NIT श्रीनगर के छात्र अपनी न्यायपूर्ण मांगों के लिए बीते 4 अक्टूबर से आंदोलनरत है। आंदोलन की अगली कड़ी में मांगे न माने जाने तक सभी 950 छात्रों ने 24 अक्टूबर से कैम्पस को छोड़ने का निर्णय लिया है। इनमें से अधिकांश छात्र कैम्पस छोड़़ कर जा चुके हैं और बाकी जाने की तैयारी कर रहे हैं। छात्रों की न्यायपूर्ण मांगों को मानने के बजाए प्रशासन उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश कर रहा है। परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास) संघर्षरत छात्रों के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित करते हुए प्रशासन से यथाशीघ्र छात्रों की मांग मानने की अपील करता है।
NIT संस्थान 2010 में श्रीनगर में चालू किया गया। तब से 8 साल बीत जाने के बाद भी संस्थान के पास अपनी कोई बील्डिंग नही है। तभी से इसे पाॅल्टेक्निक श्रीनगर की बील्डिंग में ही चलाया जा रहा है। सरकार द्वारा कैम्पस के लिए मौजूदा जगह से 15 किमी. दूर सुमारी में जमीन आवंटित कर दी गयी है। परंतु भूकंप के लिए संवेदनशील होने के चलते अब तक वहां काम शुरू नही किया गया है। सालों से छात्र किसी अन्य जगह पर भूमि आवंटित कर कैमपस चलाने की मांग शासन-प्रशासन से करते रहे हैं परंतु बहरा प्रशासन छात्रों की मांग पर चुप्पी साधे बैठा रहा।
पिछले साल छात्रों ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए एक बड़ा प्रदर्शन अपनी मांगों के लिए किया था, परंतु तब भी छात्रों की आवाज को नही सुना गया। उल्टा एमएचआरडी ने बिल्डिंग न होने का बहाना बनाकर संस्थान की 50 प्रतिशत सीटें कम कर दी।
संस्थान को पाॅलीटेक्निक में जिस जगह पर चलाया जा रहा है। वहां बेसिक संसाधनों का भी भाव है। तीसरे और चैथे साल के छात्रों को कैम्पस से बाहर शहर में स्थित हाॅस्टल में रहना पड़ता है और रोज 8 किमी की दूरी तय करके पढ़ने आना पड़ता है। पहले और दूसरे वर्ष के छात्र कैम्पस में ही रहते है। जहां 10x8 के कमरों में 6-6 छात्रों को रहना पड़ता है। 50 छात्रों के लिए मात्र एक शौचालय है। इसके अलावा लाइब्रेरी, प्रयोगशाला आदि की स्थिति भी राम भरोसे ही है।
मौजूदा संस्थान NH-58 के पास ही स्थित है। जिससे कई बार छात्रों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। कई दफा गाड़ियों से टकराकर कई छात्रों को चोटें भी आती रही है। इस वर्ष अक्टूबर में 2 छात्राओं का भयंकर एक्सीडेंट हुआ, जिसके बाद से एक छात्रा अभी भी एम्स में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है। इस घटना ने छात्रों के सालों से छुपे गुस्से को एक बार फिर सतह पर ला दिया और तभी से छात्र आवश्यक संसाधनों के साथ कैम्प्स को सुरक्षित जगह खोलने की मांग करते हुए आंदोलनरत हैं।
छात्रों के बार-बार मांग करने के बाद भी उत्तराखण्ड के शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत बोलते हैं के उन्हें अब तक कुछ पता ही नही था। ये हमारी सरकारों का हम छात्रों के प्रति रूख है। आज जब सभी सरकारें हम छात्रों की बेसिक मांगों पर भी आंख मूंद कर बैठी हैं तो ऐसे में हम छात्रों के पास महज एक ही रास्ता बनता है कि हम अपनी फौलादी एकता से इन सरकारों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दे।
NIT श्रीनगर के छात्रों का साथ दो!
इंकलाब जिंदाबाद!!
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)


No comments:
Post a Comment