बीते 25 दिसंबर को BHU में मनुस्मृति दहन दिवस पर एक चर्चा का आयोजन भगत सिंह स्टूडेंट्स मोर्चा (BSM) द्वारा किया जाता है। लेकिन जैसे ही यूनिवर्सिटी प्रशासन को इसकी खबर लगती है, वो छात्रों पर हमलावर हो जाता है। उनके साथ जबरदस्ती मारपीट कर के इस कार्यक्रम को करने से रोकता है।
अगले ही दिन 26 दिसंबर को इन्हीं 13 छात्रों को जिसमें 3 छात्राएं शामिल हैं, गिरफ्तार कर लिया जाता है, मनुस्मृति दहन दिवस पर चर्चा आयोजित करवाने की वजह से। साथ ही इन छात्रों पर संगीन धाराओं जैसे कि धारा 124 जिसमें दस साल तक की कैद का प्रावधान है लगाए जाते हैं। इतना ही नहीं आतंकवाद निरोधी दस्ते ATS तक को इन छात्रों से पूछताछ के लिए बुलाया जाता है। उनके मोबाईल जब्त कर लिए जाते हैं, उन्हें अपने वकीलों से नहीं मिलने दिया जाता है। उनके साथ मारपीट भी की जाती है।
इस पूरे घटनाक्रम से पता चलता है कि आज फासिस्ट सरकार छात्रों के हितों और उनके मानवाधिकारों के लिए कितनी घातक हो चुकी है, विश्वविद्यालयों में चर्चा परिचर्चा करना एक बहुत ही समान्य बात है। मनुस्मृति जैसा जहरीला दस्तावेज़ जो कि जाति व्यवस्था को स्थापित करता हो और महिलाओं को दोयम दर्जे का नागरिक घोषित करता हो, उसका दहन एक ऐतिहासिक परिघटना थी। जिसे आज भी याद करने और समझने की जरूरत है।
BHU कैम्पस में ABVP और RSS के सभी कार्यक्रम हो सकते हैं लेकिन जनवादी संगठन किसी भी विषय पर चर्चा करें तो ये प्रशासन उनका दमन करने लगता है।
पछास BHU प्रशासन की कठोर निंदा करता है। साथ ही BSM के सभी 13 साथियों के रिहाई की मांग करते हुए अपनी एकजुटता पेश करता है।
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)


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