2 December 2019

तुम तो हम जैसे ही निकले अब तक कहां छुपे थे भाई! वो मूरखता-वो घामड़पन जिसमें हमने सदी गंवाई !!

   


        कुछ सालों पहले पाकिस्तान की मशहूर मानव अधिकार कार्यकर्ता फहमीदा रियाज ने उक्त पंक्तियां भारत के हाल को देखते हुए लिखी थी। इस कविता के माध्यम से वो बता रही थी कि भारत का हाल भी पाकिस्तान की तरह ही होता जा रहा है। अभी 1 साल पहले ही उनका देहांत हुआ है।

        ये पंक्तियां अब पाकिस्तान पर भी फिट बैठती हैं। 2 दिसम्बर को पाकिस्तान की सरकार ने 300 अज्ञात छात्रों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया है। हाल के समय में पाकिस्तान में फीसों में जबर्दस्त बढ़ोत्तरी की गयी है। सभी प्रकार की शिक्षा की फीसों में लगभग 100 प्रतिशत की वुद्धि हुई है। इसके अलावा वहां के कई क्षेत्रों में पढ़ने के लिए बेहतर शिक्षा की व्यवस्था भी नही है। इन सबके खिलाफ आवाज उठाने के लिए पाकिस्तानी छात्रों के पास छात्र संघ जैसी संस्था भी मौजूद नही है। दरअसल 1984 में जिया उल हक की सरकार ने छात्र संघ चुनाव पर बैन लगा दिया था। बेहतर शिक्षा और छात्र संघ जैसे जनवादी अधिकार की मांग को लेकर छात्रों में सालों से पनपता गुस्सा बीते 29 नवंबर को संगठित रूप में सड़को पर उतरा।

        छात्र संघ बहाल करने और बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की मांग को लेकर सभी प्रगतिशील छात्र संगठनों ने ‘स्टूडेंट एक्शन कमेटी’ का गठन किया और महीनों तैयारी के बाद 29 नवंबर को पाकिस्तान के 50 शहरों में ‘स्टूडेंट साॅलीडेरिटी मार्च’ का आयोजन किया। सबसे शानदार बात ये रही कि इस मार्च में हजारों छात्रों के साथ-साथ मजदूर संगठनों, किसान संगठनों, वकीलों, नागरिकों ने भी शिक्षा को बचाने के हक में आवाज उठायी। यही बात पाकिस्तान की इमरान सरकार को नागवार गुजरी। बिल्कुल वैसे ही जैसे हमारे देश की मोदी सरकार को छात्रों की मांगे नागवार गुजरती है। कितनी समानता है ना दोनों देश के शासकों में!

        समानता यहीं खत्म नही होती। आपको याद होगा कि JNU, FTII, पंजाब यूनिवर्सीटी के छात्रों द्वारा फीस वृद्धि और सरकार का विरोध करने पर उन पर भी ‘देशद्रोह’ का तमगा लगाया गया था। इस बार इमरान सरकार ने मोदी सरकार से सीखते हुए मार्च निकालने वाले अपने देश के छात्रों पर ‘देशद्रोह’ का मुकदमा दर्ज करवा दिया। छात्रों और जनता की आवाज को दबाने में दोनों देश के शासकों में कितनी समानता है ना!

        और अतनी ही समानता दोनों देश के छात्रों और मेहनतकशों की जिंदगी में है। हम भी शिक्षा को बिकते हुए देख रहे हैं और वो भी। वो भी मेहनतकशों को मरते हुए देख रहे हैं और हम भी। दोनों देशों के शासक एक जैसे मालामाल हैं और दोनों देश की जनता खस्ताहाल।




        इसलिए पाकिस्तान के छात्रों और इंसाफ पसंद लोगों, एक बेहतर भविष्य के लिए तुम अपने शासकों से टकराओ हम अपने शासकों से निपट लेगें। भरोसा रखना तुम्हारी हर एक न्यायपूर्ण लड़ाई में हम तुम्हारे साथ और तुम्हारे शासकों के खिलाफ खड़े हैं और हमें पूरा विश्वास है कि हमारे प्रति भी तुम्हारा यही व्यवहार होगा। दोनों तरफ की इंसाफ पसंद जनता की ताकत ही इन लुटेरे शासकों को इनके असली मुकाम तक पहुचाएगी। हमें धर्म और सीमा के नाम पर बांटने वाली हर ताकत एक दिन मिट्टी में मिल जाएगी।  

भारत-पाकिस्तान के लुटेरेे शासक मुर्दाबाद !

भारत-पाकिस्तान की मेहनतकश आवाम जिंदाबाद !! 


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