छात्रों का बहादुराना संघर्ष जिंदाबाद !
जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्र पिछले कई दिनों से फीसवृद्धि का विरोध कर रहे हैं। सरकार द्वारा बोले गये इस बड़े हमले का विरोध जरूरी था। छात्रों के बड़ी संख्या में विरोध प्रदर्शन करने और फीसवृद्धि वापस करने की मांग को कुलपति ने अनसुना कर दिया। कान में तेल डाले और आंखों पर काली पटटी बांधे जेएनयू कुलपति संघी सरकार के कुशल स्वंयसेवक का रोल अदा करते हुए अड़ियल रुख पर कायम हैं। वकीलों से झगड़ा होने पर न्याय की गुहार लगाने वाली दिल्ली पुलिस छात्रों से बर्बरता से निपट रही है। दिल्ली पुलिस ने सरकार के इशारे पर जेएनयू छात्रों का सिर फोड़ा और उनके कपड़े खून से रंग दिये। उनको सड़कों पर घसीटा और जेलों में कैद कर दिया। इतने जुल्मों सितम के बाद भी जेएनयू के छात्र बहादुरी के साथ मैदान में डटे हैं। वे सरकार के शिक्षा को महंगा करने और शिक्षा के निजीकरण की इस मुहिम के सामने लोहे की दीवार की तरह खड़े हैं।
