यह कोई हादसा नहीं हत्याएं हैं !! सत्ता धारियों को जवाब देना होगा !!
परिवर्तनकामी छात्र संगठन 24 मई को सूरत में अग्निकांड में मारे गए छात्र-छात्राओं को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। दुख की इस घड़ी में परिवर्तनकामी छात्र संगठन शोकाकुल परिवार जनों के साथ है।
ज्ञात हो कि 24 मई को एक कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से 23 छात्र-छात्राओं की मौत हो गई। यह कोचिंग सेंटर एक 4 मंजिला इमारत की छत पर चलाया जा रहा था। यह कोचिंग सेंटर छत को कवर करके चलाया जा रहा था। और आग से बचाव के भी वहां कोई साधन न थे।
आग लगने के बाद त्राहि-त्राहि करते छात्र इधर-उधर भागे। कुछ ने अपनी जान बचाने को छत से छलांग लगा दी। इस प्रकार शासन-प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण छात्र-छात्राएं मौत की नींद सुला दिये गये। शासन-प्रशासन और पूरा तंत्र इसे दुर्घटना घोषित करने पर तुला हुआ है। एक मृतक छात्र के भाई ने कहाँ "मेरे भाई की मौत हुई हैं मोदी जी को जवाब देना ही होगा" उसने ठीक ही कहाँ। परंतु यह हत्याएं हैं। इस तंत्र द्वारा की हुई क्रूर हत्याएं। जैसा कि ऐसी हर घटना के बाद होता है पूरा तंत्र घटना की लीपापोती करने में सक्रिय हो जाता है और एक दूसरे पर आरोपों के कोरे शब्द बाण छोड़े जाते हैं।
शासन-प्रशासन , नेता अपने घड़ियाली आंसू दिखा-दिखा कर रोने लगते हैं। जितने झूठे इनके आंसू हैं उतनी ही झूठी इनकी सांत्वना हैं। ऐसा ही इन मौतों के बाद हो रहा है। कुछ दिन तक ये होता रहेगा जब तक कि मामला 'ठंडा' नहीं हो जाता। उसके बाद शासन , प्रशासन और पूरा तंत्र ऐसी ही अगली दुर्घटना का इंतजार करता है।
अब जबकि 23 छात्र-छात्राओं की मौत हो गई है, उनके घर में मातम पसरा है तथा अपना भविष्य बनाने हेतु कोचिंग पहुंचे छात्र-छात्राओं को अपने वर्तमान से भी हाथ धोना पड़ गया है; तब शासन-प्रशासन सांप निकलने के बाद लाठी पीटने जैसी हरकतें कर जगह-जगह छापे मार रहा है।
जैसा कि भारत में आम है ,पूरे तंत्र के किसी भी हिस्से ने छात्र-छात्राओं की सुरक्षा को लेकर कोई पूर्व तैयारी या जांच परख इन संस्थानों की नहीं की थी। अब भले ही संस्थान का मालिक गिरफ्तार हो गया है लेकिन छात्रों और अभिभावकों को लूटने वाले मालिक के संस्थान में जाकर पहले से जांच पड़ताल कर सुरक्षा इंतजाम जांचने वाला कोई नहीं था। इसमें अग्निशमन विभाग प्रमुख रूप से दोषी है। जाहिर सी बात है कि यह पूंजीवादी व्यवस्था , जहां पैसे के सामने मानवता का कुछ मोल नहीं है, शोषितों-उत्पीड़ितोंऔर गरीबों के साथ यह व्यवस्था ऐसे ही व्यवहार करती है। कभी ऐसे भीषण अग्निकांड तो कभी बदइंतजामी व लापरवाही के कारण बेरोजगार युवाओं को मौत की ठंडी नींद सुला दिया जाता है। बरेली में भर्ती के लिए आये लेकिन ट्रेन से कटकर दर्दनाक मौत मारे गए बेरोजगारों को भला कौन भूल सकता है ? युवाओं, बेरोजगारों ,छात्रों के साथ ऐसा ही क्रूर व्यवहार यह व्यवस्था हमेशा ही करती है। जाहिर है कि ऐसी घटनाओं को पूरी तरह तभी रोका जा सकता है जब पूंजीवादी समाज को बदला जाए ।



No comments:
Post a Comment