14 February 2016

जेएनयू को पुलिस छावनी में तब्दील किये जाने का विरोध करो!

      संघ मंडली के छद्म राष्ट्रवाद को बेनकाब करो!
        छात्रों पर लगाये देशद्रोह के मुकदमें वापस लो! 
साथियो,
        देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) आजकल पुलिस छावनी में तब्दील है। पुलिस द्वारा जेएनयू के मुख्य द्वार की नाकेबंदी कर परिसर एवं हाॅस्टलों में छात्र-छात्राओं के कमरों की तलाशी एवं गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी की जा रही है। पुलिस की कार्यवाही तथा मीडिया द्वारा इस तरह का माहौल बनाया जा रहा है कि मानो जेएनयू देश विरोध एवं देशद्रोहियों के अड्डे में तब्दील हो गया हो। कई मीडिया चैनल तो बाकायदा ‘ट्रायल’ बैठाकर जेएनयू के छात्रों को देशद्रोही का आरोपी घोषित कर सख्त सजा सुनाने पर आमादा हैं। ये मीडिया चैनल न्यायिक जांचों और न्यायालय से भी ‘ऊपर’ हो गये हैं।

        पुलिस की यह कार्यवाही 9 फरवरी को जेएनयू परिसर में कुछ छात्रों द्वारा अफजल गुरू की फांसी पर आयोजित होने वाले कार्यक्रम की अनुमति रद्द होने पर प्रदर्शन एवं कथित देश विरोधी नारेबाजी के बाद सामने आयी। संघ के अनुषांगिक संगठन एबीवीपी द्वारा आरोप लगाया गया कि छात्र राष्ट्रविरोधी नारेबाजी कर रहे थे तथा भाजपा सांसद महेश गिरी द्वारा ही इस मामले में छात्रों के खिलाफ देशद्रोह की धाराओं में एफआईआर दर्ज करायी गयी। संघ मंडली छात्रों की कार्यवाही को राष्ट्रविरोधी करार देकर उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग कर रही है। पुलिस द्वारा जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष को देशद्रोह में गिरफ्तार कर अन्य छात्रों की गिरफ्तारी को लेकर कैंपस व हाॅस्टल में दबिश दी जा रही है। सारे नियम-कानूनों को ताक पर रखकर पुरूष पुलिसकर्मी छात्राओं के हाॅस्टल व कमरों की भी तलाशी ले रहे हैं। 
        स्वयंभू ‘राष्ट्रवादी’ संघ मंडली का राष्ट्रवाद तब जगजाहिर हो जाता है, जब यह विदेशी लुटेरों का नतमस्तक हो स्वागत करते हैं। लुटेरों के सरगना बराक ओबामा को गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि बनाने व देश की संप्रभुता उनके हाथों में सौंपने पर, उन्हें राष्ट्रवाद नजर आता है। इतिहास में भारत को गुलाम बनाने की कोशिश करने वाले साम्राज्यवादी फ्रांस के राष्ट्रपति को गणतंत्र दिवस का मुख्य अतिथि बनाने व उसकी लुटेरी फौज की टुकड़ी को गणतंत्र दिवस की परेड में शामिल करने में इन्हें राष्ट्रवाद नजर आता है। इनके ही द्वारा ‘दुश्मन’ घोषित मुल्क पाकिस्तान के मुखिया की मां के चरण छू कर आशीर्वाद लेने वाले संघी प्रधानमंत्री के इस कारनामे में भी इन्हें राष्ट्रवाद नजर आता है। 
        दुनियाभर में राष्ट्रवादी आंदोलन की जमीन सामंतशाही से संघर्ष व विदेशी लुटेरी ताकतों से अपने देश को मुक्त कराने के संघर्ष से पैदा हुई। सामंतवाद के खिलाफ लड़ते हुए राष्ट्रों के निर्माण तथा कमजोर पिछड़े राष्ट्रों को औद्योगिक रूप से विकसित साम्राज्यवादी राष्ट्रों द्वारा गुलाम (उपनिवेश) बनाने पर मुक्ति संघर्षों में जनता की राष्ट्रवादी भावनाओं ने अभिव्यक्ति पायी।
        संघ मण्डली का ‘राष्ट्रवाद’ न तो सांमतवाद से संघर्ष में ही पैदा हुआ, न ही भारत को गुलाम बनाने वाले अंग्रेजो के खिलाफ संघर्ष में। मनुस्मृति को अपना आदर्श मानने वाले संघी सामंतकालीन पिछड़ी व पुरूषप्रधान मूल्य-मान्यताओं के पोषक हैं। अंग्रेजों के खिलाफ आजादी के संघर्ष में तो इनके नेता या तो मुखबिरी करते रहे या संघर्षरत जनता को धार्मिक आधार पर बांटने का काम करते रहे।
        दरअसल संघ मण्डली का छद्म राष्ट्रवाद पड़ोसी मुल्कों को धमकाने, उनके खिलाफ नफरत फैलाने व अंधराष्ट्रवाद भड़काने तक ही सीमित है। पिछड़ी मध्ययुगीन सामंती मूल्य-मान्यताओं व साम्राज्यवादी लुटेरी ताकतों के खिलाफ संघर्ष में इनका राष्ट्रवाद ‘षाष्टांग दण्डवत’ हो जाता है।आज इनका राष्ट्रवाद देशी-विदेशी पूंजीपतियों की सेवा तथा मेहनतकश जनता को धार्मिक आधार पर धुव्रीकरण करने तक सीमित है।
        संघ मण्डली मोदी व सुषमा स्वराज की पाकिस्तान यात्रा व विदेश सचिवों के स्तर की बैठकों को रिश्ते सुधारने की कवायद घोषित करती है, तो गायक गुलाम अली के कार्यक्रम व भारत-पाकिस्तान की क्रिकेट सिरीज का विरोध करते हैं। सुप्रीम कोर्ट में लंबित चल रहे राम मंदिर मसले पर आक्रामक प्रचार व ध्रुवीकरण को यह राष्ट्रवाद तथा रोजी-शिक्षा-रोजगार की मांग करने वालों को यह गद्दार व देशद्रोही कहने लगते हैं। सरकार के मंत्री व संघ मण्डली के कारकूनों द्वारा विपक्षी पार्टियों व विरोधियों के खिलाफ अनर्गल व अशोभनीय बयान भी इनके छद्म राष्ट्रवाद का ही हिस्सा हैं।
        जेएनयू प्रकरण पर इनकी सक्रियता व आक्रामकता दिखाती है कि यह राष्ट्रवाद व देशभक्ति के नाम पर सभी अधिकारों व कानूनों को ताक पर रखकर राष्ट्रवाद के स्वयंभू ठेकेदार बनना चाहते हैं। इनकी परिभाषा व विचारों से अलग हर विचार, संगठन व व्यक्ति इन्हें नमकहराम व देशद्रोही नजर आता है, जिसे यह पाकिस्तान भेजना चाहते हैं। जेएनयू हाॅस्टल में पुलिस के संग एबीवीपी कार्यकर्ताओं द्वारा दबिश व निशानदेही करना, जेएनयू प्रशासन द्वारा मामले की जांच को कमेटी बनाने व दोषियों को चिन्हित करने से पहले ही यह फैसला सुना रहे हैं। जेएनयू छात्र संघ अध्यक्ष को देशद्रोह के मामले में गिरफ्तार करना व परिसर को छावनी में तब्दील कर संघ मण्डली छात्रों में डर पैदा करना चाहती है। वह राष्ट्रविरोधी गतिविधियां संचालित होने का आरोप लगा जेएनयू की स्वायत्ता व प्रगतिशीलता को नष्ट कर उसे भी संघ की पाठशाला में तब्दील करना चाहती है।
        दोस्तो, छद्म राष्ट्रवाद की आड़ में संघ मण्डली द्वारा किये जा रहे यह कृत्य शिक्षण संस्थानों की स्वायत्ता खत्म करने, उनका गैरजनवादीकरण करने व भगवाकरण की मुहीम को आगे बढ़ाने का ही हिस्सा हैं। रोहित वेमुला को भी इन संघियों के द्वारा राष्ट्रद्रोही कहा गया। बाद में मामले में जांच से संघियों द्वारा लगायेे गये आरोप फर्जी साबित हुए लेकिन इस झूठे आरोपों की कीमत रोहित को जान देकर चुकानी पड़ी। रोहित वेमुला की ‘हत्या’ के मामले में चैतरफा घिरी संघ मण्डली इस मुद्दे पर काफी आक्रामक है। वह छात्रों व जनता को ध्रुवीकृत करने, अंधराष्ट्रवादी माहौल बनाने के हर मौके का फायदा उठा रही है।
        ऐसे मेें हम सभी प्रगतिशील, जनवादी, न्यायप्रिय छात्रोें व आम नागरिकों का भी दायित्व बनता है कि हम हक, इंसाफ व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में लामबन्द हों। संघ मण्डली के छद्म राष्ट्रवाद को बेनकाब कर वर्गीय लामबन्दी व वास्तविक राष्ट्रवाद कायम करें। शासकों को इसी दमन के कारण जेल में डाल दिये मशहूर शायर फैज अहमद फैज ने ठीक इसी हालात के लिए लिखा है-
             
             
            यूं ही हमेशा उलझती रही है जुल्म से खल्क
             न उनकी  रस्म नई है, न अपनी रीत नई
            यूं ही हमेशा खिलाये हैं हमने आग में फूल
            न उनकी हार नई है न अपनी जीत नई

                        क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
                 परिवर्तनकामी छात्र संगठन

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