5 जनवरी की शाम 7 बजे के आस पास जेएनयू में कुछ गुंडे डंडे, लाठियों और चाकू को हाथ में लेकर कैंपस में घुस गए और हाॅस्टल में छात्रों के साथ मारपीट की और तोड़फोड़ की। छात्र संघ अध्यक्ष सहित कई छात्रों को बुरी तरह से घायल कर दिया। परिवर्तनकमी छात्र संगठन इस कायराना हमले की कठोर शब्दों में निंदा करता है और मांग करता है कि इस हमले के दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाय।
जब छात्रों को पीटा जा रहा था तो वह लगातार मदद की मांग कर रहे थे। ना तो विश्वविद्यालय प्रशासन और ना ही पुलिस उनकी मदद करने को आए। यह वही जेएनयू प्रशासन और वीसी हैं जो छात्रों को आंदोलन करने से रोकने के लिए बार-बार पुलिस को कैंपस के अंदर बुलाते रहे हैं। छात्र अपनी आवाज को ना उठा सके इसके लिए कैंपस को पुलिस छावनी बनाने से भी उन्हें कभी गुरेज नहीं रहा है। लेकिन जब गुंडे अपना आतंक हॉस्टलों के अंदर कायम कर रहे थे तब पुलिस प्रशासन और वीसी मौन रहकर इन पर कोई कार्यवाही ना कर एक तरीके से हमले को बढ़ावा दे रहे थे। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस जो सीएए कानून का विरोध कर रहे जामिया के छात्रों पर इस प्रकार हमलावर हुई थी कि जैसे वह कोई छात्र ना हो बल्कि कोई खूंखार अपराधी हों वहां वीसी की अनुमति की कोई आवश्यकता की कोई जरूरत महसूस नहीं हुयी। और जेएनयू में जब छात्र और टीचर पुलिस से मदद मांग रहे थे तो पुलिस वीसी से इजाजत लेने की बात का बहाना बनाकर कैंपस के अंदर नहीं आयी। पुलिस का कहना था कि वीसी से पूछेंगे उसके बाद ही कैंपस में प्रवेश करेंगे। यह कितने शर्म की बात है। दिल्ली पुलिस घंटों तक वीसी से अनुमति नहीं ले सकी साफ जाहिर है कि वीसी व दिल्ली पुलिस जो कि केंद्र की भाजपा सरकार के मातहत आती है उनकी पूरी शह इन गुंडों को थी। पूरे देश में जेएनयू के छात्रों पर हमले की खबर पहुंच गयी किन्तु वीसी नजाने कहां गायव रहे क्यों पुलिस को रोकने को नहीं कहा गया। दिल्ली पुलिस हर गेट पर तैतान थी, गार्ड किसी भी बहारी व्यक्ति की जांच करके जेएनयू में जाने देते हैं इस सब के बावजूद नकाबपोश कैम्पस में आते हैं और हमला करके चले जाते हैं। यह कैसी निगरानी है? किसकी निगारानी है?
अब जैसा कि कई मीडिया रिपोर्ट में यह बात सामने आ रही है कि इन हमलावर गुंडों द्वारा हमले को अंजाम देने के लिए एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था जिससे वह लगातार हमले का माहौल और हमले को निदेशित कर रहे थे।
जेेएनयू छात्रों पर यह गुंडागर्दी, मारपीट फीस वृद्धि के खिलाफ हो रहे आंदोलन को तोड़ने के लिए किया गया क्योंकि नया हाॅस्टल मैनुअल को लागू करते हुए एडमिशन की प्रक्रिया यूनिवर्सिटी के अंदर चल रही थी जिसका कि जेएनयू छात्र संघ और छात्र विरोध कर रहे थे जबकि एबीवीपी ग्रुप जबरन प्रवेश की प्रक्रिया चलाना चाहता था ताकि बढ़ी हुई फीस वृद्धि लागू हो सके। जाहिर सी बात है यह हमला सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के फायदे में था। इस हमले से वह आंदोलनकारी छात्रों को डराकर, मारपीट कर चुप करवाना चाहता है। पर वे नहीं जानते की डंडे मारकर आग को बुझाया नहीं जाता बल्कि आग और भी भडक जाती है।
पूरे देश भर में इस हमले की निंदा हो रही है कई विश्वविद्यालयों के छात्र इसके विरोध में सड़कों पर आने लगे। खुद दिल्ली में ही दिल्ली यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी के छात्र पुलिस मुख्यालय पर रात में ही आ गए और पूरी घटना पर विरोध जताने लगे।
परिवर्तनकामी छात्र संगठन भी घटना की कडे शब्दों में निंदा करता है और मांग करता है कि अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में पूर्णतया असफल जेएनयू विश्वविद्यालय के कुलपति तत्काल इस्तीफा दें। इस हमले के दोषियों को तत्काल गिरफ्तार किया जाये। जेएनयू के छात्र छात्राओं को सुरक्षा प्रदान की जाए और बड़ी हुई फीस वृद्धि वापस ली जाये। परिवर्तनकामी छात्र संगठन संघर्षरत छात्रों के साथ अपनी एकजुटता को प्रदर्शित करता है और देश की छात्रों से आह्वान करता है वह भी इस संघर्ष में जेएनयू का साथ दें।

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