शिगूफे- प्रपंच की कोई जगह नहीं
8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय मजदूर महिला दिवस जो कि वास्तव में महिला मजदूरों की पूंजीवाद के खिलाफ लंबी संघर्ष गाथा का एक प्रतीक दिवस है। पूरी दुनिया में ही मजदूर-मेहनतकश महिलायें इस दिवस को मनाने की जोर-शोर से तैयारी कर रही हैं। विगत दशकों में देश-दुनिया का कोई भी ऐसा संघर्ष नहीं रहा जिसमें महिलाओं की शानदार, प्रेरणादाई भूमिका ना रही हो। भारत में ही देखें तो पूरे देश भर में सीएए/एनआरसी/एनपीआर के विरोध प्रदर्शनों में महिलाओं की शानदार भूमिका रही है। शाहीन बाग जैसा संघर्ष का मजबूत किला महिलाओं के दम पर ही बनाया जा सका। तमाम दुख,कष्ट, दमन का इन महिलाओं द्वारा बहुत बहादुरी से मुकाबला किया गया। इनके हौसले के सामने दुख और दमन दम तोड़ता नजर आया।
इसके अतिरिक्त जामिया, जेएनयू, डीयू, बीएचयू, हिदायतुल्ला विश्वविद्यालय की छात्राओं के भी बहादुराना संघर्ष समाज की सड़ी गली सोच पर मजबूत प्रहार करते रहे हैं। छात्राओं के संघर्ष के साथ-साथ देश भर में मजदूर वर्ग के संघर्षों में महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सेदारी की। ये छात्राएं-महिलायें ही वास्तविक अर्थ में 8 मार्च की विरासत को आगे बढ़ा रही हैं।
इस सब के विपरीत शिगूफे और प्रपंच में माहिर मोदी ने क्या किया? पहले तो उन्होंने कहा वे सोशल मीडिया छोड़ सकते हैं। मीडिया ने उनके ट्वीट पर तूफान उठा दिया। इस तरह प्रसारित किया जैसे देश से प्राण वायु सब खत्म हो रही हो। फिर मोदी जी ने रहस्य का उदघाटन किया कि उनके सोशल मीडिया को एक दिन महिलाएं चलाएंगी। यह सब 8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस से कुछ दिन पूर्व ही किया गया। इसे मोदी द्वारा महिलाओं का सम्मान, उनकी फिक्र करना आदि-आदि ना जाने क्या-क्या कहा जा रहा है।
पर हम हकीकत में क्या देखते हैं। वे अपनी पत्नी को छोड़कर अपनी शादीशुदा पहचान छुपाते रहे। पत्नी की जासूसी करवाने के आरोप भी उन पर लगते रहे हैं। आम आदमी पार्टी के विधायक ने भरी विधानसभा में एक रिकार्ड सुनवाया और दावा किया कि इस टेप में अमित शाह मोदी के कहने पर किसी लड़की का पीछा करवाना, निगरानी करवाना जैसे काम कर रहे हैं।
इनकी सरकार के मंत्री-विधायक यहां तक कि खुद गृहमंत्री शाहीन बाग की महिलाओं को लगातार अपमानित करते रहे और आज भी कर रहे हैं। '500-500 रुपये लेकर शाहीनबाग में महिलाएं धरने में बैठी हैं' जैसे घटिया बातें इनके नेता करते रहे हैं। गुलमेहर कौर सभी को याद है कि किस तरह जब उन्होंने प्लेकार्ड लेकर एक वीडियो बनाया जो कि संघी लंपटों को पसंद नहीं आया। उसे रेप की धमकी तक दी गयी। विभिन्न फर्जी वीडियो बनाकर गुलमेहर को बदनाम किया गया। यह कोई एक मामला नहीं है। कई दफा लड़कियों को जो इनके विचारों का विरोध करती हैं उनके साथ ऐसा ही किया गया।
भाजपा विधायक कुलदीप सेंगर, पूर्व राज्य मंत्री व भाजपा नेता चिन्मयानंद, कठुआ गैंगरेप के आरोपियों आदि को भाजपा लगातार अंतिम समय तक बचाती रही। जनता के विरोध से यह मामले प्रकाश में आए और मजबूरन सरकार को कार्यवाही करनी पड़ी।
भाजपा विधायक-सांसदों-नेताओं का यह व्यवहार कोई अप्रत्याशित नहीं है। क्योंकि इनकी जड़ों को जो खाद-पानी मिलता है वह राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से मिलता है। संघ के स्त्री विरोधी सोच से सभी परिचित हैं। इसकी स्पष्ट अभिव्यक्ति है संघ में स्त्रियों की सदस्यता पर पूर्णता प्रतिबंध । मध्ययुगीन-पुरुषप्रधानता की सोच पर खड़े संघ से इससे अतिरिक्त उम्मीद भी क्या की जा सकती है। संघ से जुड़े भाजपा और उसके नेताओं से महिला स्वतंत्रता-बराबरी व सम्मान की उम्मीद करना खुद को मूर्ख बनाने जैसा है। इनके शिगूफे-प्रपंच में फसना है।
इसके साथ ही दुनिया का शासकवर्ग, बहुराष्ट्रीय कंपनियां 8 मार्च को अपने हित में इस्तेमाल करने में जुटी हुई हैं। पूँजीवादी शासक 8 मार्च में से मज़दूर और क्रांतिकारीता निकालकर उसका इस्तेमाल कर रहे हैं। अपने को महिलाओं का हिमायती बता रहे हैं। मोदी इस सब का एक नमूना ही प्रस्तुत कर रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि आए दिन महिलाएं हिंसा, अपमान का शिकार बन रही हैं। घरेलू हिंसा, दहेज हत्या, साइबर क्राइम आदि अपराधों का रिकॉर्ड साल दर साल बढ़ता ही जा रहा है। इस सब के विपरीत धूर्त पूंजीवादी नेता फर्जी नारे, फर्जी सहानुभूति का प्रपंच कर रहे हैं।
कंपनियां 8 मार्च का इस्तेमाल अपना माल बेचने के लिए कर रही हैं। इसके लिए वह महिलाओं को लज्जित करने वाले विज्ञापनों से लेकर सेक्स ऑब्जेक्ट बना देने तक जा रही हैं। इन विज्ञापनों से जो उपभोक्तावादी संस्कृति प्रवाहित होती है वह तमाम किस्म के अपराधियों को जन्म दे रही है।
8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हम मजदूर मेहनतकश महिलाओं व उनकी बेटियों का एक प्रतीक दिवस है। जिस दिन हमारी पूर्वज महिलाओं ने संघर्ष किया, बलिदान दिया। उनका संघर्ष इसी पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ था और इस संघर्ष को शासकों ने गोलियां चलाकर कुचला। हमें इस विरासत को आगे बढ़ाने की जरूरत है। पूंजीवादी शासकों-पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ निर्णायक संघर्ष की जरूरत है। तभी देश की महिलाएं व छात्राएं एक सुरक्षित, सम्मानपूर्वक जीवन जी सकेंगी। सुरक्षित व सम्मानपूर्वक जीवन की चाह कोई अपराध नहीं और हम इसे हासिल करके रहेंगे।

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