राजस्थान सरकार ने पाठ्य पुस्तकों को पूरी तरह बदलकर उन्हें संघी एजेण्डे के अनुरूप ढाल दिया है। ये बदली हुयी पाठ्य पुस्तकें अगले सत्र से लागू कर दी जाएगीं। पुस्तकें लिखने के लिए बनायी गयी 8 सदस्यी टीम के सामने वसुंधरा राजे सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि वे किताबें इस तरह से बनाए जिससे शिक्षा को भगवा रंग चढ़ाया जा सके। इससे पूर्व भी राजस्थान सरकार बड़े पैमाने पर शिक्षा के भगवाकरण की मुहिम में लगी हुयी थी। सूर्य नमस्कार से लेकर भगवद् गीता को स्कूलों में अनिवार्य किया जा चुका है। मोदी भक्ति में डूबी वसुंधरा सरकार ने मोदी को ही पाठ्यक्रम में शामिल कर दिया था। चैतरफा विरोध के बाद ही सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े।
मौजूदा बदलाव में उर्दू की जटिलता और विदेशी लेखकों की बात करते हुए कई लेखकों की कहानियों को किताबों से हटा दिया गया। इस्मत चुकताई की ‘कामचोर’, हरिशंकर परसाई की ‘बस की यात्रा’, वरिष्ठ पत्रकार पी साईनाथ की ‘जहां पहिया है’ को हटा दिया गया। इसके अतिरिक्त जाॅन बीट्स, थामस हार्डी, विलियम ब्लैके, टी. एस. इलियाॅट, एडवर्ड लेयर जैसे विश्व विख्यात लेखकों की रचनाओं को भी पाठ्यक्रम से हटा दिया गया है।
समाजिक विज्ञान की कक्षा 8 की किताब में जवाहर लाल नेहरू का जिक्र पूरी तरह से हटा दिया गया है। महात्मा गांधी, सुभाष चन्द्र बोस, भगत सिंह आदि के नामों के साथ सावरकर को भी महान देशभक्त के तौर पर चित्रित किया गया है। जिन सावरकर की मुख्य भूमिका हिन्दू महासभा बनाने और अंग्रेजों की स्वामी भक्ति की ही रही उन्हे ‘महान देशभक्त’ बताना राजे सरकार की भगवाकरण की साजिशों को उजागर करता है। संघी सरकार द्वारा बड़ी चालाकी से गांधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे का नाम किताबों से हटा दिया गया है।
सरकार में आने के बाद भाजपा तेजी से शिक्षा का भगवाकरण कर रही है। राजस्थान सरकार के उपरोक्त प्रयास इसी दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम है। जिसके तहत भाजपा सरकार पाठ्यपुस्तकों से प्रगतिशील लेखकों को हटाकर कूपमंडूकता भर रही है। बच्चों को उर्दू की जटिलता को बहाना बनाकर चुकताई, परसाई की कहानियों को हटा रही है। उर्दू तो सैकड़ों सालों से आम बोलचाल और साहित्य के साथ घुली-मिली भाषा है। इसके बरक्स संघी सरकार जो संस्कृत को थोप रही है, वह बच्चों का कही ज्यादा उत्पीड़न कर रही है।
पाठ्य पुस्तकों में इन बदलावों के जरिए सरकार संघ से जुड़े व्यक्तियों और अपनी विचारधारा को स्थापित कर रही है। इनके बारे में असत्य, अर्द्धसत्य बातों को प्रचारित कर यह एक तरह से इतिहास को ही बदल देना चाहती है।
राजस्थान ही नही गुजरात, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश आदि राज्यों में राज्य सरकारें इसी तरह के घृणित प्रयासों में लिप्त हैं। इन सब प्रयासों को केन्द्र की मोदी सरकार का आर्शिवाद प्राप्त है।

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