मैक्सिको के बर्बर शासकों ने किया 9 शिक्षकों का कत्ल
19 जून को मैक्सिको सरकार ने ओक्साका प्रांत में 500 हड़ताली शिक्षकों व उनके समर्थकों पर अंधाधुंध गोलियां चलाकर 9 शिक्षकों की हत्या कर दी तथा दर्जनों को घायल कर दिया। ये शिक्षक लंबे समय से जनविरोधी ‘शैक्षिक सुधारों’ के खिलाफ संघर्षरत थे और विरोध की इसी कड़ी में उन्होने सड़क जाम कर दी थी। जिसका खूनी दमन मैक्सिको पुलिस द्वारा बिना किसी चेतावनी के अंधाधुंध गोलीबारी कर के किया गया। मरने वालों व घायलों में ज्यादातर युवा हैं। परिवर्तनकामी छात्र संगठन शिक्षकों की नृशंस हत्या का विरोध करते हुए शहीद शिक्षकों को श्रृद्धांजली अर्पित करता है।
मैक्सिको सरकार अमेरिकी साम्राज्यवादियों के दवाब व देशी पूंजीपति वर्ग के हित में ‘शैक्षिक सुधार’ करना चाहती है। इस ‘शैक्षिक सुधार’ का मकसद शिक्षा का निजीकरण करना, शिक्षकों को रखने व उनका मूल्यांकन करने की तानाशाहीपूर्ण पद्धति को थोपना है। मैक्सिको सरकार इसके जरिये शिक्षा को पूंजीपतियों के हाथों में सौंपना चाहती है तथा शिक्षकों की मनमानी छंटनी करना चाहती है।
मैक्सिको पैक्ट नामक इस ‘शैक्षिक सुधार’ का पूरे ही मैक्सिको में विरोध हो रहा है। हत्याकाण्ड से पूर्व पुलिस कई शिक्षक नेताओं को गिरफ्तार कर चुकी थी। लेकिन जब गिरफ्तारी के बाद भी विरोध नही रूका तो राष्ट्रपति एनरिक पेना नीटो ने खूनी दमन का सहारा लिया। इससे पूर्व 2014 में 43 टेªनी शिक्षकों की हत्या करवा दी गयी थी। इस हत्याकाण्ड की जांच भी बिना किसी परिणाम के सरकार द्वारा रोक दी गयी थी। ये शिक्षक भी सरकार की शिक्षा व रोजगार विरोधी नीतियों का विरोध कर रहे थे।
लेकिन 19 जून के इस खूनी दमन के बाद राज्य दमन व ‘शैक्षिक सुधारों’ का विरोध और व्यापक हो गया। हजारों की संख्या में मजदूर, किसान व युवा मारे गए शिक्षकों की शवयात्रा में शामिल हुए। कई जगहों पर पुलिस दमन रोकने हेतु स्थानीय जनता ने पुनः बेरीकेड खड़े कर दिए। 21 जून को डाॅक्टरों व नर्सो ने शिक्षकों के समर्थन में तथा शिक्षा व स्वास्थ्य के निजीकरण के विरोध में हड़ताल कर दी। छात्रों ने शिक्षकों का समर्थन करते हुए अपनी कक्षाओं का बहिष्कार किया। ओक्साका प्रांत के 2 उच्च अधिकारीयों ने हत्याकाण्ड का विरोध करते हुए अपने पद से इस्तिफा दे दिया।
‘शैक्षिक सुधारों’ के जरिए सरकारी खर्च में कटौती की यह परिघटना विश्वव्यापी है। 2008 से शुरू हुए आर्थिक संकट के बाद सरकारें नित नए सुधारों को लागू कर रही हैं। लेकिन इनका विरोध भी विश्वव्यापी है। मैक्सिको, अमेरिका, फ्रांस, ब्राजील, कनाडा आदि देशों में ‘शैक्षिक सुधारों’ व कटौती कार्यक्रमों का छात्रों, शिक्षकों, मजदूरों आदि ने तीखा विरोध किया है और कर रहे हैं। मैक्सिको के शिक्षकों का संघर्ष इसी की एक मजबूत कड़ी है।


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