करोड़ों-करोड़ भारतीय मेहनतकश जनता के क्रांतिकारी नायकों के रूप में शहीद हुए। यही वजह है कि आज इन क्रांतिकारियों को सम्मान के साथ याद किया जाता है। 23-24 साल के यह शहीद युवा क्रांतिकारी सबसे ज्यादा नौजवानों में लोकप्रिय हैं। वह अपने दौर में लुटेरे ब्रिटिश साम्राज्यवादी शासकों से क्यों लड़े? आज इन शहीदों की शहादत दिवस हम ऐसे समय में मना रहे हैं। जब लोकसभा चुनाव होने जा रहे हैं। जिसमें पूंजीवादी राजनीतिक पार्टियां सत्ता पाने के लिए हर तरह से जोड़-तोड़ में लगी हुई हैं। एक तरफ सभी चुनावी राजनीतिक पार्टियां बड़े-बड़े चुनावी दावे कर रही हैं। पिछले दावों का हिसाब नहीं दिया जा रहा है। चुनावी जुमले जनता के सामने बोले जा रहे हैं। तो वहीं दूसरी तरफ चुनाव जीतने के लिए संघ-भाजपा साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण तेज कर रही है। तो दूसरी चुनावबाज पार्टियां नरम हिंदुत्व का सहारा ले रही हैं। ऐसे समय में इन शहीदों की राह कैसे आगे बढ़ें यह हमें तय करना है।

12 December 2023

आओ! काकोरी शहीदों, क्रांतिकारियों की विरासत को आगे बढ़ाएं!

राम प्रसाद बिस्मिल                                           अशफाक उल्ला खान

अशफाक़-बिस्मिल का संदेश..., हिन्दू-मुस्लिम सबका देश।

साथियो,
          काकोरी कांड के शहीदों की शहादत की यह 96 वीं वर्षगांठ हैं। काकोरी कांड के शहीदों में राजेंद्र नाथ लाहिड़ी को 17 दिसंबर और राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान व रोशन सिंह को 19 दिसंबर 1927 को जालिम ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने फांसी के फंदे पर चढ़ा दिया था। आजादी के मतवाले यह नौजवान हमारे प्यारे देश भारत को ब्रिटिश साम्राज्यवादियों से आजाद कराना चाहते थे। इसी काम के लिए काकोरी के यह शहीद ब्रिटिश शासकों द्वारा भारतीय जनता के ऊपर लादे गये टैक्स से जमा सरकारी खजाने को लूटने निकले थे। यह शहीद भारत में शोषण-उत्पीड़न-भेदभाव-अन्याय-अत्याचार को खत्म कर बराबरी पर आधारित समाज बनाना चाहते थे। यही बात क्रूर ब्रिटिश शासकों को नागवार गुजरी थी। भगत सिंह और आगे इसी क्रांतिकारी धारा से निकले असंख्य क्रांतिकारियों को भी ब्रिटिश शासकों ने फाँसी पर चढ़ाया। क्या इन शहीदों के सपनों का भारत बन पाया?

19 May 2023

नगीना कालोनी को रेलवे, शासन-प्रशासन द्वारा उजाड़े जाने का विरोध करो!



नगीना कालोनीवासियों के साथ में खड़े हों!

       रेलवे प्रशासन और स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने मिलकर 18 मई को लालकुआं (नैनीताल) उत्तराखंड की नगीना कालौनी को जमींदोज कर दिया। जहां रेलवे प्रशासन ने पूर्व में घोषित 200 मीटर से भी आगे बढ़कर 300 मीटर के आस-पास तक तोड़ दिया। इसमें लगभग 150 झोपड़ियां और कच्चे-पक्के मकान तोड़ दिए गए। घरों को तोड़ने की यह प्रक्रिया आज 19 मई को भी जारी रही। सैकड़ों घर आज भी जमींदोज किये गए।

11 May 2023

ब्रज भूषण शरण सिंह को गिरफ्तार करो!


भाजपा सरकार यौन शोषण के आरोपी को बचाना बंद करो!

       'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ ' का नारा देने वालों से आज देश की बेटियां न्याय की गुहार लगा रही हैं। लेकिन इस पर प्रधानमंत्री और अन्य तमाम नेताओं की चुप्पी यही साबित कर रही है कि इस देश में अब न्याय गुहार लगा के नहीं बल्कि लड़ के ही लिए जा सकता है।

22 March 2023

‘‘हवा में रहेगी मेरे ख्याल की बिजली’’


23 मार्च भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरु की शहादत अमर रहे।

              क्रांतिकारी कभी मरते नहीं हैं। वे बार-बार पीड़ित मेहनतकश जनता के दिलों में, संघर्षों में जिंदा हो जाते हैं। ऐसे ही क्रांतिकारियों में हैं- शहीद-ए-आजम भगत सिंह और उन्हीं के साथ शहीद हुए उनके साथी सुखदेव और राजगुरू। बल्कि कहा जाए तो उस समय की क्रांतिकारी धारा के चन्द्रशेखर आजाद, गणेश शंकर विद्यार्थी सहित तमाम क्रांतिकारी अजर-अमर हैं। 23 मार्च 1931 को भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू को क्रूर ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने शहीद कर दिया। 27 फरवरी 1931 को चन्द्रशेखर आजाद अल्फ्रेड पार्क, इलाहाबाद में लड़ते हुए शहीद हो गये। वहीं 25 मार्च 1931 को गणेश शंकर विद्यार्थी कानपुर में साम्प्रदायिक दंगों को रोकते हुए दंगाइयों द्वारा शहीद कर दिये गये। ब्रिटिश साम्राज्यवादी और सांप्रदायिक संगठन-लोग क्रांतिकारियों से बराबर घृणा करते थे। यही बात आजाद भारत की सरकारों और फासीवादियों-कट्टरपंथियों पर भी लागू होती है। वहीं दूसरी तरफ मेहनतकश जनता क्रांतिकारियों को बार-बार याद करते हुए गौरवान्वित महसूस करती है।

21 September 2022

भगत सिंह ने दी आवाज, बदलो-बदलो देश-समाज!


28 सितंबर भगत सिंह के जन्म दिवस पर!

          भगत सिंह ने 23 मार्च 1931 को अपनी शहादत से पहले कहा था ‘‘समाज का प्रमुख अंग होते हुए भी आज मजदूरों को उनके प्राथमिक अधिकार से वंचित रखा जा रहा है। और उनकी गाढ़ी कमाई का सारा धन शोषक पूंजीपति हड़प जाते हैं। दूसरों के अन्नदाता किसान अपने परिवार सहित दाने-दाने के लिए मुहताज हैं। दुनिया भर के बाजारों को कपड़ा मुहैया कराने वाला बुनकर अपना तथा अपने बच्चों के तन ढकने भर को कपड़ा नहीं पा रहा है। सुन्दर महलों का निर्माण करने वाले राजगीर, लोहार तथा बढ़ई स्वयं गन्दे बाड़ों में रहकर ही अपनी जीवन लीला समाप्त कर जाते हैं। इसके विपरीत समाज के जोंक शोषक पूंजीपति जरा-जरा सी बातों के लिए लाखों का वारा-न्यारा कर देते हैं।’’ (‘बम काण्ड पर सेशन कोर्ट में भगत सिंह और दत्त का बयान’ से)

19 June 2022

छात्र-युवा विरोधी 'अग्निपथ' योजना को तत्काल वापस लो!

मोदी सरकार होश में आओ, नौजवानों से मत टकराओ।
अग्निपथ-अग्निवीर के नाम पर बेरोजगारों को ठगना बंद करो।
सेना में 4 साल के लिए ठेके पर भर्ती की योजना वापस लो।
सेना में रिक्त एक लाख पदों पर तत्काल स्थाई नियुक्तियां करो।
प्रदर्शनकारी नौजवानों पर लाठीचार्ज करना बन्द करो। और दर्ज मुकदमे वापस लो।
देशभर में खाली पड़े 60 लाख पदों पर भर्ती निकालकर पदों पर स्थाई नियुक्ति दो।
सरकारी संस्थानों को बेचना बंद करो। ठेकेदारी प्रथा खत्म कर सबको स्थाई रोजगार दो।

दोस्तो,
          केन्द्र की मोदी सरकार ने हम बेरोजगार नौजवानों पर एक बार फिर से हमला बोला है। इस बार ये हमला 'अग्निपथ' योजना के नाम पर बोला गया है। इस योजना के तहत भारतीय सेना में हर साल 40 से 50 हजार पदों पर भर्ती निकाल कर युवाओं को सिर्फ 4 साल के लिए सेना में भरती किया जायेगा। 4 साल बाद इनमें से 25% को रिटेन किया जायेगा बाकी 75% को अपने-अपने 'अग्निपथों' पर भटकने के लिए छोड़ दिया जायेगा।

25 January 2022

सत्ता परिवर्तन नहीं, व्यवस्था परिवर्तन हेतु संघर्ष के लिये आगे आयें!

भगत सिंह ने यह बात अंग्रेजों की संसद के बारे में कही थी लेकिन यह आज भी 100 फीसदी सच है।भगत सिंह ने कहा था-
**....... बहुत कुछ सोचने के बाद भी एक ऐसी संस्था के अस्तित्व का औचित्य हमारी समझ में नहीं आ सका जो, बावजूद उस तमाम शानो-शौकत के, जिसका आधार भारत के करोड़ों मेहनतकशों की गाढ़ी कमाई है, केवल मात्र दिल को बहलाने वाली, थोथी, दिखावटी और शरारतों से भरी हुई एक संस्था है। हम सार्वजनिक नेताओं की मनोवृत्ति को समझ पाने में भी असमर्थ हैं। हमारी समझ में नहीं आता कि हमारे नेतागण भारत की असहाय परतंत्रता की खिल्ली उड़ाने वाले इतने स्पष्ट एवं पूर्वनियोजित प्रदर्शनों पर सार्वजनिक सम्पत्ति एवं समय बर्बाद करने में सहायक क्यों बनते हैं।**

10 June 2021

कामरेड नगेंद्र को लाल सलाम! ✊✊✊

       बेहद दुःखद सूचना है कि इंकलाबी मज़दूर केंद्र (इमके) के उपाध्यक्ष कामरेड नगेंद्र का 47 वर्ष की अल्पायु में निधन हो गया है। आज दिनांक 10 जून को रात करीब 8 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। साथी पिछले 2 साल से अधिक समय से कैंसर से जूझ रहे थे।

साथी नगेन्द्र लम्बे समय तक परिवर्तनकामी छात्र संगठन से जुड़े रहे। साथी पछास के उपाध्यक्ष भी रहे। साथी ने लंबे समय तक 'परचम' पत्रिका के संपादन की जिम्मेदारी उठाई। मौजूदा समय में साथी 'नागरिक' समाचार पत्र के संपादन की जिम्मेदारी उठा रहे थे।

17 May 2021

प्रो. लाल बहादुर वर्मा को विनम्र श्रद्धांजलि

     प्रसिद्ध इतिहासकार व वामपंथी बुद्धिजीवी प्रो. लाल बहादुर वर्मा जी का 17 मई को देहरादून में निधन हो गया। वह 5 मई को कोरोना से संक्रमित पाये गये थे। लम्बे इलाज के दौरान ह्रदय गति रुकने से उनकी मृत्यु हो गयी।
  

ये मौतें नहीं नरसंहार है!

     इस समय हमारा देश और हम एक ऐसा दर्द सह रहे हैं जिससे बचा जा सकता था। इस समय हमारा देश एक ऐसा देश बना दिया गया है जहां अपने प्रिय परिजनों को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए रोते-गिड़गिड़ाते लोगों और ऑक्सीजन न मिल पाने के कारण तड़प-तड़प कर मर जाने वाले लोगों का मंजर, आम मंजर बन गया है। इस वक्त हमारा देश ऐसा देश बना दिया गया है जहां पर लोग अपने प्रियजनों की लाशों को अपने ही कंधों पर ढोने को मजबूर कर दिये गये हैं। हमने ऐसा पहले कभी नहीं देखा कि मृृतकों के लिए शमशान, लकड़ी और कब्रें भी कम पड़ गयी हों और सैकड़ों की संख्या में लाशें नदी में तैर रही हैं। इन तैरती लाशों को कुत्ते नोंच रहे हैं। कई परिवार तो ऐसे हैं जहां एक की मौत का मातम भी पूरा नहीं हुआ था कि दूसरी, तीसरी,.... मौतें हो गयीं। लोग अपने एक प्रिय की मौत पर सही से रो भी नहीं पाए थे कि अन्य प्रियजनों को बीमारी ने आ घेरा। कई परिवार तो ऐसे हो गये हैं जहां सिर्फ दुधमुहें बच्चे ही बचे हैं, जिनके सिर पर अब किसी का भी आसरा नहीं बचा।

23 February 2021

एक अविस्मणीय व्यक्तित्व



क्रांतिकारी अजीत सिंह

इस समय जब तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पूरे देश में आंदोलन फैलता जा रहा है। सम्पूर्ण देश में एकाधिकारी पूंजीपति वर्ग के हितों के लिए लाए गए कृषि कानूनों का विरोध जारी है तब बरबस ही सरदार अजीत सिंह का जिक्र भी सामने आ जाता है। सरदार अजीत सिंह शहीद-ए-आजम भगत सिंह के चाचा थे। सन् 1906 में ब्रिटिश उपनिवेशवादी शासन द्वारा लाए गए किसान विरोधी तीन काले कानूनों के खिलाफ उन्होंने सन् 1907 में किसानों के आन्दोलन की अगुवाई की थी। ये काले कानून थे- दोआब बारी एक्ट, पंजाब लैंड काॅलोनाइजेशन एक्ट और पंजाब लैंड एलियनेशन एक्ट।

25 November 2020

26 नवंबर देशव्यापी हड़ताल के समर्थन में ....

छात्र-मजदूर-किसान एकता जिन्दाबाद !

 


26 नवंबर को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों व विभिन्न मजदूर संगठनों द्वारा देशव्यापी आम हड़ताल करना तय किया गया है। इस हड़ताल के साथ ही किसान संगठनों ने भी देशभर में विरोध प्रदर्शन करने का फैसला किया है। परिवर्तनकामी छात्र संगठन मजदूरों की आम हड़ताल व किसानों के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करता है। साथ ही, छात्रों का आह्वान करता है कि देश के मजदूरों-किसानों के संघर्ष से जोड़ते हुए छात्रों व शिक्षा पर हो रहे हमलों के विरोध में एकजुट आवाज उठाएं।

14 September 2020

मैं अपनी जिंदगी से परेशान हो गया हूँ ...


ये 32 वर्षीय राजीव सुसाइड नोट के अंतिम शब्द हैं। जिसने इलाहाबाद में बेरोजगारी के चक्र में फँसकर आत्महत्या का रास्ता चुना। राजीव ने पीसीएस इंटरव्यू में असफल होने के बाद ये कदम उठाया। इसके जैसे हज़ारों बेबस मज़दूर, किसान, छात्र तथा नौजवान रोज ऐसे ही मौत को गले लगा ले रहे हैं।

योगी सरकार का नया फैसला देश के युवाओं के साथ धोखा है!


भारत आज बेरोजगारी के चरम दौर से गुजर रहा है। देश का युवा रोजगार को तरस रहा है। वो हताश, निराश, बेबस है। रोज हताश बेरोजगारों की आत्महत्याओं की खबरें आ रही हों। ऐसे में उन्हें रोजगार देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के बजाए यूपी की योगी सरकार एक युवा विरोधी फैसला लागू करने जा रही है। प्रदेश की सरकार एक नया बिल कैबिनेट के समक्ष पेश करने जा रही है। इस बिल के अनुसार समूह ख और ग के तहत भर्ती होने वाले सरकारी कर्मचारियों को 5 साल के लिए संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) के तौर पर रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं से भी वंचित रखा जायेगा।