भारतीय समाज जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रकरण के बाद दो विशाल शिविरों में बंट सा गया है। एक तरफ तथाकथित राष्ट्रवादी हैं तो दूसरी तरफ करोड़ों-करोड़ सामान्य जन। एक तरफ हैं वे जिनका राष्ट्रवाद निर्दोष विद्यार्थियों, शिक्षकों, पत्रकारों पर हमला करने से प्रतिष्ठा प्राप्त करता है। दूसरी तरफ वे लोग हैं जो कदम-कदम पर ऐसी ताकतों को चुनौतियां दे रहे हैं, जो भारत को हिन्दू फासीवाद की अंधी गली में धकेलना चाहते हैं।
21 February 2016
14 February 2016
जेएनयू को पुलिस छावनी में तब्दील किये जाने का विरोध करो!
संघ मंडली के छद्म राष्ट्रवाद को बेनकाब करो!
छात्रों पर लगाये देशद्रोह के मुकदमें वापस लो!
साथियो,
देश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शुमार जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) आजकल पुलिस छावनी में तब्दील है। पुलिस द्वारा जेएनयू के मुख्य द्वार की नाकेबंदी कर परिसर एवं हाॅस्टलों में छात्र-छात्राओं के कमरों की तलाशी एवं गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी की जा रही है। पुलिस की कार्यवाही तथा मीडिया द्वारा इस तरह का माहौल बनाया जा रहा है कि मानो जेएनयू देश विरोध एवं देशद्रोहियों के अड्डे में तब्दील हो गया हो। कई मीडिया चैनल तो बाकायदा ‘ट्रायल’ बैठाकर जेएनयू के छात्रों को देशद्रोही का आरोपी घोषित कर सख्त सजा सुनाने पर आमादा हैं। ये मीडिया चैनल न्यायिक जांचों और न्यायालय से भी ‘ऊपर’ हो गये हैं।
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