अशफाक़-बिस्मिल का संदेश..., हिन्दू-मुस्लिम सबका देश।
साथियो,
काकोरी कांड के शहीदों की शहादत की यह 96 वीं वर्षगांठ हैं। काकोरी कांड के शहीदों में राजेंद्र नाथ लाहिड़ी को 17 दिसंबर और राम प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खान व रोशन सिंह को 19 दिसंबर 1927 को जालिम ब्रिटिश साम्राज्यवादियों ने फांसी के फंदे पर चढ़ा दिया था। आजादी के मतवाले यह नौजवान हमारे प्यारे देश भारत को ब्रिटिश साम्राज्यवादियों से आजाद कराना चाहते थे। इसी काम के लिए काकोरी के यह शहीद ब्रिटिश शासकों द्वारा भारतीय जनता के ऊपर लादे गये टैक्स से जमा सरकारी खजाने को लूटने निकले थे। यह शहीद भारत में शोषण-उत्पीड़न-भेदभाव-अन्याय-अत्याचार को खत्म कर बराबरी पर आधारित समाज बनाना चाहते थे। यही बात क्रूर ब्रिटिश शासकों को नागवार गुजरी थी। भगत सिंह और आगे इसी क्रांतिकारी धारा से निकले असंख्य क्रांतिकारियों को भी ब्रिटिश शासकों ने फाँसी पर चढ़ाया। क्या इन शहीदों के सपनों का भारत बन पाया?
गुलाम भारत में ब्रिटिश साम्राज्यवादियों के शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ भारतीय जनता एकजुट होने लगी। 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में हिंदू-मुस्लिम एकता से ब्रिटिश शासकों को अपना शासन खतरे में लग रहा था। वह भारतीय जनता को ‘बांटो और राज करो’ कि नीति के तहत बांटने के लिए धर्म-जाति के सांप्रदायिक तनाव को आगे बढ़ा रही थी। मेहनतकश जनता की एकता को तोड़ने के लिए हिंदू मुस्लिम के बीच जहर का बीज बोया गया। इस जहर ने सांप्रदायिक दंगों के रूप में कई लोगों की जान ली और आजादी के आंदोलन को कमजोर किया।
आज के भारत में अंग्रेज शासकों की नीतियों पर मोदी सरकार भी चल रही है। हर साल 2 करोड़ नौकरियां देने की बात करने वालों के राज में बेरोजगारी चरम पर है। महंगाई पर मनमोहन सरकार की मजाक बनाने वालों ने महंगाई को आसमान पर पहुंचा दिया। जहां गरीब आदमी के जीवन और स्वास्थ का स्तर पहले से और भी नीचे गिर चुका है। खुद को ‘‘चैकीदार’’ घोषित करने वाले ने कई सरकारी कंपनियों को पूंजीपतियों को सस्ते में बेच दिया। मोदी सरकार के शासन में जहां आम आदमी की हालत और खराब होती गई है वहीं अदानी, अंबानी जैसों की दौलत बढ़ती गई है। वे दुनिया के सबसे बड़े अमीरों में गिने जाने लगे हैं। समाज में बढ़ती इस असमानता से कहीं विद्रोह न पैदा हो इसीलिए संघ, भाजपा, इसके छोटे बड़े नेता, और काॅरपोरेट मीडिया दिन-रात सांप्रदायिक और फासीवादी प्रचार में लगा है। ये फासीवादी ताकतें मुस्लिमों, इसाइयों, दलितों पर खुले आम हिंसा पर उतारूं हैं। अब तक कई लोग इनके हमले में मारे गए हैं।
संघ-भाजपा हमारे प्यारे देश को हिटलर की तरह फासीवादी देश बना देना चाहते हैं। इनका हिंदू राष्ट्र और कुछ नहीं बल्कि बचे-खुचे लोकतंत्र को खत्म कर तानाशाही कायम करना है। जहां पर छात्रों-नौजवानों, नागरिकों, शोषित-उत्पीड़ितों के राजनीतिक अधिकार खत्म कर दिए जाएं। पूंजीपतियों को लूटने की खुली छूट दे दी जाए।
बड़े पूंजीपतियों और संघ-भाजपा की समाज को बांटने की इस विषैली राजनीति का जवाब हमें अशफाक-बिस्मिल की मजबूत क्रांतिकारी एकता के जरिए देना होगा। एक पांच समय का नमाजी मुसलमान और दूसरे आर्य समाजी होने के बावजूद कभी एक-दूसरे के विरोधी नहीं रहे। एक बार अशफाक़-बिस्मिल शाहजहांपुर में साम्प्रदायिक दंगों को रोकने निकले। दोनों के मजबूत क्रांतिकारी इरादों को देखकर जनता इस तनाव से बाहर निकली और सद्भाव कायम हुआ। दोनों ब्रिटिश शासकों के जुल्म से लड़ते हुए एक ही दिन शहीद हो गए।
सत्ता में बने रहने की चाह में संघ-भाजपा समाज में हर तरह से सांप्रदायिक जहर को बोने में लगी है। दिन-रात हिंदू-मुसलमान के जहर को फैलाया जा रहा है। इसके विरोध में काॅलेज-कैंपसों, समाज से न्याय और अधिकार की उठने वाली आवाजों को दबाकर फासीवादी हमलों को बढ़ाया जा रहा है। कानूनों को पहले से ज्यादा सख्त कर हर तरह से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कुचला जा रहा है। यह एक तरह की अघोषित तानाशाही है।
आज इस कठिन समय में हमें अशफाक-बिस्मिल की ‘साझी शहादत, साझी विरासत’ को सामने रखना होगा। देश को आजाद करने के संघर्ष से लेकर शहादत तक हर जगह हिंदू और मुसलमानों का योगदान साझा रहा है। जनता ने कभी साम्प्रदायिक तौर पर बंटवारा नहीं किया। यह अंग्रजों, भारतीय शासकों, साम्प्रदायिक संगठनों के जनता को बांटने का षड्यंत्र है। ताकि लूट और शोषण जारी रहे।
काकोरी के शहीद हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन नामक संगठन के बैनर तले काम कर रहे थे। यह क्रांतिकारी धारा निरंतर आगे बढ़ती रही। इसी धारा से शहीदे-ए-आज़म भगत सिंह जैसे छात्र-नौजवान भी जुड़े। भगत सिंह ने साम्प्रदायिकता के बारे में लिखा ‘‘लोगों को परस्पर लड़ने से रोकने के लिए वर्ग चेतना की जरूरत है। गरीब मेहनतकशों व किसानों को स्पष्ट समझा देना चाहिए कि तुम्हारे असली दुश्मन पूजीपति हैं, इसलिए तुम्हें इन हथकण्डों से बचकर रहना चाहिए और इनके हत्थे चढ़ कुछ न करना चाहिए। संसार के सभी गरीबों के, चाहे वह किसी भी जाति, रंग, धर्म या राष्ट्र के हों, अधिकार एक ही हैं। तुम्हारी भलाई इसी में है कि तुम धर्म, रंग, नस्ल और राष्ट्रीयता व देश के भेदभाव मिटाकर एक जुट हो जाओ और सरकार की ताकत अपने हाथ में लेने का यत्न करो।’’
भगत सिंह ने अपने दौर में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन में अपनी वैचारिक कुशाग्रता के जरिये सोशलिस्ट (समाजवाद) शब्द जोड़कर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन कर समाजवाद के प्रति अपनी भावना और समाजवाद की जरुरत प्रकट की। भगत सिंह और उनके साथियों ने हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के घोषणा पत्र में कहा ‘‘भारत साम्राज्यवाद के जुए के नीचे पिस रहा है। इसमें करोड़ों लोग आज अज्ञानता और गरीबी के शिकार हो रहे हैं। भारत की बहुत बड़ी जनसंख्या जो मजदूरों और किसानों की है, उनको विदेशी दबाव एवं आर्थिक लूट ने स्पष्ट कर दिया है। भारत के मेहनतकश वर्ग की हालत आज बहुत गंभीर है। उसके सामने दोहरा खतरा है- विदेशी पूंजीवाद का एक तरफ से और भारतीय पूंजीवाद के धोखे भरे हमले का दूसरी तरफ से। भारतीय पूंजीवाद विदेशी पूंजी के साथ हर रोज बहुत से गठजोड़ कर रहा है।’’
यही आज भारत के अंदर हो रहा है। मोदी सरकार पूंजीपतियों के साथ गठजोड़ बढ़ा रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध और फिलिस्तीन पर इजरायल के हमले सभी मामलों में यह दिख रहा है कि भारत सरकार युद्ध में तबाह होती मानवता व उत्पीड़क को देखने की जगह देशी-विदेशी पूंजी के हितों के हिसाब से अपने फैसले ले रही है।
एक तरफ भूख, गरीबी के इंडेक्स में भारत का स्थान लगातार बढ़ता जा रहा है। 80 करोड़ लोग सरकारी राशन पर अपना जीवन जी रहे हैं। टैक्स का बोझ जनता के ऊपर लगातार बढ़ाया जा रहा है। साल 2022 में सरकार ने जीएसटी से 14.83 लाख करोड़ रुपये वसूल लिये। इसमें देश के नीचे के 50 प्रतिशत लोगों से 64 प्रतिशत हिस्सा वसूला व ऊपर के 10 प्रतिशत लोगों का मात्र 3 प्रतिशत हिस्सा था। दूसरी तरफ भारत में अरबपतियों की संख्या बढ़ रही है। गैरबराबरी की यह खायी लगातार चैड़ी होती जा रही है।
समाज को जाति-धर्म में बांटने और ऐसे मुश्किल दौर में आज हमारे सामने यही कार्यभार है कि हम अपना पक्ष चुनकर इन हालातों का डटकर मुकाबला करें। सरकारों-पूंजीवादी व्यवस्था के विरोध में जनता का पक्ष चुनें। काकोरी के शहीद अशफाक उल्ला खां ने फांसी पर चढ़ने से पहले फैजाबाद की जेल में से आह्वान करते हुए कहा था ‘‘मेरे भाइयो! मेरा सलाम लो और इस नामुकम्मल काम को जो हमसे रह गया तुम पूरा करना।’’ यही शहीदों की राह आज हम छात्रों-नौजवानों को पुकार रही है। आओ! शहीदों की राह पर आगे बढ़ें। काकोरी के शहीद व शहीद-ए-आज़म भगत सिंह के क्रांतिकारी रास्ते पर बढ़कर इन शहीदों के अधूरे मकसद समाजवाद के सपने को पूरा करें। जहाँ पर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार आदि मूलभूत जरूरतें समाजवादी सरकार की गारंटी होगी। जाति-धर्म के झगड़ों का हल किया जायेगा। यही आज समय की जरूरत भी है। परिवर्तनकामी छात्र संगठन सभी छात्रों-नौजवानों, नागरिकों से आह्वान करता है कि इन शहीदों की राह पर बढ़कर समाज बदलने को आगे आयें।
इंकलाब जिंदाबाद! छात्र एकता जिंदाबाद!!
क्रांतिकारी अभिनंदन के साथ
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)






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