छात्र-मजदूर-किसान एकता जिन्दाबाद !
साथियों यह बात सभी जानते हैं की फैक्ट्रियों में काम के घंटे, वेतन, सुरक्षा, यूनियन, आदि के हालात बहुत खराब हैं। यहां मजदूर भयंकर शोषण करवाने और तिल-तिल कर जीने को मजबूर हैं। ऐसे दर्दनाक हालात रिस-रिस कर सामने आते रहते हैं। ऐसे में केंद्र की हिंदू फासीवादी मोदी सरकार ने कारपोरेट पूंजीपतियों की सेवा में श्रम कानूनों को और अधिक मजदूर विरोधी बना दिया है। सरकार ने बेशर्मी की हद पार करते हुए इन फैसलों को "श्रम सुधार" का नाम दिया है। 44 श्रम कानूनों को चार कोड बिलों में बदलकर मजदूरों को नाम मात्र के लिए हासिल कानूनी सुरक्षा भी बंद कर दी है। साथ ही, अभी तक सुरक्षित मानी जाती रही ओएनजीसी, बीएचईएल, रेलवे जैसी सरकारी कम्पनियों को भी निजी हाथों में सौंपने के कदम उठाए जा रहे हैं। अब इन क्षेत्रों के मजदूर भी शोषण की बढ़ती मार झेल रहे हैं। मजदूरों के खून-पसीने और लाश पर पूंजीपतियों के इस खूनी "विकास" का मजदूर विरोध कर रहे हैं। समाज में हर चीज का उत्पादन कर रही मेहनतकश आबादी पर सरकार के इस हमले के विरोध में मजदूर आवाज उठा रहे हैं। हम मजदूरों पर इस हमले के खिलाफ मजदूरों के संघर्ष में हर संभव तौर पर सहयोग के लिए तत्पर हैं।
साथियों, यह तथाकथित लोकतंत्र बड़े पूंजीपतियों की सेवा में खड़ा सभी मेहनतकशों पर हमलावर है। छात्र भी इससे अछूते नहीं हैं। शिक्षा क्षेत्र में लगातार बढ़ता निजीकरण जारी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में तो शिक्षा देने की सरकार की जिम्मेदारी से हाथ लगभग पूरी तरह पीछे खींचने का रोडमैप बना दिया गया है। इसी तरह अपने हिंदू फासीवादी चरित्र के अनुरूप शिक्षा के भगवाकरण के एजेंडे को भी राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 में सरकार ने आगे बढ़ाया है। लिंगदोह कमेटी के जरिए छात्र संघ की हालत पहले ही कमजोर कर दी गई है। अब तो छात्रों की एकता और संघर्ष को गुंडावाहिनियों से लेकर पुलिस या राजकीय दमन के सहारे कुचला जा रहा है। किसी तरह कठिनाई से हासिल शिक्षा के बावजूद बेरोजगारी ही अधिकांश छात्रों-नौजवानों के जीवन की सच्चाई बन गई है। आज देशभर में सभी छात्रों-नौजवानों को न सिर्फ शिक्षा पर हो रहे हमलों के खिलाफ लड़ने की जरूरत है बल्कि इससे भी आगे बढ़कर मजदूरों-किसानों, अन्य उत्पीड़ित हिस्सों के संघर्षों से जुड़ने की जरूरत है।
यह हालात हमसे सामाजिक बदलाव की राह चुनने की मांग कर रहे हैं। यह हालात मौजूदा पूंजीवादी लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वहीन होने का प्रमाण हैं। यहां से आगे फासीवाद का खतरा है या क्रांति की रोशन राह का विकल्प है। आइए! हम क्रांति की रोशन राह के लिए, बेहतर भविष्य के लिए, वह सब कुछ करें जिसकी वक्त आज हमसे मांग कर रहा है।
26 नवंबर की आम हड़ताल में मजदूरों किसानों के साथ छात्रों की एकजुटता प्रदर्शित करें। शिक्षा पर हो रहे कारपोरेट और फासीवादी हमलों का विरोध करें।



No comments:
Post a Comment