फिल्म एण्ड टेजीविजन संस्थान(FTII), पुणे के छात्र पिछले शुक्रवार 11 जून से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उन्होनें ये कदम सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा गजेन्द्र चैहान को FTII का चैयरमैन नियुक्त किए जाने की घोषणा के बाद से उठाया है। छात्र, गजेन्द्र चैहान की नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं।
FTII में चैयरमैनों की नियुक्ति की एक शानदार परम्परा रही है। अदुर गोपालकृष्णन, गिरिश कर्नाड, श्याम बेनेगल, अनंतमूर्ति, सईद मिर्जा को कला, साहित्य, फिल्म निर्माण के क्षेत्र में दिए गए अपने योगदान के चलते ही FTII का चैयरमैन बनाया गया था। इनके मुकाबले गजेन्द्र चैहान को टेलीफिल्म महाभारत में युधिष्ठिर का पात्र निभाने के अलावा भी शायद कोई जानता हो। हां बेशक उन्होनें ‘खुली खिड़की’ जैसी कई B-ग्रेड फिल्मों में अभिनय भी किया है। उनके द्वारा कला के क्षेत्र में कोई ऐसा योगदान नही है, जिससे उन्हें FTII का चैयरमैन नियुक्त किया जाए। तो फिर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने उनकी किस योग्यता के चलते उन्हें इस पद पर नियुक्त किया है?
FTII में चैयरमैनों की नियुक्ति की एक शानदार परम्परा रही है। अदुर गोपालकृष्णन, गिरिश कर्नाड, श्याम बेनेगल, अनंतमूर्ति, सईद मिर्जा को कला, साहित्य, फिल्म निर्माण के क्षेत्र में दिए गए अपने योगदान के चलते ही FTII का चैयरमैन बनाया गया था। इनके मुकाबले गजेन्द्र चैहान को टेलीफिल्म महाभारत में युधिष्ठिर का पात्र निभाने के अलावा भी शायद कोई जानता हो। हां बेशक उन्होनें ‘खुली खिड़की’ जैसी कई B-ग्रेड फिल्मों में अभिनय भी किया है। उनके द्वारा कला के क्षेत्र में कोई ऐसा योगदान नही है, जिससे उन्हें FTII का चैयरमैन नियुक्त किया जाए। तो फिर सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने उनकी किस योग्यता के चलते उन्हें इस पद पर नियुक्त किया है?
दरअसल चैहान 2004 से भाजपा के सक्रिय सदस्य रहे हैं। लोकसभा से लेकर विधानसभा चुनावों में भाजपा के प्रचारक रहे हैं। आशाराम बापू की तरह वेलेंटाइन डे का विरोध करते हुए उसे माता-पिता पूजन दिवस के रूप में मनाए जाने क प्रबल समर्थक रहे हैं। और भाजपा के लिए चैहान की यही योग्यता काफी है। यही नहीं चैहान के अतिरिक्त अनाघा घेसस और शैलेस गुप्ता को FTII की गवर्निंग काउंसिल का सदस्य बनाया गया है। ये दोनों भी संघ की पाठशाला से निकले हुए व्यक्ति हैं। और संघ की सांप्रदायिक विचारधारा से ग्रसित फिल्मों का निर्माण कर चुके हैं। घेसस ने बाबरी मस्जिद विध्वंस को महिमा मण्डित करते हुए तो गुप्ता ने मोदी को मसीहा के रूप में स्थापित करती हुयी फिल्मों का निर्माण किया है। यही वह ‘गुप्त योग्यता’ है जिसने इन्हें भी FTII का हिस्सा बनाया है।
संघ, समाज के सभी अंगों को अपनी सांप्रदायिक राजनीति से दूषित कर जल्द से जल्द अपने तथाकथित ‘हिन्दू राष्ट्र’ के सपने को पूरा करना चाहता है। भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद में सुदर्शन राव जैसे ‘अनैतिहासिक’ व्यक्ति को अध्यक्ष बनाकर, दीनानाथ बत्रा जैसे कूपमण्डुक व्यक्ति द्वारा लिखित किताबों को गुजरात के स्कूलों में चलवाकर, फिल्म प्रमाणन बोर्ड में अपने लोगों को नियुक्त कर, संघ ने समाज की नसों में अपना सांप्रदायिक विष भरने का काम बहुत पहले से ही शुरू कर दिया है। ताजा हमला FTII पर बोला गया है। इसलिए जरूरी हो जाता है कि हम संघ की भगवाकरण की कोशिशों का पुरजोर विरोध करते हुए FTII के छात्रों का साथ दें।


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