मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल में रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ को मानव संसाधन विकास मंत्री बनाया। मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल की मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी थीं। इन दोनों शख्सियतों में एक समानता रही। वह समानता है डिग्रियों के फर्जी होने की। रमेश पोखरियाल अपने नाम के आगे डाॅ. लगाते हैं। यह पदवी पेशे से डाॅक्टर या पी.एच.डी. किया हुआ कोई व्यक्ति ही उपयोग करता है।
रमेश पोखरियाल को श्रीलंका स्थित ओपन इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ने डी.लिट. की मानद उपाधी दी। मानद उपाधी प्राप्त कोई व्यक्ति भी अपने नाम के आगे डाॅ. पदवी लगा सकता है। परन्तु जब इस पर जांच की गयी तो श्रीलंका के यूजीसी से पता चला कि श्रीलंका में इस नाम से कोई भी राष्ट्रीय या अंतर्राष्ट्रीय इंस्टीट्यूट पंजीकृत नहीं है।
सबसे खराब बात यह है कि रमेश पोखरियाल इन गलतियों को दुरुस्त करने की जगह जवाब देते हैं कि ‘‘मैंने इससे कोई लाभ नहीं लिया। मैंने कुछ गलत नहीं किया है। मैं निशंक हूं, इसका मतलब होता है जो किसी से न डरे’’। डाॅ. की यह मानद उपाधी प्राप्त व्यक्ति समाज में ‘‘सम्मानित’’ होने की आस करता है। रमेश पोखरियाल इसकी हर जगह, हर मौके पर कोशिश करते रहते हैं कि उनको डाॅ. पदवी से सम्बोधित किया जाये। हमेशा ही लाभ आर्थिक होना आवश्यक नहीं है, मान-प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिये किया गया कार्य भी लाभ में आता है। और इसी लाभ के लिए इन्होंने ऐसा किया भी।
रमेश पोखरियाल पद-डिग्री-पदवी को किसी शैक्षिक योग्यता का मोहताज नहीं मानते। इस बात का सबूत वे पहले ही दे चुके हैं। जब ये उत्तराखंड के मुख्यमंत्री थे तो इन्होंने पांचवी पास नामधारी को अल्पसंख्यक आयोग का अध्यक्ष बना दिया था जो कि एक संवैधानिक पद है। ज्ञात हो यह वही नामधारी हैं जिन पर पहले ही कई आपराधिक मुकदमें चल रहे थे और फिलहाल ये शराब करोबारी पोंटी चड्डा के मर्डर के लिए जेल में बंद हैं।
डिग्री का फर्जीबाडा तो पता चल गया अब इनकी समझ के दिवालियेपन को देखते हैं। संसद में अपने एक बयान में उन्होंने कहा कि ‘‘ज्योतिष विज्ञान से भी बड़ा विज्ञान है।’’ ससंद में कहे गये अपने बयान पर उन्हें पार्टी का भी साथ नहीं मिला, वे अपना बचाव खुद ही करते रहे। रमेश पोखरियाल राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ द्वारा पोषित संस्था द्वारा चलाये जाने वाले शिशु मन्दिर-विद्या मन्दिर स्कूल में पढ़ा चुके हैं। गणेश की प्लास्टिक सर्जरी से लेकर अणु बम विस्फोट तक सारा विज्ञान हमारे शास्त्रों में होने का दावा करते रहे। कोई कह दे कि रमेश जी पुराणों में प्राचीन बातों में मौजूद इन बातों को पुष्ट करने के लिए आप अपना सिर कुर्बान कर ही दीजिये, प्लास्टिक सर्जरी से जोड़कर देखते हैं। आप कहें तो आपका ही सिर या फिर हाथी का सिर आपके शरीर में जोड़ दिया जायेगा। तब शायद रमेश पोखरियाल आयुर्वेद या पौराणिक कथाओं की सत्यता पर संदेह जतायें। पर तब तक उन्हें उस पर पूर्ण विश्वास है।
संघ-भाजपा में शिक्षित-दीक्षित ये कूपमण्डूक जब-तब अपनी मूर्खता, अज्ञानता और अंधविश्वास को जाहिर करते रहते हैं। अतीत की वैज्ञानिकता और सकारात्मकता को विज्ञान स्वीकार करता है। पर अतीत की कूपमण्डूकता में धसे हुए ये संगठन और इनके कूढ़मगज लोग विज्ञान और वैज्ञानिकता के लिए खतरा हैं। पिछले पांच सालों में शिक्षा और शिक्षा से जुड़ी तमाम संस्थाओं में ऐसे लोग बैठाये गये हैं। अब मानव संसाधन विकास मंत्री के रूप में एक और फर्जी व कूपमण्डूक, अंधविश्वासी व्यक्ति बैठा दिया गया है। संघ-भाजपा में इससे बेहतर वैज्ञानिक सोच वाले शिक्षित-प्रशिक्षित लोग नहीं मिल सकते। इसके जरिये ये शिक्षा और शिक्षा व्यवस्था की अर्थी उठा देना चाहते हैं।
पिछले पांच साल जहां शिक्षा में कूपमण्डूकता को फैलाने के साल रहे हैं वहीं इसके खिलाफ छात्रों के संघर्ष के भी साल रहे हैं। ऐसे में यह उम्मीद की जा सकती है कि इनकी कूपमण्डूकता को छात्र व समाज से चुनौती पेश की जायेगी। इसके बिन हम शिक्षा को बेहतर बनाना तो दूर जैसी है वैसी भी नहीं बचा रख सकेंगे।

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