23 October 2015

UGC द्वारा नाॅन-नेट फेलोशिप को खत्म किए जाने का विरोध करो!

        UGC ने 7 अक्टूबर को दिए गए अपने एक फैसले के द्वारा अगले सत्र से केन्द्रीय विद्यालयों में M.Phil. व Ph.D. छात्रों को मिलने वाली नाॅन-नेट फेलोशिप को खत्म करने का फैसला कर लिया है। इससे पहले इन छात्रों को शोध के लिए क्रमशः 5 व 8 हजार रूपये प्रति माह मिलते थे। सरकार द्वारा दी जा रही इस आर्थिक सहायता से छात्रों को अपने परिवारों पर बोझ बने बिना अध्ययन करने का मौका मिल पाता था। जिससे वो आसानी से अपना शोध जारी रख सकते थे। परंतु UGC के इस फैसले के बाद केवल आर्थिक रूप से समृद्ध छात्र ही शोध के क्षेत्र में पहुंच पाएगें।

        कल्याणकारी राज्य के दौर में शुरू की गयी इस तरह की सभी योजनाओं को विभिन्न सरकारों द्वारा एक-एक करके बंद किया जा रहा है। जिसके पीछे ये आधार काम करता था कि शिक्षा उपलब्ध करवाना राज्य की जिम्मेदारी है। परंतु आज छुट्टे पूंजीवाद के दौर में जिसका रथ फिलहाल संघी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी खींच रहे हैं, सरकारें शिक्षा-स्वास्थ से लेकर हर जन कल्याण की योजनाओं से अपने हाथ खींच रही हैं। मोदी सरकार द्वारा शिक्षा बजट में कटौती, NIT जैसे संस्थानों की फीसों में 300% तक की वृद्धि सरकार की इसी योजना को अभिव्यक्त करती है।
        1991 में नई आर्थिक नीतियों को लागू करने के बाद से ही सरकारों द्वारा उच्च शिक्षा को देशी -विदेशी पूंजीपतियों का चारागाह बनाने की कोशिशें की जाती रही हैं। उच्च शिक्षा के बाजार पर लार टपकाता पूंजीपति वर्ग निरंतर ही सरकारों से इसे पूंजीपतियों के हाथ में देने की मांग करता रहा है। इसी रोशनी में सरकार जहां एक तरफ उच्च शिक्षा से अपने हाथ खींचते हुए लगातार उसका निजीकरण कर रही है तो दूसरी तरफ उच्च शिक्षा के क्षेत्र को साम्राज्यवादी पूंजी के लिए खोलने के लिए इसे WTO-GATS के अधीन करने जा रही है। जिसकी शर्तो में ये शामिल है कि सरकारें अपने-अपने देशों में शिक्षा पर किए जा रहे खर्चो को कम करेंगी।
        आज भारतीय पूंजीवाद ऐसे दौर में पहुंच चुका है, जहां वो देश की मेहनतकश जनता व छात्रों-नौजवानों को कुछ नहीं दे सकता। बल्कि वो पहले से मिली रियायतों को भी छीनकर जनता पर अपने हमले को बढ़ाए हुए है। आज हर एक छीनते अधिकार को पाने का एक ही रास्ता बनता है कि इस पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ अपने संघर्षो को मोड़ा जाए। तब तक छात्रों-युवाओं को UGC के इस छात्र विरोधी फैसले का पुरजोर विरोध करना चाहिए। 

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