6 January 2016

डीयू को साम्प्रदायिक ताकतों का केन्द्र बनाए जाने का विरोध करो!

‘न त्रिशूल-न तलवार’ , हमें चाहिए रोजगार!!
        
        आने वाली 9 जनवरी को डीयू में अरूंधति वशिष्ठ परिषद पीठ(जोकि विश्व हिन्दू परिषद से जुड़ा संगठन है) द्वारा ‘राम जन्म भूमि’ के मामले पर एक सेमिनार का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें अयोध्या में मंदिर बनाए जाने के मामले पर जनमत तैयार करने की योजना बनाए जाने पर चर्चा की जाएगी। शुरू से ही यह मुद्दा विवादों से भरा रहा है राजनीतिक दल अपने-अपने राजनीतिक हितों के अनुरूप इसे हवा देते आयें हैं। जिनका परिणाम बड़े पैमाने के साम्प्रदायिक दंगों और मेहनतकश आबादी के बीच साम्प्रदायिक विभाजन के मजबूत होने के तौर पर सामने आया है। अब फिर से RSS व BJP यही सब करने की घृणित मंशा पाल रही हैं। 
        ‘राम जन्म भूमि’ का यह विवादित मुद्दा लम्बे समय से सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने के बावजूद संघी मंडली इसे हवा दे रही है जिसके पीछे इनका मकसद देश के भीतर साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण व दंगे पैदा करना है। हमें ये भी मालूम है कि इससे पहले भी RSS, BJP, VHP जैसी साम्प्रदायिक ताकतों ने इस मुद्दे का इस्तेमाल करते हुए देश को बांटने की कोशिश की जिसकी वजह से हजारों  मासूमों को अपनी जान गंवानी पड़ी। इन्ही लाशों पर चढ़कर BJP ने सत्ता का स्वाद भी चखा।
        आज जब एक बार फिर इस मुद्दे को गरमाया जा रहा है तो इसके निश्चित कारण हैं। केन्द्र में काबिज मोदी सरकार सबको रोजगार देने, मंहगाई पर रोक लगाने, सबको शिक्षा देने के अपने वादे को पूरा करने में पूरी तरह नाकाम  रही है। पिछले डेढ़ साल से उन्ही जनविरोधी नीतियों को लागू किया जा रहा है जिन्हे कांग्रेस ने अपने दस साला कार्यकाल के दौरान बनाया था। इन नीतियों का ही कुल परिणाम बढ़ती किसान आत्महत्या, मंहगी होती शिक्षा, बढ़ती मंहगाई, सिकुड़ते रोजगार के अवसरों के रूप में सामने आ रहा है। ऐसे में सारे समाज का ध्यान  इन समस्याओं से दूसरी तरफ मोड़ने के लिए एक बार फिर से ‘राम जन्म भूमि’ के मामले को हवा दी जा रही है। हमें ये भी नही भूलना चाहिए कि अगले ही साल यूपी विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। लोकसभा चुनाव के समय मुजफ्फर नगर दंगों ने BJP को चुनाव में जो बढ़त दिलाई थी वही काम ‘राम जन्म भूमि’ के मामले से भी किया जाएगा। यानि जनता की धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर वोटों की लहलहाती फसल काटी जाएगी।
        शिक्षा संस्थानों को इन साम्प्रदायिक योजनाओं का हिस्सा बनाया जाना और भी अधिक खतरनाक है। FTII में गजेन्द्र चैहान की नियुक्ति, मद्रास में अंबेडकर पेरियार ग्रुप पर प्रतिबंध, पाठ्यक्रम को भगवा रंग में रंगने की कोशिश आदि- आदि तरीकों से BJP सरकार शिक्षा को अपनी साम्प्रदायिक राजनीति का हिस्सा बनाने की कोशिश पहले से ही कर रही है। ये सेमिनार भी इसी कड़ी का हिस्सा है। ऐसे में हम सभी प्रगतिशील ताकतों का कर्तव्य बन जाता है कि हम सड़को पर उतर कैम्पसों के भगवाकरण की इन कोशिशों को बेनकाब करें। पछास सभी छात्रों, शिक्षकों, बुद्धिजीवियों से आहवान करता है कि डीयू प्रशासन द्वारा इस सेमिनार को अनुमति दिए जाने का विरोध करें।

हम मांग करते हैं कि-
1. डीयू प्रशासन तत्काल प्रभाव से सेमिनार की अनुमति को रद्द करे।
2. केन्द्र सरकार, शिक्षा संस्थानों के भगवाकरण की साजिशों को बंद करे
3. देश के भीतर साम्प्रदायिक जहर घोलने वाली ताकतों के खिलाफ आवाज बुलंद करो।



 

No comments:

Post a Comment