रोहित वेमुला की ‘हत्या’ के बाद एक बार फिर हैदराबाद विश्वविद्यालय में पुलीसिया कहर बरपा हुआ है। 24 छात्र, 2 शिक्षक व 1 पत्रकार जेल की सलाखों के पीछे हैं। वि.वि. के हाॅस्टल की लाइट, मेस बंद कर दिए गए हैं। छात्रों के एटीएम काम नही कर रहे हैं। हाॅस्टल में मेस बंद होने पर खुले में खाना बनाने के ‘अपराध’ में एक छात्र उदय भानू को पुलिस द्वारा इतनी बेरहमी से पीटा गया कि वो आई.सी.यू. में एडमिट है। वकील, समाजिक कार्यकर्ताओं आदि लोगों को वि.वि. में घुसने से रोक लगा दी गयी है तथा वि.वि. को अघोषित समय के लिए बंद कर दिया गया है।
दरअसल 22 मार्च को हैदराबाद विश्वविद्यालय के वी.सी. अप्पा राव 2 माह के अवकाश के बाद फिर से अपना पद ग्रहण कर रहे थे। 2 माह पूर्व अप्पा राव के कार्यकाल के दौरान ही वि.वि. के छात्र रोहित वेमुला ने ‘आत्महत्या’ कर ली थी। रोहित की ‘आत्महत्या’ के बाद पूरे देश में चले आंदोलन के चलते अप्पा राव व बीजेपी मंत्री दत्तात्रेय के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। साथ ही केंन्द्र सरकार ने मामले को ठण्डा करने के उद्देश्य से अप्पा राव को 2 माह के अवकाश पर भेज दिया था। 2 माह पूरा हाने पर वो फिर से अपना पद ग्रहण कर रहे थे जबकि अब तक उनके खिलाफ जांच चल रही है। ऐसे में हैदराबाद वि.वि. के छात्रों द्वारा 22 मार्च को अप्पा राव को फिर से वी.सी. बनाए जाने के विरोध में विरोध-प्रदर्शन आयोजित किया गया था जिस पर पुलिस ने जर्बदस्त लाठीचार्ज किया। छात्र-छात्राओं-शिक्षकों को दमन की सारी हदें पार करते हुए पीटते हुए थाने ले जाया गया। जिनमें से 27 लोग जेल के अंदर बंद हैं।
यह तस्वीर नयी नही है बल्कि मोदी सरकार के सत्ताशीन होने के बाद से देश के हर कोने में ये प्रक्रिया तेजी से दोहराई जा रही है। वो चाहे एफटीआईआई का मामला हो या फिर जेएनयू का हर जगह छात्रों की पीठ पर पुलिस द्वारा मोदी के ‘अच्छे दिनों’ की तस्वीर छापी जा रही है। अभी कुछ ही दिन हुए हैं जब शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी ने रोहित वेमुला को अपना बेटा कहते हुए संसद में विरोधियों को ललकारा था तो दूसरी तरफ संघी प्रधानमंत्री मोदी आंसू तक बहाने लग गए थे। ये आंसू इतने झूठे थे कि 2 माह तक भी अपनी लाज ना बचा सके। छात्रों पर पुलीसिया दमन के बाद भी मोदी सरकार की चुप्पी दिखाती है कि वो रोहित के हत्यारों व पुलिस दमन के साथ खड़े हैं।
दरअसल संघ के ‘हिन्दू राष्ट्र’ के रास्ते में हर वो व्यक्ति गुनाहगार है जो मानवता से प्रेम करता है, जो सवाल उठाता है और जो गलत के खिलाफ खड़ा होता है। संघ के तथाकथित हिन्दू राष्ट्र में दलितों, अल्पसंख्यकों की हत्या की जाएगी, मजदूरों-किसानों की खून की आखिरी बूंद को भी निचोड़कर अंबानी-अदानी जैसे पूंजीपतियों की तिजोंरिया भरी जाऐंगी। और जो कोई भी इन सबके खिलाफ आवाज उठाएगा उसे ‘देशद्रोही’ का तमगा लगाकर जेलों में ठूंस दिया जाएगा। आज संघ के फासीवादी मंसूबों का अगर कही से चुनौती मिल रही है तो वो देश के विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र हैं। जो लगातार संघ के जनता विरोधी चरित्र को बेनकाब कर रहे है। इसलिए भी आज सभी विश्वविद्याालयों पर संघी गिरोह व पुलिस का हमला तेजी से बढ़ा है।
भारी पुलिस दमन के बाद भी हैराबाद वि.वि. के छात्रों द्वारा न्याय के लिए जारी संघर्ष को परिवर्तनकामी छात्र संगठन अपना क्रांतिकारी सलाम पेश करता है साथ ही सरकार की शह पर किए जा रहे इस दमन की घोर निंदा करता है। पछास सभी न्यायप्रिय, मुक्तिकामी ताकतों से अपील करता है कि मोदी सरकार के फासीवादी मंसूबों का विरोध करते हुए आंदोलनरत छात्रों के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद करें।
हम मांग करते है कि-
हम मांग करते है कि-
1. गिरफ्तार छात्रों-शिक्षकों को तत्काल रिहा किया जाए।
2. छात्रों पर लाठीचार्ज करने वाली पुलिस को बर्खास्त किया जाए।
3. अप्पा राव को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाए।
4. स्मृति ईरानी व दत्तात्रेय इस्तीफा दो।
5. मोदी सरकार छात्र आंदोलनों का दमन बंद करो।

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