भारत आज बेरोजगारी के चरम दौर से गुजर रहा है। देश का युवा रोजगार को तरस रहा है। वो हताश, निराश, बेबस है। रोज हताश बेरोजगारों की आत्महत्याओं की खबरें आ रही हों। ऐसे में उन्हें रोजगार देने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के बजाए यूपी की योगी सरकार एक युवा विरोधी फैसला लागू करने जा रही है। प्रदेश की सरकार एक नया बिल कैबिनेट के समक्ष पेश करने जा रही है। इस बिल के अनुसार समूह ख और ग के तहत भर्ती होने वाले सरकारी कर्मचारियों को 5 साल के लिए संविदा (कॉन्ट्रैक्ट) के तौर पर रखा जाएगा। इस दौरान उन्हें सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाली सुविधाओं से भी वंचित रखा जायेगा।
आज सरकार द्वारा सरकारी नौकरियां लगभग खत्म कर दी गई हैं। जो नाममात्र की बची भी हैं, उनमें भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में ही 5-6 साल लग जाते हैं। इतना सब करने के बाद भी अगर कोई युवा भर्ती हो पाता है, तो सरकार बोल रही है कि आपको 5 साल तक संविदा पर रखा जायेगा। 5 साल तक संविदा पर रखने के दौरान हर 6 महीने में कर्मचारियों की परीक्षा होगी। यानी साल में 2 बार और 5 साल मे 10 बार। अगर कोई 5 साल तक इन परीक्षाओं में 60% से ऊपर अंक लाता रहता है तो उस 'भाग्यशाली' नौजवान को ही पक्की नौकरी मिलेगी। बाकी सबको 5 साल के दौरान बिना किसी सुविधा के संविदा पर काम कराने के बाद सरकार लात मारकर बाहर कर देगी।
अभी की व्यवस्था में अलग-अलग भर्तियों में चयनित हुए युवाओं का 1 या 2 वर्ष का प्रोबेशन पीरियड (परीविक्षा अवधि) उनके काम-काज को सीखने व समझने का होता है। इस दौरान प्रोबेशन वाले कर्मचारियों को सरकारी कर्मचारियों की तरह ही सभी सुविधायें मिलती हैं। लेकिन नए बिल के अनुसार अब मौलिक नियुक्ति से पहले 5 साल तक संविदा पर नियुक्ति होगी। इस दौरान उन्हें सरकारी सुविधायें भी नहीं मिलेगी। अगर कोई युवा नौकरी पर लगता है और वो 5 साल तक काम करने व परीक्षा देने के बाद 60% नहीं ला पाता है तो उसकी सालों की हुई मेहनत ख़राब मान ली जाएगी और वो सड़क पर फेंक दिया जायेगा।
योगी सरकार का यह फैसला निजीकरण-उदारीकरण-वैश्वीकरण की घोर जन विरोधी नीतियों को तेजी से आगे बढ़ाने का कदम है। इन नीतियों के तहत सरकारी खर्चों व जनकल्याणकारी योजनाओं के बजट में कटौती व पूंजीपतियों को तमाम तरह की रियायतें व आर्थिक पैकेज दिए जा रहे हैं। योगी सरकार का यह कदम गिनी-चुनी सरकारी नौकरियों को भी ख़त्म कर संविदा-ठेका प्रथा को तेजी से लागू करने का प्रयास है। साथ ही पक्की सरकारी नौकरी से पहले संविदा के नाम पर योगी सरकार तानाशाही पूर्ण तरीके से युवाओं की आवाज़ को भी कुचल देना चाहती है। जो युवा अपने शोषण-उत्पीड़न व सरकार की जन विरोधी नीतियों का विरोध करेंगे उन्हें सेवा शर्तों के उल्लंघन का बहाना कर बाहर का रास्ता दिखा दिया जायेगा। सरकार गिने-चुने उन्हीं लोगों को पक्का करेगी जो उसकी जी-हज़ूरी करेंगे।
योगी सरकार इस फैसले को कर्मचारियों में नैतिकता और देशभक्ति बढ़ाने वाला कदम बता रही है। पर इस फैसले से कैसे ये काम होगा इसे खुद योगी महाराज भी नहीं बता सकते। क्या लाखों युवाओं की जिन्दगी से खेलकर, उनकी ज़िन्दगी को नरक व भविष्य को अंधकारमय बनाना देशभक्ति है? क्या लाखों युवाओं के भविष्य को अनिश्चित कर देना नैतिकता है?
योगी आदित्यनाथ ने कुछ समय पहले कहा था कि भारत को समाजवाद की नहीं बल्कि राम राज्य की जरुरत है। मोदी-योगी का राम राज्य दरअसल मजदूर-मेहनतकश-युवा विरोधी है। जब सरकार ही थोड़ी सी स्थायी नौकरियों से भी पल्ला झाड़ कर संविदा-ठेका की नौकरियों को बढ़ावा देगी तो फिर निजी पूंजीपति इस सब में कहाँ पीछे रहेंगे। मोदी-योगी के इस राम राज्य में युवाओं व मज़दूर-मेहनतकशों के हिस्से इस तरह के जनविरोधी फैसले ही आयेंगे और पूंजीपतियों-धन्नासेठों को हर तरह की लूट की छूट होगी। इस राम राज्य में गरीब लूट-पिट कर और गरीब होता जायेगा तथा अमीर लूट-खसोट कर और अमीर होता जायेगा। हाँ! गरीब अपनी लूट-शोषण के खिलाफ कुछ बोल न सके, संगठित हो आवाज़ न उठा सकें, इसके लिए निगरानी व दमन-तंत्र को और मज़बूत किया जायेगा। विरोध की हर आवाज़ को कुचलने का इंतजाम किया जायेगा।
योगी सरकार के इस फैसले का पुरजोर विरोध होना चाहिए क्योंकि इसके लागू होने के बाद हर राज्य इसे अपने यहां उदाहरण के बतौर लागू करेगा। इसका विरोध इसलिए भी होना चाहिए कि सबको बेहतर रोजगार देना सरकारों को जिम्मेदारी है और वो पल-पल इससे पीछे हट रही हैं। अब तक की हमारी चुप्पी ने ही इन सरकारों को इतनी ताकत दी है कि वो खुलेआम ऐसे 'शर्मनाक' फैसले कर रही हैं। ये चुप्पी तोड़ सड़कों पर चिल्लाने का समय है। ये सबके लिए सुरक्षित और बेहतर रोजगार मांगने का समय है। ये इस जैसे हर छात्र-युवा-मेहनतकश विरोधी फैसलों को पलटने का समय है। समय हम सबसे इस संघर्ष में उतरने की मांग कर रहा है।
आइए आवाज उठाएं-
सरकारी नौकरी में 5 साल तक संविदा पर रखने वाला युवा विरोधी बिल रद्द करो।
सभी रिक्त पदों पर तत्काल नियुक्तियां करो। रुकी हुई भर्ती प्रक्रियाओं को अविलंब पूरा करो।
प्रत्येक काम करने योग्य व्यक्ति को उसकी योग्यतानुसार रोजगार दो, रोजगार न दिए जाने पर प्रत्येक बेरोजगार को ₹ 10,000 प्रतिमाह बेरोजगारी भत्ता दो।
निजीकरण-विनिवेशीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाओ।
ठेकेदारी प्रथा खत्म कर सभी को स्थायी रोजगार दो।
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ-
परिवर्तनकामी छात्र संगठन ( पछास )


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