14 November 2016

ये ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ काले धन के खिलाफ नहीं, देश की मेहनतकश जनता के खिलाफ है

साथियों,
        आजकल नोटबंदी की मोदी सरकार की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ ने हम पर हमला बोल रखा है। अपनी कड़ी मेहनत से दो वक्त की रोटी का इंतजाम करने वाला देश का हर इंसान आज हैरान परेशान है। सरकार ने एक झटके में हमारी मेहनत की कमाई छीन ली है। हम घंटों लाइनों में खडे़ होने को मजबूर हैं। कईयों के घर तय शादी-ब्याह पर खतरा मंडराने लगा है तो किसी का बच्चा अस्पताल में इलाज न मिलने से मर जा रहा है। किसानों की फसल बुवाई खतरे में पड़ गयी है तो ढेरों लोगों की तनख्वाहें रुक गयी है। दिहाड़ी मजदूरों का काम छिन गया है तो बाजार में दुकानों पर सन्नाटा पसर गया है। कई लोग मौत को गले लगा चुके हैं।

        मोदी सरकार देश की आम जनता के किस कदर खिलाफ हैं, यह इस एक निर्णय ने सबके सामने ला दिया। नये नोटों को बगैर बैंकों में पहुंचाये, बगैर यह तैयारी किये कि नये नोट एटीएम मशीन में काम कैसे करेंगे मोदी सरकार ने अपना तुगलकी फरमान जारी कर दिया। नये नोटों में स्वच्छता अभियान को भी चस्पा कर दिया गया है पर मोदी गांधी की जगह अपनी फोटो लगाने की हिम्मत नहीं कर पाये। हो सकता है कि अगली ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ में यह भी हो जाये।
        जनता को हैरान परेशान करने के साथ मोदी सरकार दावा कर रही है कि यह हमला काले धन के खिलाफ है, दावा किया जा रहा है कि इससे सारा काला धन खत्म हो जायेगा। मोदी सरकार की यह बात सफेद झूठ है।
        आज हर कोई जानता है कि देश में काले धन के सबसे बड़े खिलाड़ी अम्बानी-अडाणी सरीखे कारपोरेट घराने हैं। इन सारे कारपोरेट घरानों, इनके द्वारा नियंत्रित मीडिया चैनलों, ने मोदी सरकार की इस घोषणा का स्वागत किया है। जाहिर है नोट बंदी की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ काले धन के इन बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ नहीं है। ये काला धन नोटों के रूप में जेब में लेकर नहीं चलते इनके तौर-तरीके दूसरे हैं। विदेशी बैंकों से लेकर विदेश की कम्पनियों में, फर्जी कम्पनियों की फर्जी बैलेंस शीटों में, सोना-चांदी के जखीरों से लेकर रीयल इस्टेट, शेयर बाजार से लेकर सट्टा बाजार तक इनका काला धन लगा हुआ है। वैसे भी मोदी सरकार काले धन के इन सबसे बड़े खिलाड़ियों के खिलाफ कुछ नहीं कर सकती। ये देश के असली मालिक-शासक हैं। सरकारें इनकी जेबों में रहती हैं। मोदी को चुनाव लड़ाने के लिए इन्हीं से मिला 30-40 हजार करोड़ रुपये का काला धन पानी की तरह बहाया गया। इन्हीं के टीवी चैनल दिन-रात ‘हर-हर मोदी’ करते रहे। काले घन के सबसे बड़े मालिकों के आशीर्वाद से बनी मोदी सरकार अपने आकाओं के खिलाफ नहीं जा सकती है। इसीलिए इस सर्जिकल स्ट्राइक से काले धन के बड़े खिलाड़ियों का बाल भी बांका नहीं होगा।
        काले धन के इनसे कुछ छोटे दूसरे नम्बर के खिलाड़ी इस देश के नौकरशाह-नेता-व्यापारी हैं। इनके पास भी करोड़ों रुपया काले धन के रूप में मौजूद है। पर इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से ये भी थोड़ी मेहनत से बच निकलेंगे। इनका भी अधिकतर काला धन सोना-चांदी, रीयल स्टेट आदि में निवेशित है। जो नोटों के रूप में मौजूद भी है वो बड़ी आसानी से सोना-चांदी से लेकर अन्य सम्पत्ति में बदल डालेंगे। सोने की बढ़ती कीमत दिखा रही है कि यह गोरखधंधा चालू हो चुका है। बची-खुची कसर ये गरीबों के जन धन खातों के जरिये नोट बदलवा कर पूरी कर लेंगे। यानि ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ काले धन के दूसरे नम्बर के खिलाड़ियों के खिलाफ भी नहीं है।
        इस ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से अगर किसी के खिलाफ कुछ कार्यवाही होगी तो वो है मध्यम वर्ग-छोटे दुकानदार, सरकारी कर्मचारी यानि जनता के वे हिस्से जो ढाई लाख से कुछ अधिक रकम जमा कर मामूली टैक्स चोरी करते हैं। इन्हीं को पकड़ने में मोदी सरकार कुछ कामयाब हो सकती है। इनके जरिये कुछ आयकर बढ़ सकता है। इसके साथ-साथ यह ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ देश के करोड़ों मेहनत करने वाली बेहद गरीबी में जीने वाली मजदूर-किसान, छात्रों-नौजवानों-महिलाओं के खिलाफ है जो कोई टैक्स चोरी नहीं करते पर फिर भी जिनकी कमाई को छीन मोदी सरकार ने जिन्हें सबसे ज्यादा हैरान परेशान कर दिया है। स्पष्ट है कि मोदी सरकार करोड़ों मेहनतकश जनता पर हमला बोल उसे इस झूठे झांसे में डालने की कोशिश कर रही है कि सरकार काले धन के खिलाफ कुछ कर रही है। इस झांसे के चलते ही ढेरों लोग अभी भी भारी परेशानी के बावजूद मोदी सरकार की तारीफ कर रहे हैं। शीघ्र ही जनता यह समझ जायेगी कि वास्तव में ये ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ उसी के खिलाफ है कि मोदी सरकार अगर कुछ कर रही है तो वो केवल जनता को परेशान करने का काम कर रही है।
        जहां तक काले धन, गोरे धन के अंतर का सवाल है तो वो यह कि वह धन जिस पर कर नहीं दिया जाता वो काला धन है। पर यह भी सच्चाई है कि एक स्तर से अधिक धन चाहे गोरा हो या काला अगर कहीं भी इकट्ठा होता है तो वह मजदूरों-मेहनतकशों की मेहनत की कमाई हड़प कर ही हो सकता है। यह भी सच्चाई है कि पूंजी अपनी बढ़त के लिए सारी लूट, झूठ-फरेब, मक्कारी का सहारा लेती है। वह किसी भी कानून को तोड़ने मे नहीं हिचकती तो भला वह कर चोरी क्यों नहीं करेगी? पूंजी को उसके इस कारनामे से दुनिया की कोई सरकार -कोई कानून -कोई ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ इस पूंजीवादी व्यवस्था को नहीं रोक सकती। इसके साथ ही चूंकि बड़ी पूंजी पूरी दुनिया के पैमाने पर लगी हुई है इसीलिए उस पर कोई भी नियंत्रण वैश्विक स्तर पर ही हो सकता है एक देश की सरकार उसको नियंत्रित नहीं कर सकती। ये सारी बातें दिखाती हैं कि काले धन, भ्रष्टाचार को इस पंूजीवादी व्यवस्था में कोई सरकार चाह कर भी खत्म नहीं कर सकती। मोदी सरकार की तो ये चाहत भी नहीं है। काले धन को पूंजीवादी व्यवस्था के नाश और समस्त पंूजी, समस्त उत्पादन साधनों को अपने मजदूरों-मेहनतकशों के राज्य के हाथों में केन्द्रित कर समाजवाद ही खत्म कर सकता है।
        इसीलिए नोटबंदी सरीखे तरीके भारत में मोरारजी देसाई की सरकार से लेकर दुनिया की तमाम पूंजीवादी सरकारें अपना चुकी हैं पर इससे कालेधन की बढ़त पर कोई रोक नहीं लगी। आज अमेरिका-यूरोप से लेकर पूरी दुनिया का कोई पूंजीवादी देश ऐसा नहीं है जहां काला धन न फल फूल रहा हो। यह सब यही दिखलाता है कि मोदी सरकार का यह तुगलकी फरमान काले धन का बाल भी बांका नहीं करेगा।
        दरअसल इस सारी कवायद से सरकार जमा करके रखी गयी ‘काली मुद्रा’ (जो कि काला धन का हिस्सा है) बाहर निकलवाना चाहती है, नकली मुद्रा पर लगाम कसना चाहती है। यह एक खुला सच है कि जाली मुद्रा के प्रचलन के पीछे पूंजीवादी सरकारें ही प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर जिम्मेदार हैं। पड़ोसी देश जिनके बीच दुश्मनाना सम्बंध होते हैं, वे एक दूसरे को नुकसान पहुंचाने के लिए जाली मुद्रा छापते रहते हैं। काले धन पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ से लेकर ‘कैशलैस इकाॅनामी’ (सारा लेन देन क्रेडिट-डेबिट कार्ड नैट बैंकिग, पे-टीएम आदि से) को बढ़ावा देकर वह अपनी कर वसूली बढ़ाना चाहती है। एक ओर सरकारी धन अम्बानी-अडानी सरीखों को भांति भांति के तरीकों से जुटाया जा रहा है फिर कर संग्रह को बढ़ाने के लिए ये सब कवायदें की जा रही हैं ताकि पूंजीपतियों पर और पैसा लुटाया जा सके। 2000 का नोट जारी कर सरकार मुद्रा जमाखोरी को बढ़ावा ही दे रही है।
        जाहिर है मोदी सरकार की यह सर्जिकल स्ट्राइक मेहनतकश जनता के खिलाफ है। काले धन के खात्मे से इसका कुछ लेना-देना नहीं है। जनता को तंग करना और जनता की कमाई को बैंकों के पास पहुंचा उसके धंधे को बढ़ाना ही इसका मकसद है। इसीलिए अपने खिलाफ की गयी इस सर्जिकल स्टाइक के खिलाफ एकजुट होना जरूरी है।
        हम सभी संगठन सभी मेहनतकश-मजदूरों-किसानों-छात्रों-नौजवानों-महिलाओं का आह्वान करते हैं कि मोदी सरकार द्वारा जनता के खिलाफ बोले गये इस हमले के खिलाफ एकजुट हों। और लूट, अन्याय, शोषण, भ्रष्टाचार पर टिकी पूंजीवादी व्यवस्था को बदलने की लड़ाई में आगे आयें।

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