2 July 2016

सुब्रमण्यम कमेटी की सिफारिशों का विरोध करो

        सरकार द्वारा गठित सुब्रमण्यम कमेटी ने अपनी रिर्पोट सरकार को सौंप दी है। कमेटी ने कालेजों में छात्रों की राजनीतिक गतिविधियों, पहलकदमियों को रोकने के सुझाव पेश किए हैं। इसके लिए कमेटी ने सख्त तौर पर कहा है कि कालेजों में राजनीतिक गतिविधियां बंद होनी चाहिए। अधिक उम्र के छात्रों को हाॅस्टलों-कैम्पसों से बाहर करना चाहिए। कालेज में धर्म, जाति के आधार पर बने संगठनों पर पूर्ण पाबंदी होनी चाहिए। सुब्रमण्यम कमेटी की यह रिर्पोट सरकार की मंशा को साफ जाहिर कर देती है या ज्यादा सही कहे तो कमेटी ने वही सिफारिशें प्रस्तावित की हैं जो सरकार चाहती है तथा कई अर्थो में सरकार यह सब कह भी रही है।

        सरकार चाहे कांग्रेस की हो या भाजपा की दोनों ही छात्र राजनीति को कमजोर करना चाहती हैं। कालेज में सीमित जनवाद को खत्म कर प्रशासन व सरकार की तानाशाही लागू करना चाहती हैं। कांग्रेस शासन काल में लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को लागू किया गया जिसने छात्र-संघ को बेहद कमजोर कर दिया। भाजपा सरकार के गठन के बाद उसने छात्रों पर एक के बाद दूसरे हमले किये जिसका तीखा प्रतिकार छात्रों ने किया। जेएनयू, जाधवपुर, एचसीयू, एफटीआईआई आदि संस्थानों के छात्रों ने सरकार के खिलाफ तीखा संघर्ष किया। फासीवादी संघी इन संघर्षो से बौखला गए हैं। इसलिए भी ये छात्रों के जनवादी अधिकारों को और भी कुंद करना चाहते हैं ताकि ये अपनी छात्र विरोधी नीतियों को, शिक्षा के भगवाकरण और छद्म राष्ट्रवादी विचारों को बिना अवरोध के लागू कर सके।
        छात्रों पर हो रहे इस हमले-षड्यंत्र का छात्र समुदाय को अवश्य जवाब देना होगा। हर दौर में उसने जवाब दिया भी है। निश्चित ही यह जवाब पूंजीवाद के बरक्स समाजवाद के लिए संघर्ष ही होगा। जिस दिशा में आज भारत के छात्र-नौजवानों को बढ़ने की जरूरत है।   

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