FTII ( भारतीय फिल्म एण्ड टेलीविजन संस्थान) पुणे, के छात्र पिछली 12 जून से हड़ताल पर हैं। उन्होंने ये कदम सरकार द्वारा गजेन्द्र चैहान को संस्थान का चेयरमैन बनाए जाने के विरोध में उठाया है। यही नहीं छात्र गवर्निंग बाॅॅडी में चुने गए 4 अन्य सदस्यों की नियुक्ति का भी विरोध कर रहे हैं। कला के नाम पर इन पांचों व्यक्तियों के पास संस्थान को देने के लिए कुछ भी नहीं है।
गजेन्द्र चैहान ने भी टेलीफिल्म ‘महाभारत’ में युधिष्ठिर के पात्र के अलावा शायद ही कोई याद करने योग्य, योगदान कला के क्षेत्र में दिया हो। तो फिर चैहान को FTII का चेयरमैन क्यो बनाया जा रहा है? आखिर उनमें ऐसी कौन-सी ‘गुप्त योग्यता’ है जिसके दम पर सरकार उन्हें कई प्रतिभावान कलाकारों के स्थान पर प्राथमिकता दे रही है? दरअसल ये ‘गुप्त योग्यता’ है चैहान व अन्य सदस्यों का संघ-भाजपा से जुड़ा होना। चैहान तो आगे बढ़कर आसाराम बापू की तर्ज पर वेलेंटाइन डे का विरोध कर उसे माता-पिता दिवस के रूप में मनाए जाने का समर्थन करते रहे हैं। जोकि संघ की विचारधारा के बिल्कुल मुफीद है। इसलिए तो संघ चैहान की नियुक्ति का विरोध करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को ‘हिन्दू-विरोधी’ घोषित कर रहा है।
संघ-भाजपा द्वारा अयोग्य व्यक्तियों को शिक्षा संस्थानों के उच्च पदों पर आसीन करने की कहानी यहीं नहीं रूकती। वो चाहे ‘भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद’ हो या ‘सेंसर बोर्ड’ हर जगह ऐसे व्यक्तियों की नियुक्ति की गयी है जो संघ की विचारधारा से जुड़े रहे हैं। ऐसे में स्वतः ही ये सवाल उठता है कि क्या ये ‘अयोग्य’ व्यक्ति शिक्षा, कला के स्तर को ऊंचा उठा पाएगें? दरअसल संघ-भाजपा मण्डली को इस सवाल से खास मतलब भी नहीं है। वो तो महज इन नियुक्तियों के जरिए शिक्षा संस्थानों को अपनी साम्प्रदायिक विचारधारा से दूषित करना चाहती है। वो ऐसे छात्रों को तैयार करना चाहती है जो सवाल करने, सोचने की शक्ति खोकर उसकी साम्प्रदायिक राजनीति के वाहक बने। और इसके लिए पाठ्क्रमों से लेकर हर चीज को बदला जा रहा है।
बेहतर शिक्षा के लिए जरूरी है कि छात्रों को बोलने, सोचने, विरोध करने का हक दिया जाए। जिसे पाकर एक ऐसा छात्र तैयार हो जो समाज की बुराईयों के खिलाफ आवाज उठाते हुए उसे बदलने का प्रयास करे। और यहीं पर संघ द्वारा परोसी जा रही शिक्षा इसके विरूद्ध खड़ी हो जाती है। इसलिए जरूरी हो जाता है कि संघ द्वारा किए जा रहे शिक्षा के साम्प्रदायिकरण का विरोध करते हुए FTII के संघर्षरत छात्रों के साथ खड़ा हुआ जाए।

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