‘नागरिकता संशोधन विधेयक’ (सीएबी) लोक सभा और राज्य सभा दोनों में पास हो गया है। इस विधेयक के जरिये भाजपा ने अपने घोर सांप्रदायिक चरित्र को एक बार फिर उजागर कर दिया है। इस विधेयक में धर्म को आधार मानकर नागरिकता देने का प्रबंध भाजपा की सरकार ने कर दिया है। इसके जरिये भाजपा ‘हिन्दू राष्ट्र’ के अपने फासीवादी एजेण्डे को लागू कर रही है। लंबे समय से संघ और भाजपा अपने हिन्दू राष्ट्र का सपना पाले हुए थे। अब वे इसे तेजी से जमीन पर उतारने की ओर आगे बढ़ रहे हैं। यह विधेयक इसी उद्देश्य से प्रेरित है।
इस विधेयक के तहत बांग्लादेश, अफगानिस्तान व पाकिस्तान के गैर मुस्लिमों के लिए भारत की नागरिकता हासिल करना आसान बना दिया गया है। इन देशों से आये गैर मुस्लिम 6 वर्ष भारत में रहने पर नागरिकता के हकदार हो जायेंगे। जाहिर है इसका उद्देश्य इन देशों के पीड़ित मुस्लिमों की मदद करना नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य देश के भीतर रह रहे मुस्लिमों को आतंकित करना है और बाहर से आये मुस्लिमों को घुसपैठिया करार दे, हिटलरी तांडव रचना है।
इस विधेयक के तहत बांग्लादेश, अफगानिस्तान व पाकिस्तान के गैर मुस्लिमों के लिए भारत की नागरिकता हासिल करना आसान बना दिया गया है। इन देशों से आये गैर मुस्लिम 6 वर्ष भारत में रहने पर नागरिकता के हकदार हो जायेंगे। जाहिर है इसका उद्देश्य इन देशों के पीड़ित मुस्लिमों की मदद करना नहीं है बल्कि इसका उद्देश्य देश के भीतर रह रहे मुस्लिमों को आतंकित करना है और बाहर से आये मुस्लिमों को घुसपैठिया करार दे, हिटलरी तांडव रचना है।
धर्म को आधार बनाकर नागरिकता देने वाला यह विधेयक भारत के पहले से आधे-अधूरे धर्म निरपेक्ष व जनवादी संविधान को रद्द करने की एक कोशिश है। यह देश की जनता को धर्म के आधार पर बांटता है। यह आजादी की लड़ाई में अपना-अपना खून बहाने वाले यौद्धाओं की शहादत पर मिटटी डालने का षड़यंत्र है। यह विधेयक अशफाक उल्ला खां और रामप्रसाद बिस्मिल की साझी विरासत को अपमानित करता है। संघ-भाजपा जैसी प्रतिक्रियावादी शक्तियों के सत्ता में काबिज हो जाने से इससे भिन्न की उम्मीद नहीं की जा सकती। वे ऐसा हर काम करेंगे जो भारत की जनता, भारत के मेहनतकशों को बांटने का काम करे। अपने घृणित और मध्ययुगीन विचारों को वे ऐसे ही जनता पर थोपने का काम करेंगे।
अंबानी-अडानी जैसे बड़े पूंजीवादी घरानों के आशिर्वाद से सत्ता में आयी यह संघी सरकार उन पर खुले दिल से मेहरबान है। एक तरफ मेहनतकश जनता के टैक्स के पैसे को उन पर लुटाया जा रहा है। और बदले में जनता को ही आंतकित किया जा रहा है। संघी-भाजपा तेजी से अपने फासीवादी और सांप्रदायिक ऐजेण्डे को आगे बढ़ा कर जनता में विभाजन पैदा करना चाहते हैं। वे मेहनतकशों को एक दूसरे के खिलाफ खड़ा करने का षड़यंत्र रच रहे है। यह इतिहास का प्रहसन ही है कि आजादी की लड़ाई से किनारा करने वाले, आजादी की लड़ाई लड़ने के बजाय हिन्दुओं और मुस्लिमों को लड़ाने की कोशिश कर अंग्रेजों की मदद करने वाले, क्रांतिकारियों की मुखबिरी अंग्रेजों से करने वाले, भगत सिंह और उनके साथियों की शहादत का मजाक बनाने वाले, गांधी की हत्या करने वाले तत्व आज आजाद हिन्दुस्तान को अपने मानसिक दिवालियेपन से क्षत-विक्षत कर रहे हैं। ये तत्व हिटलर के यातना शिविरों को हिन्दुस्तान की जमीन पर भी खड़ा करने की कोशिश में हैं। जैसे हिटलर ने यहूदियों के साथ किया वे हिन्दुस्तान में मुस्लिमों के साथ करने चाहत रखते रहे हैं। और यह विधेयक इसी ओर बढ़ने का संकेत है।
संघ के एजेण्डे पर तेजी से आगे बढ़ते हुए भाजपा ने एक के बाद दूसरे ऐसे एजेण्डो को आगे बढ़ाया है जिससे घोर सांप्रदायिक और फासीवादी गंध पूरे समाज में फैल गयी है। कश्मीर से धारा 370 का खात्मा, एनआरसी को असम में लागू कर व अब पूरे में लागू करने की घोषणाएं संघ-भाजपा के ऐसे ही कदम हैं।
देश में कौन रहेगा और कौन बाहर जायेगा? किसको देश की नागरिकता मिलेगी किसको नहीं यह वे लोग तय कर रहे हैं जो शासक पूंजीपति वर्ग के सबसे प्रतिक्रियावादी, सबसे निरंकुश प्रतिनिधि हैं। संकटों से घिरे पूंजीवादी शासकों से इसके अतिरिक्त और उम्मीद भी नहीं पाली जा सकती। जैसे-जैसे पूंजीवादी व्यवस्था, पूंजीवादी शासक पतन की ओर अग्रसर होंगे वैसे-वैसे वे ऐसे ही कदमों की ओर बढ़ेगे। पूंजीवादी लोकतंत्र का यही हस्र होना था और हो रहा है। इस विधेयक को देखकर अगर कोई यह कहे कि यह लोकतंत्र नहीं बल्कि सामंती निरंकुशता है तो कोई गलत बात नहीं होगी। अपने पतन की ओर निरंतर अग्रसर इस पूंजीवादी व्यवस्था, पूंजीवादी शासकों और पूंजीवादी लोकतंत्र में यही हो सकता है। सीमित जनवाद भी निरंतर सिमटते हुए निरंतकुशता के राज की ओर अग्रसर है।
जाहिर सी बात है कि मेहनतकशों और युवाओं को इस बात को स्थापित करना होगा कि जो भी भारत में रह रहा है वह भारतीय नागरिक है, चाहे वह किसी भी धर्म, जाति का हो। इसी नारे के जरिये ही मेहनतकशों, छात्रों युवाओं की एकता सुनिश्चित की जा सकती है और संघ-भाजपा के इस सांप्रदायिक और फासीवादी एजेण्डे को चुनौती दी जा सकती है। आज हमें अपने को उनके घृणित और जहर भरे हथकंड़ों में नहीं फंसने देना चाहिए।
संघ-भाजपा के हमारे समाज में जहर घोलने, हिन्दुस्तान की जनता को बांटने और मुस्लिमों को आंतकित करने की इस मुहिम का विरोध करना चाहिए। परिवर्तनकामी छात्र संगठन नागरिकता संघोधन बिल का पुरजोर विरोध करता है। पछास घोर सांप्रदायिक और विभाजनकारी इस विधेयक के विरोध में खड़े होने का आहवान करता है।

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