19 June 2022

छात्र-युवा विरोधी 'अग्निपथ' योजना को तत्काल वापस लो!

मोदी सरकार होश में आओ, नौजवानों से मत टकराओ।
अग्निपथ-अग्निवीर के नाम पर बेरोजगारों को ठगना बंद करो।
सेना में 4 साल के लिए ठेके पर भर्ती की योजना वापस लो।
सेना में रिक्त एक लाख पदों पर तत्काल स्थाई नियुक्तियां करो।
प्रदर्शनकारी नौजवानों पर लाठीचार्ज करना बन्द करो। और दर्ज मुकदमे वापस लो।
देशभर में खाली पड़े 60 लाख पदों पर भर्ती निकालकर पदों पर स्थाई नियुक्ति दो।
सरकारी संस्थानों को बेचना बंद करो। ठेकेदारी प्रथा खत्म कर सबको स्थाई रोजगार दो।

दोस्तो,
          केन्द्र की मोदी सरकार ने हम बेरोजगार नौजवानों पर एक बार फिर से हमला बोला है। इस बार ये हमला 'अग्निपथ' योजना के नाम पर बोला गया है। इस योजना के तहत भारतीय सेना में हर साल 40 से 50 हजार पदों पर भर्ती निकाल कर युवाओं को सिर्फ 4 साल के लिए सेना में भरती किया जायेगा। 4 साल बाद इनमें से 25% को रिटेन किया जायेगा बाकी 75% को अपने-अपने 'अग्निपथों' पर भटकने के लिए छोड़ दिया जायेगा।

         हर बार की तरह योजना की घोषणा के बाद से गोदी मीडिया और सरकार समर्थक लोग इसके पक्ष में झूठे तर्क फैलाकर हम युवाओं को बेवकूफ बनाने की कोशिश कर रहे हैं। समर्थकों द्वारा कहा जा रहा है कि सिर्फ 4 साल की नौकरी के बाद नौकरी से निकलने वाले युवा के पास 10 से 12 लाख रुपए होंगे, निकलने वाले युवाओं को अलग-अलग सरकारी नौकरी में वरीयता दी जाएगी, हमारी सेना हमेशा युवा रहेगी आदि-आदि। 

         इन सभी समर्थकों से हमें पूछना चाहिए कि 4 साल बाद नौकरी से निकाले जाने वाले हजारों युवाओं को कहां नौकरी मिलेगी? नौकरी मिलेगी इस बात की क्या गारंटी है? जो लोग वरीयता की बात कर रहे हैं उनसे पूछा जाए कि वरीयता तो तब दी जाएगी ना जबकि अन्य जगह भर्ती निकाली जाएगी। पुलिस, अर्धसैनिक बल, रेलवे, बैंक आदि में सरकारी नौकरी के हालातों के बारे में हम से बेहतर कौन जानता है? पिछले सालों में इन संस्थानों के लिए या तो भर्ती निकाली ही नहीं जा रही है या फिर एक भर्ती को पूरा होने में 5-6 साल लग जा रहे हैं। ऐसे में सेना से निकाले जाने के बाद हम नौजवान कहां जायेंगे? तय है कि हम किसी बैंक, फैक्ट्री आदि में चौकीदार ही बन पाएंगे। बेरोजगारी की भयावह स्थिति को देखते हुए इस बात की गारंटी भी कम ही है।

          इन 'अग्निवीरों' का वेतन भी सामान्य सैनिकों से कम है। हर माह 30 हजार से 40 हजार का वेतन। इसमें से हर माह 9 हजार से 12 हजार रूपए काटे जायेंगे। यानी भर्ती हुए युवा के हाथ में 21 हजार से 28 हजार रूपए ही आयेंगे। इन काटे गए रुपयों (लगभग 5 लाख) में इतने ही पैसे सरकार द्वारा जोड़कर 4 साल बाद निकाले गए सैनिक के हाथ में 10 से 12 लाख रूपये पकड़ाकर उसे बेरोजगार भटकने के लिए छोड़ दिया जायेगा। ये सैनिक कोई पेंशन, ग्रेच्यूटी पाने का हकदार भी नहीं होगा। इस तरह अपने जीवन का सबसे अनमोल समय तैयारी और नौकरी में लगाने का इनाम मोदी सरकार द्वारा हमें बेरोजगार बना कर दिया जायेगा।

           इस फैसले के बाद पूरे देश में युवाओं ने इस योजना को वापस लेने के लिए विरोध प्रदर्शन करने शुरू कर दिए हैं। हो सकता है सरकार इस कदम में कुछ सुधार करें या इसे पूर्णतया वापस ले लें। लेकिन मोदी सरकार का पिछले 8 सालों का कार्यकाल बताता है कि सरकार युवाओं को बेरोजगारों की लाइन में खड़े कर सस्ते मजदूर के रूप में तैयार करना चाहती है। बीते सालों में सरकार द्वारा सरकारी संस्थानों को बेचकर, काम कर रहे कर्मचारियों को जबरदस्ती रिटायर करवा कर, खाली पदों में ठेके पर भर्ती कर के सरकारी नौकरियां खत्म की जा रही है। अपने घर की जमा पूंजी लगाकर तैयारी करने वाले हम युवाओं को लगातार सरकार द्वारा ठगा जा रहा है। यही नहीं हम बेरोजगारी के मुद्दे पर चिल्ला भी ना सके इसके लिए देश में रोज हिंदू-मुस्लिम का मुद्दा छेड़कर हमारे दिमागों में धीमा जहर भरा जा रहा है। अगर हम इस जहर की मदहोशी को तोड़कर अपने असली मुद्दे को नहीं उठाते तो हम इस लड़ाई को नहीं जीत पाएंगे। 

              यही नहीं अगर हम सिर्फ अकेले-अकेले इसी मामले को उठाकर लड़ते रहेंगे तब भी हमारा भला नहीं होगा। जीतने के लिए जरूरी है कि हम अन्य पदों की तैयारी करने वाले अन्य बेरोजगार भाइयों को भी अपने साथ लाएं। केवल इस भर्ती पर ही नहीं बल्कि सरकारी नौकरियों को खत्म करने की सरकार की पूरी योजनाओं के खिलाफ आवाज उठाएं। ठेकेदारी, सरकारी संपत्ति बेचने जैसे मोदी सरकार के कदमों को रोककर उसे बेरोजगारी के खिलाफ कानून बनाने के लिए बाध्य करें। तय है कि संघर्ष छोटा नहीं। हमें किसान आंदोलन से सीखते हुए बेरोजगार युवाओं की व्यापक एकता बनाकर आंदोलन को आगे बढ़ाना होगा। अगर हम ये करने में सफल रहे तो हमे जीतने से कोई नहीं रोक सकता।

क्रांतिकारी अभिवादन के साथ 
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)

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