27 June 2015

मुजमिल फारूख को रिहा करो!

      मुजमिल फारूख दार कश्मीरी विश्वविधालय के अंग्रेजी विभाग का तीसरे सेमेस्टर का छात्र है। जिसे 22 जून को क्लास समाप्त होने के बाद विश्वविधालय के गेट से पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस द्वारा मुजमिल की ये गिरफ्तारी 21 जून को विश्वविधालय में मनाए जा रहे ‘योग दिवस’ के विरोध में किए गए प्रदर्शन के ठीक एक दिन बाद की गयी।
 
     मुजमिल इस विरोध-प्रदर्शन को आयोजित करने वाले ने ृतत्वकारी छात्रों में से एक था। मुजमिल की गिरफ्तारी की सूचना उसके परिवार वालों को भी नहीं दी गयी और ना ही गिरफ्तारी का कारण बताया गया। अंत में 25 जून को भारी दबाव के चलते पुलिस ने बताया कि मुजमिल को आतंकवादियों से संबंध होने की जांच के लिए गिरफ्तार किया गया है। पुलिस द्वारा यह तर्क कितना खोखला है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गिरफ्तारी के 3 दिन बाद मुजमिल की गिरफ्तारी का कारण बताया जा रहा है। कश्मीरी छात्र व मुजमिल के सहपाठी पुलिस की हकीकत को अच्छी तरह जानते हैं। वे जानते हैं कि किस तरह से हजारों कश्मीरी नौजवानों को गिरफ्तार कर या उनकी हत्या कर देने के बाद उन्हें आतंकवादी घोषित कर दिया जाता है। कश्मीर का हर एक नौजवान इसी सच्चाई से रूबरू होकर बड़ा हुआ है। इसलिए उन्होनें पुलिस की झूठी कहानी को मानने से इंकार करते हुए मुजमिल की रिहाई की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शनों को आयोजित किया। छात्रों के आंदोलन से घबराए हुए प्रशासन ने दमन का रास्ता अपनाया हुआ है। 26 जून से छात्रों को उनके हास्टलों से जबर्दस्ती बाहर निकाल दिया गया। तब से ही छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्षरत हैं।
     भारतीय शासकों का ये दमनकारी चरित्र केवल कश्मीर ही नहीं पूरे देश में कहर बरपा रहा है। मोदी नित भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद से तथाकथित भारतीय लोकतंत्र का चेहरा और अधिक कुरूप ही हुआ है। भाजपा अपने सांप्रदायिक एजेंडे को पूरे देश में लागू कर समाज को भगवा रंग में रंगना चाहती है। इसलिए विरोध की हर आवाज को दबाया जा रहा है। कश्मीर ही नही शेष भारत में भी हर जायज मांग को कुचला जा रहा है। इसलिए स्वतः ही कश्मीरी नौजवानों की लड़ाई, भारत के मेहनतकशों की लड़ाई से जुड़ जाती है। क्योंकि हमारा दुश्मन एक ही है। साझा दुश्मन के खिलाफ, साझा लड़ाई ही कश्मीर और भारतीय जनता का मुस्तकबिल है। आइए तब तक हम बुलंद आवाज में दोहराए-
मुजमिल फारूख को रिहा करो!

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