2 November 2023

आईआईटी BHU में छात्रा के साथ यौन उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठायें!


       वाराणसी में IIT BHU के हजारों छात्र कक्षाएं छोड़कर धरना दे रहे हैं। वजह है, बीती 1 नवंबर (बुधवार) की देर रात बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) कैंपस में एक छात्रा का यौन उत्पीड़न। छात्रा IIT BHU में सेकेंड ईयर में अध्ययनरत है, परिसर में ही यौन उत्पीड़न हुआ। मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार मामले में दर्ज शिकायत के मुताबिक कुछ युवकों ने छात्रा के साथ मारपीट की, जबरन उसके कपड़े उतरवाए और तस्वीरें खींचीं। इस मामले में IPC की 354, 506 धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। इतनी गंभीर घटना होने के बावजूद अभी तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी व छात्रा की मेडिकल जांच नहीं की गई है। आईआईटी के निदेशक आंदोलित छात्रों से बात करने को तैयार नहीं हैं।


       पीड़ित छात्रा ने बताया "मैं अपने हॉस्टल न्यू गर्ल्स IIT BHU से निकली थी। जैसे ही गांधी स्मृति छात्रावास चौराहे के पास पहुंची, वहीं पर मेरा दोस्त मुझे मिला। हम दोनों साथ में जा रहे थे कि रास्ते में कर्मन बाबा मन्दिर से करीब 300-400 मीटर के बीच एक बाइक आई, जिस पर तीन लोग बैठे थे। वे लोग अपनी बाइक वहीं खड़ी करके मुझे और मेरे दोस्त को अलग कर दिए। मेरा मुंह पूरी तरह से दबा लिए। फिर एक कोने में लेकर गए। पहले मुझे किस किया। उसके बाद मेरे सारे कपड़े निकालकर विडियो और फोटो बनाया। जब मैं बचाव के लिए चिल्लाई तो मुझे मारने की धमकी दी। मेरा फोन नंबर भी लिया और कुछ देर तक मुझे बंधक बनाए रखा। उसके बाद छोड़ दिया।"


       जिस जगह यह घटना हुई है वहां से बमुश्किल 50 मीटर की दूरी पर प्रॉक्टोरियल बोर्ड का एक बूथ भी है, जहां सुरक्षा गार्ड मौजूद रहते हैं। बीएचयू कैंपस में हाल के दिनों में छेड़छाड़ की घटनाएं बढ़ गई हैं। चिंता की बात यह है कि दबंग युवकों ने छात्रा के साथ न सिर्फ छेड़छाड़ की बल्कि आपत्तिजनक स्थिति में उसका वीडियो भी बनाया। उन्होंने छात्रा के मोबाइल का नंबर भी अपने फोन में सेव किया है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है।


       संज्ञान में रहे 2017 में बीएचयू में छात्राओं से यौन उत्पीड़न के विरोध में एक लंबा आंदोलन चलाया गया था। जिसके आरोपियों को पुलिस अभी तक पकड़ नहीं पाई है। जब भी छात्राओं के साथ यौन उत्पीड़न की घटनाएं घटती हैं तब उन पर ही ज्यादा पाबंदियां लगा दी जाती हैं। जो कि सरासर गलत है। यह दिखाता है कि पुलिस और प्रशासन महिला हिंसा रोकने में कितनी मुस्तैद है।

       इसी साल पिछले महीने बीएचयू स्थित आईआईटी की दो शोध छात्राओं के साथ उनके हॉस्टल के पास ही चार युवकों ने छेड़खानी और बदसलूकी की थी।आईआईटी की एक शोध छात्रा देर रात अपनी एक सहपाठी के साथ हॉस्टल के समीप मौजूद थी। इसी दौरान चारपहिया वाहन सवार चार मनचले दुर्व्यवहार करने लगे। सभी शराब के नशे में धुत थे। आंदोलनकारी छात्र-छात्राओं का कहना था कि बीएचयू में साल 2017 में हुई छेड़खानी के बाद अबकी बार हुई वारदात बेहद वीभत्स है। बीएचयू कैंपस में आए दिन घटनाएं होती हैं, लेकिन यहां सुरक्षा का कोई पुख्ता इंतज़ाम नहीं है।


       याद रहे कि BHU उत्तर प्रदेश में ही स्थित है। जहाँ के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दावा करते हैं कि अपराधी या तो जेलों में बंद हैं या राज्य छोड़कर चले गए हैं। 2022 में यू पी चुनाव के समय गृहमंत्री अमित शाह कह रहे थे कि उत्तर प्रदेश महिलाओं के लिए इतना सुरक्षित हो गया है कि वह रात में 12 बजे भी गहने पहन कर अकेले बाहर जा सकती हैं। इसी उत्तर प्रदेश की हक़ीक़त यह है कि छात्रायें कैम्पस के भीतर भी सुरक्षित नहीं हैं। शायद ही कोई दिन हो जब छात्राओं- महिलाओं से छेड़छाड़- बलात्कार की घटनायें टीबी- अख़बार में खबर न बनती हों। खुद भाजपा के दर्जनों सांसद- विधायक महिलाओं से छेड़छाड़- बलात्कार के आरोपी हैं। कुलदीप सिंह सेंगर, चिन्मयानन्द, बृज भूषण शरण सिंह आदि तो कुछ उदाहरण मात्र हैं। ऐसे में सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनके राज में छात्रायें- महिलाएं कितनी सुरक्षित हो सकती हैं?

       पछास BHU में छात्रा के साथ हुई यौन हिंसा का पुरजोर विरोध करता है। और मांग करता है कि छात्राओं के लिए सुरक्षित माहौल सुनिश्चित किया जाय। साथ ही देशभर के छात्र-छात्राओं, समाज, न्यायप्रिय लोगों से भी छात्राओं-महिलाओं के साथ हो रही हिंसा, यौन उत्पीड़न के विरोध में एकजुट होकर आवाज उठाने का आह्वान करता है।

● IIT BHU के निदेशक व BHU लंका थाने के SHO इस्तीफा दो।
● सभी संस्थानों में GSCASH की स्थापना करो।
● छात्राओं- महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करो।
● छात्रा- महिला विरोधी उपभोक्तावादी संस्कृति पर रोक लगाओ।


क्रांतिकारी इस्तकबाल के साथ
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)

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