दो दिवसीय सम्मेलन की शुरुआत 6 अक्टूबर प्रातः 8:30 बजे झण्डा रोहण से हुयी। झण्डारोहण के बाद ‘यूथ इण्टरनेशनल’ गाया गया। इसके बाद दुनियाभर में पूंजीवाद के खिलाफ संघर्ष में शहीद हुए लोगों को दो मिनट को मौन रख श्रृद्धांजली दी गयी।
सम्मेलन के औपचारिक सत्र की शुरुआत कमलेश के अध्यक्षीय भाषण से हुयी। कमलेश ने अपनी बात में कहा कि आज दुनिया की अर्थव्यवस्था आर्थिक संकट के हालातों से गुजर रही है। ऐसे में शासकों के पास इसका कोई हल नहीं है। इस संकट ने विकसित साम्राज्यवादी देशों के अंदर भी परेशानियों को बढ़ा दिया है और खुद विकसित देश भी अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर लड़ रहे हैं। कहीं व्यापार युद्ध तो कहीं सैन्य युद्ध किये जा रहे हैं। इस संकट में दुनियाभर के शासकोें ने फासीवादी शक्तियों को आगे बढ़ाया है। इन शक्तियों ने जनता के बीच जातीय-नस्लीय भेदभाव, अल्पसंख्यकों या प्रवासियों के प्रति घृणा, महिलाओं पर बंदिशें, अंधराष्ट्रवाद, सेना को सवालों से परे घोषित करना, आदि जैसी प्रवृत्तियों को बढ़ाया है। तमाम कटौती कार्यक्रमों व जनविरोधी कदमों के खिलाफ मेहनतकश जनता ने संघर्ष भी किये हैं। इन संघर्षों में छात्रों-नौजवानों ने भी बढ़-चढ़कर भूमिका निभाई है।
राष्ट्रीय परिस्थितियों पर बात रखते हुए पछास के साथी चंदन ने कहा कि चार साल पहले पूंजीपतियों के अपार सहयोग से सत्ता में काबिज मोदी सरकार ने इन वर्षो में अडानी-अंबानी जैसे पूंजीपतियों को ही आगे बढ़ाया है। जी.एस.टी., बढ़ती मंहगाई, शिक्षा-स्वास्थय जैसे मदों में कटौती के जरिए सरकार ने पहले से ही खस्ताहाल जनता की जिंदगी को और रसातल में पहुंचा दिया है। अपनी तबाह होती जिंदगी के खिलाफ संघर्ष कर रही जनता पर एक तरफ सरकार ने दमन तेज किया है तो दूसरी तरफ देश में साम्प्रदायिक जहर घोलकर जनता को आपस में बांटा जा रहा है। इस सबका ही परिणाम है कि पिछले 4 सालों में देश में मजदूरों, किसानों, छात्रों, मुस्लिमों, दलितों, आदिवासियों, महिलाओं पर हमले तेज हुए है। उन्होने अंत में जोर देते हुए कहा कि देश के सभी मेहनतकशों को एकजुट होकर इन फासीवादी ताकतों के खिलाफ और इन्हें पैदा करने वाली मौजूदा पूंजीवादी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करना होगा। तभी उन्हे मुक्ति मिल सकती है। इन सभी संघर्षो में पछास अपनी पूरी ताकत के साथ खड़ा रहेगा।
पिछले तीन सालों में शिक्षा व छात्र-नौजवानों की स्थिति पर बात रखते हुए पछास के दीपक ने कहा कि मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही छात्रों-नौजवानों पर चैतरफा हमला बोल दिया जो आज तक जारी है। एक तरफ शिक्षा के भगवाकरण के जरिए ये सरकार छात्रों के दिमागों में अपनी फासीवादी राजनीति को प्रचारित-प्रसारित कर रही है तो दूसरी तरफ तेजी के साथ उच्च शिक्षा संस्थानों को निजीकरण की दिशा में धकेल रही है। यूजीसी की जगह पर एचईसीआई, शिक्षा बजट में कटौती, हेफा का गठन करके सरकार शिक्षा को पूंजीपतियों को बेचना चाहती है। इन सबका सबसे अधिक खामियाजा गरीब-निम्न वर्ग से आने छात्रों को उठाना पड़ रहा है।
वहीं दूसरी और मोदी काल में बेरोजगारी अपने चरम पर है। पिछले चार साल सबसे कम रोजगार पैदा करने वाले साल रहे हैं। ये सरकार छात्रों को बेरोजगार बनाने वाली नीतियों को तेजी से आगे बढ़ा रही है। इन सबके खिलाफ विरोध करने वाले छात्रों-नौजवानों की आवाजों को दबाने के लिए उन्हें देशद्रोही घोषित कर उन पर हमला किया जा रहा है। पिछले 4 सालों में जेएनयू, डीयू, एचसीयू, इलाहबाद समेत लगभग सभी विश्वविद्यालयों को इस सरकार द्वारा देशद्रोही करार दिया जा चुका है। पछास का 10वां सम्मेलन मोदी सरकार की शिक्षा को बेचने की सभी नीतियों का पुरजोर विरोध करते हुए इसके खिलाफ संघर्ष कर रहे सभी छात्रों के साथ अपनी एकुजटता जाहीर करता है।
अगले दिन 7 अक्टूबर को खुले सत्र का आयोजन किया गया। सम्मेलन ने संगठन के नए अध्यक्ष, महासचिव के साथ-साथ नए नेतृत्व का चुनाव किया। कमलेश को संगठन का अध्यक्ष और महेन्द्र को महासचिव चुना गया। सम्मेलन में छह प्रस्ताव पास किए गए। इसके बाद पूरे शहर में जोश-खरोश के साथ नारे लगाते हुए जुलूस निकाला गया।
खुले सत्र में पंतनगर सिडकुल के इंटर्राक मजदूर संगठन से सौरभ, आॅटोलाइन इम्पलाइज यूनियन से अनिल, ठेका मजदूर कल्याण समिति से मनोज, ब्रिटानिया श्रमिक संघ के गणेश मेहरा, ऐमिनेंट मजदूर संगठन के हेम नेगी, डेल्टा श्रमिक संगठन रामनगर से हिमांशु कुमार, काशीपुर से रिचा श्रमिक संगठन से सुरेश शर्मा, किच्छा से इंटर्राक मजदूर संगठन से राकेश कुमार, दिनेशपुर से विजय सिंह व पत्रिका ‘प्रेरणा अंशु’ से रुपेश कुमार, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र की महासचिव रजनी, क्रांतिकारी लोकअधिकार संगठन के अध्यक्ष पी.पी.आर्या, इंकलाबी मजदूर केन्द्र के महासचिव खीमानन्द ने अपनी बात रखी। सभी ने पछास के दसवें सम्मेलन के सफल आयोजन की बधाई दी। नये नेतृत्व को मौजूदा चुनौतियों से जूझते हुए संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने के लिए क्रांतिकारी अभिवादन किया। प्रगतिशील सांस्कृतिक मंच के साथियों ने क्रांतिकारी गीतों को भी प्रस्तुत किया।
खुले सत्र के बाद सुशीला तिवारी अस्पताल से रोडवेज स्टेशन से मंगल पड़ाव से होते हुए ओमकार हाॅल में परिवर्तनकामी छात्र संगठन ने जुलूस का समापन किया।
द्वारा
कमलेश
अध्यक्ष
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)









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