JNU लम्बे समय से चल रहे छात्र संघर्षो के कारण चर्चा में है। 9 फरवरी से शुरू हुआ संघर्ष आज भी जारी है। JNU के बहादुर छात्र साथियों द्वारा जो संघर्ष चलाया जा रहा है उसे देश-दुनिया के सभी इंसाफ पसंद छात्र अपना समर्थन दे रहे हैं।
हालिया संघर्ष JNU प्रशासन द्वारा छात्रों पर की गयी बदले की कार्यवाही का परिणाम है। JNU प्रशासन ने 9 फरवरी की घटना को लेकर 21 छात्रों को दोषी करार दिया है। इन 21 छात्रों में 2 पूर्व छात्र भी है। दोषी करार देते हुए छात्रों पर घोर दण्डात्मक कार्यवाही की गयी है। प्रशासन द्वारा पूरी तैयारी के साथ यह कार्यवाही परिक्षाओं से ठीक पहले की गयी है। यह तरीका कालेज प्रशासन की क्रूर मानसिकता को दिखाता है। दोषी ठहराए गए छात्रों में से एक, अर्निबान को तो एक साल पुराना मामला (मुजफफर नगर बाकी है फिल्म की स्क्रीनिंग) उठाकर दण्डित किया गया है।
JNU प्रशासन द्वारा 19 छात्रों पर कठोर दण्डात्मक कार्यवाही की गयी है जिसमें भारी आर्थिक दण्ड से लेकर हाॅस्टल से निकालना, सेमेस्टर निलंबन से लेकर सालों तक JNU से बाहर करना जैसे कठोर दण्ड भी शामिल हैं।
प्रशासन द्वारा JNU छात्रो पर की गयी उक्त कार्यवाही बदले की भावना से प्रेरित है। अब, जबकि कोर्ट में मुकदमा चल रहा है और मामले में सबसे बड़े सबूत बनाकर पेश किए गए अधिकांश वीडियो फर्जी निकले हैं। इसके बावजूद प्रशासन की कार्यवाही इस बात को बताती है कि कितनी तल्लीनता से JNU प्रशासन संघ मुख्यालय से मिले आदेशों को पूरा कर रहा है।
प्रशासन ने सोचा कि इस क्रूर दमन से डरकर छात्र शांत हो जाएगें लेकिन हुआ ठीक इसका उल्टा। छात्रों ने फिर से संघर्ष की राह पकड़ ली और 27 अप्रैल से अनिश्चित कालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। परिक्षाओं के बावजदू सभा में तमाम छात्र भागीदारी कर रहे हैं। छात्र ही नहीं तमाम शिक्षक भी आंदोलन से जुड़े हैं। यह भारी समर्थन उस धमकी के बावजूद है जिसमें कहा गया था कि जो भी इन दण्डित छात्रों का साथ देगा उस पर भी कार्यवाही की जाएगी।
आज जरूरत बनती है कि देश का प्रत्येक इंसाफ पसंद छात्र, संघर्षरत JNU के छात्रों के साथ खड़ा हो और षड्यंत्रकारी व RSS के इशारों पर काम करने वाले JNU प्रशासन के खिलाफ संघर्ष तेज करे।
हम मांग करते हैं कि-
छात्रों पर की गयी क्रूर दण्डात्मक कार्यवाही वापस ली जाए।
JNU के कुलपति को बर्खास्त किया जाए।

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