8 September 2014

प्रेम करने का जनवादी अधिकार और तथाकथित ‘लवजेहाद’


    आजकल पूरी ही संघ मण्डली ने मिलकर एक नया प्रपंच खड़ा किया है। राम मंदिर, राम-सेतु के बाद ये नया प्रपंच ‘लवजेहाद’ का है। उनका कहना है कि मुस्लिम लड़कों द्वारा हिन्दू लड़कियों को बहला-फुसलाकर उनसे शादी कर जबरन उनका धर्म-परिवर्तन करवाया जा रहा है। मजेदार बात ये है कि खुद बीजेपी और संघ के कई नेताओं ने भी अंर्तधार्मिक विवाह किया है, पर बीजेपी की नजर में ये ‘लवजेहाद’ का हिस्सा नहीं है।
यह पूरा खेल ठीक उस समय खेला जा रहा है जब मोदी सरकार की पोल जनता के सामने खुलने लगी है और यूपी में उपचुनाव होने है। जिस तरह मुजफ्फर नगर दंगों ने बीजेपी को लोकसभा चुनाव में यूपी में अप्रत्याशित सफलता दिलवायी थी, उसी तरह बीजेपी ‘लवजेहाद’ की कश्ती में बैठकर उपचुनाव की वैतरणी पार करना चाहती है।
    हमारा मानना है कि शादी व प्रेम दो इंसानों का व्यक्तिगत मामला है। और दो व्यक्तियों के बीच शादी के लिए प्रेम के अतिरिक्त अन्य कोई भी आधार (जाति, धर्म, नस्ल आदि) रिश्तों
की जड़ों को खोखला ही करता है। इसी तरह किसी भी धर्म के प्रति आस्था रखना किसी व्यक्ति का व्यक्तिगत मामला है। रही बात बीजेपी द्वारा फैलाए जा रहे तथाकथित ‘लवजेहाद’ के हल्ले की, यह सच्चाई और तथ्यों के लिहाज से सफेद झूठ है। लेकिन फिर भी यदि कोई व्यक्ति जबरदस्ती धर्म परिवर्तन कराने के मामले में दोषी पाया जाता है तो उसे कानूनन सजा होनी ही चाहिए पर ऐसे कुछ मामलों को मुददा बनाकर नफरत की राजनीति करने वाले
संगठनों व लोगों को भी बख्शा नहीं जाना चाहिए।
     हमको यह भी याद रखना चाहिए कि बीजेपी ने ये मुददा अपने गुरू हिटलर से विरासत में पाया है। जिसका इस्तेमाल हिटलर ने जर्मनी में यहूदियों के खिलाफ घृणा फैलाकर उनका कत्लेआम करने में किया था। दुनिया आज भी तानाशाह हिटलर को भूल नहीं पायी है। लेकिन उसके अनुयायी आज फिर उन्हीं हथियारों को लेकर लौट रहे
है। जरूरत है कि इनके हर झूठ को बेनकाब करते हुए इन सांप्रदायिक-फासिस्ट ताकतों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाए।

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