27 November 2024

काकोरी ट्रेन एक्शन के सौ साल

"खूं से ही हम शहीदों के, फौज बना देंगे!”


   11 जून, 1897 को शाहजहांपुर में जन्मे रामप्रसाद को 19 दिसंबर, 1927 को गोरखपुर जेल में फांसी दी गई। आप उम्दा शायर भी थे। औपनिवेशिक शासन से आहत होकर 'बिस्मिल' उपनाम अपनाया। "हम अमन चाहते हैं जुल्म के खिलाफ/फैसला गर जंग से होगा तो जंग ही सही।"


   22 अक्टूबर, 1900 को शाहजहांपुर में जन्मे अशफाक उल्ला खान को 19 दिसंबर, 1927 को फैजाबाद जेल में फांसी दी गई। रामप्रसाद से मित्रता-प्रेमभाव ऐसा कि अशफाक-बिस्मिल का नाम एक साथ ही लिया जाता है। "दिलवाओ हमें फांसी ऐलान से कहते हैं/खूं से ही हम शहीदों के फौज बना देंगे।"