28 November 2018

संघर्षरत किसानों से दो बातें .......

किसान-मजदूर-छात्र एकता जिंदाबाद ! 

(29-30 नवंबर को देशभर से हजारों किसान अपनी न्यायपूर्ण मांगों के लिए दिल्ली की सड़कों पर अपनी दस्तक देने आ रहे हैं। पछास किसानों के आंदोलन के साथ अपनी पूर्ण एकजुटता जाहिर करता है। इस मौके पर आंदोलन को समर्थन देते हुए ‘इंकलाबी मजदूर केन्द्र’ द्वारा एक पर्चा जारी किया गया है। हम इस पर्चे से सहमति जाहिर करते हुए आप सभी साथियों तक इसे पहुंचा रहे हैं।)       

साथियो देश भर में किसान अपनी न्यायोचित्त मांगों को लेकर जुझारू संघर्ष कर रहे हैं। संघर्षरत किसानों ने जहां सत्ताधारियों को चैन की नींद नहीं लेने दिया है तो वहीं मजदूर-मेहनतकश जनता में नया जोश भरा है। सत्ता के लगातार दमन-उत्पीड़न के बावजूद किसानों का प्रतिरोध संघर्ष जारी है। इसी कड़ी में 29-30 नवंबर को दिल्ली में किसान मुक्ति मार्च का आयोजन किया गया है। किसान मुक्ति मार्च के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए एवं किसान भाइयों की न्यायोचित मांगों का समर्थन करते हुए हम मौजूदा कृषि संकट पर कुछ बातें विचार हेतु रखना चाहते हैं। 

4 November 2018

डीयू में कांचा इलैया की किताबों पर रोक लगाए जाने का विरोध करो !

शिक्षा पर संघी गिरोह द्वारा किए जा रहे हमलों के खिलाफ एकजुट हो !!


        डीयू में ‘दिल्ली यूनिवर्सिटी स्टैंडिंग कमेटी आॅन अकैडमिक मैटर्स’ ने दलित चिंतक कांचा इलैया द्वारा लीखित ‘गाॅड ऐज पाॅलिटिकल फिलाॅसफर’, वाय आइ एम नाॅट हिंदू, ‘पोस्ट हिंदू इंडिया’, नंदिनी सुंदर द्वारा लिखित ‘बर्निंग बस्तर’ और क्रिस्टोफर जैफरलाॅट की ‘द मिलिशियाज आॅफ हिंदुत्व’ जैसी किताबों को एम.ए. राजनीतिक विज्ञान के पाठ्यक्रम से हटाने का सुझाव दिया है। यही नही डीयू के पाठ्यक्रम में कहीं भी ‘दलित’ शब्द का उपयोग करने पर भी आपत्ति जताते हुए ‘स्टेंडिंग कमेटी’ द्वारा इसे न प्रयोग करने का सुझाव दिया गया है। ये दोनों सुझाव एकेडमिक काउंसिल को भेजे गए हैं। वहां से फैसला आने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा।