रोहित वेमुला की ‘आत्महत्या’ प्रकरण
17 जनवरी को हैदराबाद विश्वविद्यालय के एक दलित छात्र रोहित ने हास्टल में आत्महत्या कर ली। 28 वर्षीय रोहित पी.एच.डी. द्वितीय वर्ष का छात्र था। लगभग, पिछले 15 दिनों से रोहित व अन्य छात्रों को हास्टल से निष्कासित कर दिया गया था। ये पांचों छात्र दलित थे तथा अंबेडकर स्टूडेंट एसोसियेशन(ए.एस.ए.) के सक्रिय सदस्य थे।
घटना के बाद से ही पूरे देश में रोहित की आत्महत्या पर आक्रोश है। हैदराबाद, दिल्ली सहित तमाम शहरों में छात्रों ने रोहित की मौत पर विरोध प्रदर्शनों को आयोजित किया है। हैदराबाद वि0वि0 के छात्र रोहित की मौत के बाद से कुलपति अप्पा राव के इस्तीफे की मांग करते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गये हैं। तो रोहित का परिवार अपने जवान बेटे को खोने के बाद न्याय के लिए वि0वि0 गेट पर भूख हड़ताल पर बैठ गया है।
दरअसल मामले की शरुआत अगस्त माह से हुयी। जब दिल्ली वि0वि0 में डाक्यूमेंट्री फिल्म ‘‘मुजफ्फरनगर बाकी है’’ का एबीवीपी द्वारा जबरदस्ती प्रदर्शन रुकवाया गया था। जिसके विरोध में जगह-जगह फिल्म का प्रदर्शन किया गया। हैदराबाद वि0वि0 में भी ए.एस.ए. द्वारा फिल्म का प्रदर्शन किया गया। इस पर एबीवीपी के अध्यक्ष सुशील कुमार ने फेसबुक पर कार्यक्रम का विरोध करते हुए ए.एस.ए. के कार्यकर्ताओं को ‘गुण्डा’ कहा। इस पर हुये विरोध के चलते 3 अगस्त को अगले दिन सुशील कुमार ने सबके सामने अपनी कार्यवाही पर माफी मांग ली। अब तक सुशील कुमार के साथ कोई मारपीट नहीं हुयी थी। इसकी गवाही खुद चैकीदार ने जांच समिति को दी है। लेकिन अगले दिन सुशील कुमार ने ए.एस.ए. के कार्यकर्ताओं पर खुद पर हमला करने की बात की तथा ए.एस.ए. के पांच नेताओं पर मारपीट में शामिल होने का आरोप लगाया। घटना की जांच के लिए प्राक्टर आलोक पाण्डेय के नेतृत्व में बने प्रोक्टोरियन बोर्ड ने भी अपनी रिपोर्ट में यह माना कि सुशील कुमार पर ए.एस.ए. कार्यकर्ताओं द्वारा हमला करने के कोई ठोस सबूत नहीं हैं। पर इसके बाद भी उसने पांचों छात्रों को निष्कासित करने के आदेश दिये। फैसले का विरोध करते हुए छात्रों ने तत्कालीन कुलपति आर.पी.शर्मा से मुलाकात की। जिसपर उन्होंने फैसले पर रोक लगाते हुए एक नयी जांच समिति बनाने के आदेश दिये। इस बीच कुलपति के बदल जाने से नये कुलपति अप्पा राव ने पुरानी जांच समिति के फैसले को ही लागू करते हुए पांचों छात्रों के निष्कासन का फैसला दिया। इस निष्कासन में खास बात यह थी कि इन छात्रों को हास्टल, प्रशासनिक भवन और अन्य जगहों पर जाने पर पाबंदी थी। यानि ये छात्र अन्य छात्रों से मिल नहीं सकते थे, जो कि कालेज प्रशासन द्वारा इन छात्रों का सामाजिक बहिष्कार करने की कोशिश थी। वि0वि0 के इस तानाशाहीपूर्ण रवैये से आक्रोशित छात्रों ने पांचों छात्रों का निष्कासन समाप्त किये जाने की मांग को लेकर संयुक्त रूप से विश्वविद्यालय के बाहर ही धरना शुरु कर दिया। इस बीच प्रशासन अपने फैसले से पीछे हटने को तैयार नहीं हुआ। और अंत में हर तरह से हार मानते हुए रोहित वेमुला ने धरने के 15वें दिन आत्महत्या कर ली।
आत्महत्या के बाद अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी मीडिया में कहती हैं कि ‘‘विश्वविद्यालय स्वायत्त संस्था है। वे अपना फैसला खुद करते हैं। इसलिए इसमें एम.एच.आर.डी. की कोई गलती नहीं है।’’ पर इनको शर्म कहां, जो अपनी डिग्री के मामले में अब तक देश से झूठ बोलती आ रही हैं, वो रोहित की मौत पर सच कैसे बोल सकती हैं। तथ्य यह है कि उक्त पूरे मामले पर भाजपा के सांसद व श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री बंडारू दत्तात्रेय द्वारा 17 अगस्त 2015 को स्मृति ईरानी को एक पत्र लिखा गया था। इस पत्र में दत्तात्रेय लिखते हैं कि ‘‘ पिछले कुछ समय से हैदराबाद वि0वि0 जातिवादी, चरमपंथी और राष्ट्रविरोधी राजनीति का अड्डा बनता जा रहा है।’’ ए.एस.ए. पर इस राजनीति को करने और सुशील कुमार पर हुये मारपीट का हवाला देते हुए उन्होंने स्मृति ईरानी से अपने पत्र में इस पर ठोस कदम उठाने की मांग की थी। आपको याद होगा कि बिल्कुल इसी तरह का पत्र पिछले साल मद्रास आई.आई.टी. में अंबेडकर-पेरियार स्टडी सर्किल(ए.पी.एस.सी.) की शिकायत करते हुए एक अज्ञात व्यक्ति द्वारा एम.एच.आर.डी. को लिखा गया था। गनीमत है कि इस बार पत्र लिखने वाला व्यक्ति ज्ञात है- भाजपा के सांसद व श्रम व रोजगार राज्यमंत्री बंडारु दत्तात्रेय। शायद ही दत्तात्रेय या भाजपा के किसी मंत्री ने कालेजों में फीस बढ़ने, सीटें कम होने आदि समस्याओं पर स्मृति ईरानी को कभी कोई पत्र लिखा हो। शायद उन्हें भी मालूम हो कि स्मृति ईरानी ऐसे पत्रों को कूड़े के ढेर में डाल देती हैं। देश भर में शिक्षा से जुड़े सवालों पर चुप्पी साधे बैठी स्मृति ईरानी व उनका मंत्रालय इस ‘राष्ट्रविरोधी’ प्रकरण पर तुरंत ही सक्रिय हुआ और उसने दत्तात्रेय के पत्र के जवाब में वि0वि0 प्रशासन को सख्त कदम उठाने की हिदायद दी। एम.एच.आर.डी. इस मामले में कितनी गंभीर थी, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 3 सितम्बर से 19 नवंबर के बीच एम.एच.आर.डी. द्वारा हैदराबाद वि0वि0 प्रशासन को पांच पत्र लिखे गये ।इन सभी पत्रों में प्रशासन से एबीवीपी अध्यक्ष सुशील कुमार के साथ हुई ‘मारपीट’ पर कार्यवाही करने की बात की गयी थी। और अतंतः जांच समिति ने बिना ठोस सबूतों के पांचों छात्रों को निष्कासित करने का फैसला सुना दिया। ए.पी.एस.सी. के मामले में एम.एच.आर.डी. के पत्र ने संगठन को बैन करवा दिया था तो इस मामले में पत्र ने पांच छात्रों को निष्कासित करवा दिया। इस फैसले व निष्कासन का ही परिणाम था कि रोहित को ‘आत्महत्या’ करनी पड़ी। इन सबके बाद भी अगर कोई ये बोले कि इसमें एम.एच.आर.डी. की गलती नहीं है तो उसे बेशर्म ही कहा जा सकता है।
दरअसल रोहित की मौत ‘आत्महत्या’ नहीं बल्कि संघी गिरोह द्वारा की गयी हत्या है। ए.एस.ए. के पांच छात्रों को क्यों निकाला गया? क्योंकि वे दलित छात्रों को संगठित कर रहे थे। क्योंकि वे संघी तानाशाही के खिलाफ आवाज उठा रहे थे। ए.पी.एस.सी. पर बैन क्यों लगाया गया था? क्योंकि वे मोदी सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध कर रहे थे। बी.एच.यू से संदीप पाण्डेय को क्यों निकाला गया? क्योंकि वे छात्रों को तर्क करना सिखा रहे थे। कलबुर्गी की हत्या क्यों की गयी? क्योंकि वे हिन्दू धर्म की मध्ययुगीनता व पुरातनपंथी विचारों के खिलाफ लिख रहे थे। इन सब हत्याओं-निष्कासनों के पीछे संघी गिरोह शामिल है। जनता को स्पष्ट निर्देश दिया जा रहा है, हमारे राज में ‘सच बोलना व तर्क करना मना है’।
दरअसल रोहित की ‘आत्महत्या’ राजनीतिक मौत है। वो नहीं मरा होता अगर वह नहीं लड़ता। वो नहीं मरा होता, अगर उसने छात्रों को संघी आतंक के खिलाफ संगठित न किया होता। इसलिए ये ‘आत्महत्या’ राजनीतिक मौत है। जिसे हत्यारे ‘राजनीति न करें’ का टैग लगाकर छिपाना चाहते हैं।
रोहित की मौत पर हमारे दिलों में दुख होने के बजाय क्रोध की ज्वाला होनी चाहिये। क्रोध इस पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ जिसमें अल्पसंख्यकों, दलितों, महिलाओं व शोषितों-उत्पीड़ितों के साथ ऐसा ही क्रूर व्यवहार होता है। जनवाद व नागरिक आजादी के घोर विरोधी संघी गिरोह के खिलाफ मजदूर मेहनतकशों, छात्रों नौजवानों की फौलादी एकता वक्त की जरूरत है। ऐसी एकता जो संघियों को पालने वाली इस घृणित पूंजीवादी व्यवस्था का नाश कर समाजवाद की स्थापना कर सके। तभी रोहितों को न्याय मिल सकता है और केवल तभी सभी रोहितों को बचाया जा सकता है।

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