16 May 2016

जेएनयू से जादवपुर तक छात्र संघर्षरत

        शिक्षण संस्थानों को अपने फासीवादी हमले का निशाना बनाने की सरकारी मुहिम बदस्तूर जारी है। मोदी सरकार देश के उच्च शिक्षण संस्थानों को संघ की पाठशाला में तब्दील करने पर उतारू है। इसके लिए वह शिक्षण संस्थानों में छात्रों के जनवाद का गला घोंटने के साथ-साथ हर तरह की प्रगतिशीलता,वैज्ञानिकता,तर्कपरकता का कत्ल कर कूपमंडूकता का राज कायम करना चाहती है। इसकी शुरूआत उसने स्मृति ईरानी को मानव संसाधन विकास मंत्री बनाकर की। स्मृति ईरानी सत्ता में बैठने के बाद से ही एक-एक कर छात्रों पर संघी हमले बोलने का काम कर रही हैं।

        पिछले दिनों जेएनयू में छात्रों पर देश विरोधी नारों के बहाने से हमला बोला गया जिसमें छात्रों को पहले राजद्रोह के आरोप में जेल भेजा गया फिर जेएनयू के संघी कुलपति के जरिये छात्रों को जुर्माना, निलम्बन, निष्कासन सरीखे दण्ड दिला दिये गये। जेएनयू के 19 छात्र विभिन्न छात्र संगठनों के नेतृत्व में इस सजा के खिलाफ करीब 2 हफ्ते से आमरण अनशन पर बैठे हैं। जेएनयू के शिक्षक-आम छात्र सभी छात्रों के संघर्ष में साथ खड़े हैं। जगह-जगह पर छात्र जेएनयू के छात्रों के समर्थन में धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। 
        गत 10 मई को कुलपति ने एकेडमिक काउंसिल की बैठक रखी थी जिसमें शिक्षकों ने पहला मुद्दा छात्रों के आमरण अनशन का बनाने की मांग की जिसे अस्वीकारते हुए कुलपति जगदीश कुमार ने काउंसिल की बैठक रद्द कर दी और छात्रों के भारी विरोध के बीच बैठक स्थल छोड़ कर चले गये। इसके बाद एकेडमिक काउंसिल के बाकी सदस्यों ने एक प्रस्ताव पास कर जगदीश कुमार के यूं चले जाने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया व छात्रों पर की गयी अनुशासनात्मक कार्यवाही रद्द करने की मांग की। 
        जहां एक ओर जेएनयू के तमाम छात्र आमरण अनशन कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर संघी छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद भी आमरण अनशन कर सजा बढ़ाने व अपने खिलाफ जांच समिति की टिप्पणी रद्द करने की मांग कर रहा है।
        जेएनयू में देश विरोधी नारों की झूठी खबरें प्रसारित करने में 24 घण्टे जुटे पूंजीवादी न्यूज चैनल दो हफ्तों से चल रहे छात्रों के आमरण अनशन को कोई जगह नहीं दे रहे हैं। एकाध चैनल ही इसकी छिटपुट रिपोर्टिंग कर रहे हैं। दो हफ्तों के आमरण अनशन के दौरान कई छात्रों को हालत बिगड़ने पर अस्पताल में भी भर्ती कराया गया है। 
        टी वी चैनलों के साथ ही मोदी सरकार व उनकी मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी सबने जेएनयू के छात्रों के संघर्ष पर मौन साध रखा है। 
        जहां एक ओर जेएनयू के छात्रों का फासीवादी हमले के खिलाफ संघर्ष जारी है वहीं दूसरी ओर विद्यार्थी परिषद के जरिये संघी तत्वों ने अपने हमले का नया निशाना जादवपुर वि.वि. को बनाया है। 
        फर्क बस इतना है कि जहां जेएनयू में सरकारी इशारों, संघी इशारों पर नाचने वाले कुलपति सत्ताशीन हैं वहीं जादवपुर वि.वि. के कुलपति ने अभी संघ की मातहती स्वीकार नहीं की है। 
        जेएनयू के 9 फरवरी के प्रकरण के बाद जब जादवपुर वि.वि. में छात्रों ने प्रदर्शन कर जेएनयू के छात्रों का समर्थन किया था तब भी विद्यार्थी परिषद ने छात्रों पर देश विरोधी नारे लगाने का आरोप लगाया था जिसे कुलपति ने नकार दिया था। इस बार विवाद 6 मई को विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘बुद्धा इन ट्रेफिक जाम’ के प्रदर्शन से शुरू हुआ। विवेक अग्निहोत्री व अनुपम खेर के साथ विद्यार्थी परिषद ने फिल्म की स्क्रीनिंग खुले मैदान में की। इस दौरान वामपंथी संगठनों के साथ आम छात्रों ने विवेक अग्निहोत्री व अनुपम खेर के संघ समर्थन के खिलाफ काले झंडे दिखा नारेबाजी की। छात्रों ने फिल्म की स्क्रीनिंग में कोई खलल न डालए इसके जवाब में उसी दिन ‘मुजफ्फरनगर अभी बाकी है’ फिल्म के प्रदर्शन का एलान किया। अनुपम खेर व विवेक अग्निहोत्री का विरोध कर रहे छात्र-छात्राओं के साथ पत्रकारों तक से विद्यार्थी परिषद के लंपटों ने बदतमीजी की। छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार किया। बाद में विद्यार्थी परिषद के लोगों ने कुछ छात्रों को पीटा भी। इसके विरोध में कुलपति व छात्रों ने 3 विद्यार्थी परिषद के लोगों के खिलाफ तहरीर दी। खबर पर तुरंत सक्रियता दिखाते हुए स्थानीय भाजपा नेता रूपा गांगुली दल बल के साथ वि.वि. पहुंच गयी। 
        विद्यार्थी परिषद के लम्पटों के खिलाफ लगभग 2000 छात्रों ने 7 मई को प्रदर्शन कर छात्राओं से अभद्रता करने वालों पर कार्यवाही की मांग की। जवाब में 9 मई को विद्यार्थी परिषद ने भी प्रदर्शन की घोषणा कर दी। 
        इस तरह से जादवपुर वि.वि. संघी संगठनों के हमले का नया केन्द्र बन गया है। संघ के फासीवादी हमलों का छात्रों ने अभी तक करारा जवाब दिया है। जेएनयू व जादवपुर दोनों जगह के छात्रों के संघर्ष अभी जारी हैं। जरूरत इन संघर्षों को और व्यापक और धारदार बनाने की है। 

साभारः पाक्षिक अखबार ‘नागरिक’
Enagrik.com 
http://enagrik.com/news.php?n=1605160101

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