"खूं से ही हम शहीदों के, फौज बना देंगे!”
22 अक्टूबर, 1900 को शाहजहांपुर में जन्मे अशफाक उल्ला खान को 19 दिसंबर, 1927 को फैजाबाद जेल में फांसी दी गई। रामप्रसाद से मित्रता-प्रेमभाव ऐसा कि अशफाक-बिस्मिल का नाम एक साथ ही लिया जाता है। "दिलवाओ हमें फांसी ऐलान से कहते हैं/खूं से ही हम शहीदों के फौज बना देंगे।"


