9 September 2022

आइये! उत्तराखंड में भर्ती घोटाले के विरोध में आवाज उठायें।



        UKSSSC (उत्तराखण्ड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग) उत्तराखण्ड में विभिन्न भर्तियों में पेपर लीक, भ्रष्टाचार की जांच STF (स्पेशल टास्क फोर्स) द्वारा की जा रही है। ग्राम पंचायत विकास अधिकारी (2016), दरोगा भर्ती (2015), वन रक्षक भर्ती (2018), वन दरोगा भर्ती (2021), आदि भर्तियों की जांच चल रही है। इसके अलावा सचिवालय में विधानसभा अध्यक्ष द्वारा परिजनों, रिश्तेदारों की मनमानी नियुक्ति का मामला भी सामने आया है। अभी तक दर्जनों गिरफ्तारी होने के बावजूद भर्ती घोटाले में मुख्य आरोपी खुले घूम रहे हैं। सीबीआई जांच की मांग हो रही है।

        बेरोजगारी की भयावहता आज हर कोई महसूस कर रहा है। बेरोजगारी के प्रति केन्द्र की मोदी सरकार से लेकर राज्य सरकारों तक बेशर्म बेरुखी जगजाहिर है। 2016 से बेरोजगारी के आंकड़े मोदी सरकार छिपाये जा रही है। किसी भी तरह जीवनयापन को ही मोदी सरकार ने रोजगार घोषित कर दिया है। वहीं दूसरी तरफ बेरोजगारी के कारण आत्महत्या के मामलों में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है।


        नौकरी के सीमित अवसरों के चलते नौजवानों पर गलाकाटू प्रतियोगिता में कूदना मजबूरी है। नौजवान रात-दिन मेहनत कर रहे हैं। इन्हीं में कुछ अपने पैसे, रसूख या जान-पहचान का इस्तेमाल कर भ्रष्ट तरीकों से नौकरी पाने से भी कोई गुरेज नहीं कर रहे हैं। कम से कमतर होते स्थायी-सुरक्षित नौकरी के चलते भ्रष्ट तरीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। उत्तराखण्ड, राजस्थान, हरियाणा, मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, आदि-आदि सभी राज्य बारी-बारी से भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी नौकरियों के गवाह बनते रहे हैं। भ्रष्टाचार के नाम पर आगामी भर्तियों को रद्द कर बेरोजगारों पर और अधिक हमला सरकारें करती हैं। कोई राजनीतिक पार्टी इस भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद या परिवारवाद से मुक्त नहीं है। या कहें कि हमाम में सब नंगे हैं।


        पैसे, पावर (सत्ता तक पहुंच) के चलते नौकरी पाने का आलम ये है कि राष्ट्रहित, देशहित का शोर मचाते राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारकों के परिजनों को नौकरियां दी गयी। तमाम भाजपा के मंत्रियों-नेताओं के करीबियों को नौकरियां दी गयी। अपनी बारी में यही काम कांग्रेस सरकार ने भी किया। ‘‘विधानसभा अध्यक्ष के पास अधिकार है वह नौकरी दे सकता है’’ या ‘‘6 माह में तीन प्रमोशन देकर सचिव बनाना हमारा अधिकार है।’’ जैसी अहंकार से भरी भाषा प्रेमचन्द अग्रवाल सत्ता की हनक में ही बोल रहे हैं। सी.बी.आई. जांच या किसी भी अन्य किस्म की जांच से पेपर लीक के भ्रष्ट मगरमच्छों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हां, कुछ छोटी मछलियां जरूरी पकड़ी जायेंगी।

        असल में मौजूदा पूंजीवादी व्यवस्था बेरोजगारी को बनाए रखती है। बेरोजगारों की यह रिजर्व सेना बाजार में उतार-चढ़ाव के वक्त बाजार में कामगार उपलब्ध कराती है। ऐसे में न सिर्फ बेरोजगारी बढ़ी है बल्कि बहुत थोड़ी सी नौकरियों के लिए भी गलाकाटू प्रतियोगिता से लेकर भ्रष्टाचार तक सब नए शिखर पर पहुंच रहा है।


उत्तराखण्ड की धामी सरकार ने भर्ती घोटाले के नाम पर तय भर्तियों को भी रद्द कर दिया है। भ्रष्टाचार की भेंट वो छात्र-नौजवान चढ़ रहे हैं जो मेहनत कर रहे हैं लेकिन उनके पास पैसा, ताकत नहीं है।
ऐसे में बेरोजगारी के खिलाफ संघर्ष करते हुए हम मांग करें-

1. जांच में भ्रष्ट पाये गये अफसरों-कर्मचारियों को बर्खास्त करो।
2. जांच के दायरे में आ रहे मंत्री-विधायक इस्तीफा दो।
3. उत्तराखण्ड में विभिन्न विभागों में खाली पड़े 56,944 पदों को तत्काल भरो।
4. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी जी भर्ती में भ्रष्टाचार के नाम पर नयी भर्तियों को टालने का फैसला वापस लो।

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