इस दौरान भ्रांतियां और अंधविश्वास फैलाने वाले तत्वों के खिलाफ कार्यवाही करो।
कोरोना वायरस के प्रकोप से पूरी दुनिया जूझ रही है। भारत समेत कई देशों की सरकारों द्वारा इस महामारी से निपटने को ‘लाॅक डाउन’ जैसे आपातकालीन कदम उठाये गये हैं।
हमारे देश में भी कोरोना महामारी तकरीबन तीसरे चरण में प्रवेश कर चुकी है। इस भीषण आपदा से निपटने को केन्द्र सरकार द्वारा यथा समय अपेक्षित एवं आवश्यक कदम नहीं उठाये गये। अत्यन्त लापरवाही बरती गयी। केन्द्र सरकार इस पर पिछले दो माह से भी अधिक समय तक पूर्णतः निष्क्रिय रही और इस महामारी को फैलने दिया गया। विदेशी यात्राओं पर रोक नहीं लगायी गयी। भारत की सीमाओं एवं कुछ विशेष राज्यों, जहां से विदेशी यात्रायें अधिक होती हैं, को सील नहीं किया गया। विदेशी पर्यटकों की यात्राओं को भी समय रहते न रोका गया।
केन्द्र सरकार द्वारा समय रहते स्वास्थ्य सेवाओं को चाक-चौबन्द नहीं किया गया। देश के बड़े-बड़े चिकित्सा संस्थानों को महामारी कोविड-19 के मरीजों को बेहतर इलाज देने में भी सक्षम बनाने को यथासमय सार्थक प्रयास नहीं किये गये। काफी ढिलाई बरती गयी।
केन्द्र सरकार द्वारा 8 फरवरी को कोरोना जैसे वायरस के संक्रमण से बचाव हेतु सर्जिकल मास्क, दस्ताने, कपड़ों एवं अन्य सुरक्षा उपकरणों के निर्यात पर लगी रोक को हटाना केन्द्र सरकार की लापरवाही की चरम पराकाष्ठा है। आने वाले समय में पूरे देश एवं मेडिकल स्टाफ को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है।
केन्द्र सरकार ने अपनी उपरोक्त व्यवस्था संबंधी कमियों एवं घोर लापरवाही को स्वीकारने के स्थान पर इसका ठीकरा पूरे देश की जनता पर फोड़ दिया और बिना तैयारियों के 21 दिन का ‘लाॅक डाउन’ करके देश की गरीब मजदूर-मेहनतकश जनता को घरों में कैद करके भूख से मरने को विवश कर दिया है। पूरे देश को तैयारियों के लिए कोई समय न देकर तीन हफ्तों तक 'लाॅक डाउन' करने का कदम पूर्णतः असंवेदनशील है, घोर लापरवाही है।
इस भीषण आपदा से निपटने को शासन सत्ता द्वारा तत्काल आवश्यक कदम न उठाये गये तो भारत में भी स्थिति विकराल रूप धारण कर सकती है। कई विशेषज्ञों द्वारा इस तरह की चिन्तायें व्यक्त भी की जा रही हैं।
हालात इस कदर लचर हैं कि वर्तमान समय में भी सरकारों द्वारा आम जनता को ‘सेनेटाइजर’ एवं ‘मास्क’ जैसी सामान्य व प्राथमिक स्तर की सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराने को प्रभावी व्यवस्था तक नहीं की गयी है। कोरोना वायरस की जांच हेतु पर्याप्त संख्या में जांच केन्द्र भी नहीं बनाये गये हैं। गरीब तबकों की पहुंच से ये जांच केन्द्र कोसों दूर हैं।
निजी अस्पतालों को कोरोना वायरस से पीड़ितों (खासकर मजदूरों व गरीब तबके के लोगों) की निःशुल्क जांचें एवं इलाज करने का सार्थक एवं प्रभावी आदेश सरकारों द्वारा जारी नहीं किये गये हैं। भारत में पहले से ही सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था अत्यन्त लचर बनी हुयी है। यह निजी क्षेत्र के अस्पतालों के लिए मुनाफ़ा बटोरने का चारागाह बन चुकी है। ऐसे में निजी क्षेत्र के अस्पतालों पर शिकंजा कसे बिना भारत में कोरोना महामारी पर प्रभावी रूप से रोक भला कैसे लग पायेगी?
विशेषज्ञों का मत है कि वैक्सीन (टीके) के अभाव में वर्तमान में मनुष्य के शरीर की प्रतिरोधी क्षमता ही वह निर्णायक तत्व है जिसमें कोरोना वायरस का मुकाबला किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार ‘लाॅक डाउन’ एवं एकांत निगरानी में रखना प्राथमिक स्तर के कदम हैं, जिनसे कोरोना वायरस के फैलाव को नियंत्रित किया जा सकता है, खत्म नहीं किया जा सकता है। परन्तु बड़े ही दु:ख एवं चिंता का विषय है कि भारत में सरकारों द्वारा विशेषज्ञों की उपरोक्त बातों को अनदेखा कर तानाशाही पूर्ण कदम उठाये जा रहे हैं। 23 मार्च से जनता की जरूरतों को ध्यान में रखे बिना 75 जिलों में 'लाॅक डाउन' कर दिया गया व 25 मार्च से पूरे ही देश में 21 दिनों के लिए 'लॉक डाउन' की घोषणा कर दी गयी। लोगों को राशन एवं अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था करने का भी अवसर नहीं दिया गया।
भारत की कुल आबादी का अधिकांश हिस्सा असंगठित क्षेत्र के दिहाड़ी मजदूरों, संगठित क्षेत्र के ठेका, कैजुअल, ट्रेनी एवं फिक्स्ड टर्म के मजदूरों एवं गरीब तबके के लोगों (फड-खोखे-रिक्शा-तांगे, रेहडी वाले, इ रिक्शा-टैम्पो चलाने वालों से लेकर गरीब किसानों आदि) से मिलकर बना है। इनमें से अधिकांश लोग एवं उनके बच्चे सरकारों की पूंजीपरस्त नीतियों के कारण पहले से ही कुपोषित हैं। असंख्य लोग स्लम बस्तियों में एवं फुटपाथों, रेलवे स्टेशनों आदि में खुले आसमान के नीचे जीवन-बसर करने को अभिशप्त हैं।
इनमें अधिकांश मजदूर ऐसे हैं जिन्हें-हाथों हाथ दिहाड़ी दी जाती है। इनमें से गरीब तबके के अधिकांश लोग ऐसे हैं कि वो रोज कुंआ खोदते हैं और पानी पीते हैं। 23 मार्च ‘लाॅक डाउन’ करने का ऐसा प्रतिकूल समय चुना गया जबकि मजदूरों का वेतन समाप्त हो जाता है। 'लाॅक डाउन' करने से पूर्व यह भी ध्यान दिया नहीं दिया गया कि इनके पास नकदी है या नहीं। 'लाॅक डाउन' करने से पूर्व इन्हें सरकारों द्वारा नकदी एवं राशन आदि अति आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने की भी कोई व्यवस्था नहीं की गयी। सरकारों द्वारा ‘लाॅक डाउन’ करने से पूर्व देश की उपरोक्त मजदूर-मेहनकश आबादी को हाशिये पर डाल दिया गया। जबकि यही वो आबादी है जिनके प्रति ‘लाॅक डाउन’ एवं कोरोना वायरस के पूरे दौर में संवदेनशीलता दिखाने की जरूरत है।
पहले से ही कुपोषित उपरोक्त गरीब आबादी के शरीर की प्रतिरोधी क्षमता अचानक किये गये ‘लाॅक डाउन’ करने के फैसले से भला कैसे बढ़ेगी? स्पष्ट है कि सरकारों द्वारा ‘लाॅक डाउन’ करने से पूर्व विशेषज्ञों के सुझावों का पूर्णतः उल्लंघन किया गया है।
देश के मजदूरों एवं मेहनतकशों का समुचित ध्यान रखे बिना कोरोना वायरस से पार पाने की कल्पना करना भी बेमानी है। कोरोना महामारी पर विजय पाने के लिए आवश्यक है कि कोरोना महामारी से निबटने के लिए योजना बनाने एवं लागू कराने में देश की मजदूर-मेहनतकश जनता की प्रभावी एवं निर्णायक भूमिका बनायी जाये। मजदूर-मेहनतकश जनता से कटी हुयी योजना बनाने एवं राय-मशविरा किये बिना तानाशाही पूर्ण कदम उठाने से काम नहीं चलेगा।
कोरोना सहित प्रत्येक महामारी से वैज्ञानिक तरीके से ही प्रभावी लड़ाई लड़ी जा सकती है, विजय पाई जा सकती है। परन्तु भारत में मंत्रियों, अधिकारियों से लेकर तमाम तरह के पोंगापंथियों द्वारा कोरोना वायरस का इलाज गौमूत्र पीने, शंख-थाली बजाने, कर्फ्यू से होने आदि भ्रांतियों एवं अवैज्ञानिकता को फैलाया जा रहा है। इससे स्थिति और भी अधिक गंभीर हो जा रही है। जनता कर्फ्यू के दौरान 22 मार्च को देश के विभिन्न स्थानों पर मंत्रियों एवं अफसरों द्वारा थाली बजाते हुए भारी भीड़ के साथ गैर जिम्मेदाराना कृत्यों से चिंता कई गुना बढ़ जाती है। ऐसे असामाजिक तत्वों के खिलाफ कठोर कार्यवाही किये बिना कोरोना महामारी पर विजय पाने की कल्पना करना भी बेमानी होगा।
कोरोना महामारी का सफलतापूर्वक मुकाबला करने हेतु हम भारत सरकार से निम्नलिखित मांगों पर तत्काल हस्तक्षेप करने की आवश्यकता महसूस करते हैं-
हमारी मांगें-
1. निजी क्षेत्र की समस्त स्वास्थ्य सेवाओं, अस्पतालों, मेडिकल काॅलेजों एवं फार्मा कम्पनियों आदि का तत्काल राष्ट्रीयकरण किया जाये। सभी मजदूरों एवं गरीब तबके के लोगों को निःशुल्क जांच एवं इलाज की व्यवस्था प्रदान की जाये।
2. सरकारें अतिरिक्त अस्पतालों, बेडों, टेस्ट लैबों, डाक्टरों, नर्सों एवं मेडिकल स्टाफ आदि की त्वरित गति से व्यवस्था करे। मेडिकल काॅलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को प्राथमिक एवं आवश्यक प्रशिक्षण देकर ड्यूटी पर तैनात किया जाये। स्टेडियम, होटलों, स्कूलों, विशालकाय भवनों, सरकारी एवं निजी गेस्ट हाउसों आदि को आपातकालीन अस्पतालों में रूपान्तरित किया जाये। चीन एवं दक्षिण कोरिया आदि के अनुभवों से सीखा जाये।
3. सरकारें सभी निजी अस्पतालों में (राष्ट्रीयकरण न करने तक) कोरोना पीड़ित मजदूरों एवं गरीब तबके के लोगों के लिए निःशुल्क जांचें अनिवार्य रूप से करने का आदेश तत्काल जारी करें। उनके द्वारा आदेश का पालन न करने पर बिना मुआवजा दिये अधिग्रहण किया जाये।
4. व्यापक स्तर पर कोरोना टेस्ट कराये जायें। कोरोना से ग्रसित लोगों की पहचान कर उनको निःशुल्क स्वास्थ्य सुविधायें उपलब्ध करायी जायें। उन्हें अलग से निगरानी में रखा जाये।
5. सरकार द्वारा मजदूरों एव गरीब तबके के लोगों को निःशुल्क मास्क, सेनेटाइजर एवं अन्य बचाव सामग्री उपलब्ध करायी जाये।
6. अपने घर से बाहर पढ़ाई-तैयारी हेतु रह रहे छात्रों के हॉस्टल-पीजी बंद करने के बजाय उन्हें कोरेंटाइन करने की व्यवस्था की जाये। उनके भोजन, रहने एवं इलाज की निःशुल्क व्यवस्था सरकार द्वारा की जाये।
7. कोरोना वायरस जनित रोग की रोकथाम हेतु स्थायी प्रबंधन विकसित करने की सार्थक योजना बनाई जाये। इसमें आम जनता एवं सामाजिक संस्थाओं की भी प्रभावी भूमिका बनायी जाये।
8. देश में उपलब्ध संसाधनों को प्राथमिकता के आधार पर कोरोना बीमारी से लड़ने के लिए आवश्यक दवाईयों, मेडिकल उपकरणों, अस्पतालों आदि के निर्माणों में लगाया जाये।
9. आवश्यक वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन में लगे मजदूरों का सम्पूर्ण स्वास्थ्य परीक्षण एवं इलाज की निःशुल्क व्यवस्था सेवायोजकों द्वारा अनिवार्य रूप से की जाये। अप्रिय घटना होने पर मजदूरों एवं उनके आश्रितों के जीवनयापन की समुचित व्यवस्था सेवायोजकों एवं सरकारों द्वारा की जाये। ऐसा न करने वाले सेवायोजकों को आजीवन कारावास की सजा दी जाये। और ऐसे संस्थानों का बिना मुआवजा दिये राष्ट्रीयकरण किया जाये।
10. अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टरों, सफाई कर्मचारियों, नर्सों, मेडिकल स्टाफ तथा मरीज के तीमारदारों को जरूरी सुरक्षा उपकरण निःशुल्क उपलब्ध कराये जायें।
11. सरकार द्वारा घोषित ‘लाॅक डाउन’ के कारण सेवायोजकों द्वारा जिन स्थायी, कैजुअल, ठेका व दिहाड़ी मजदूरों की छुट्टी की जा रही है, उन्हें सवैतनिक अवकाश दिया जाये। ‘लाॅक डाउन’ के कारण किसी भी मजदूर को नौकरी से न निकाला जाये। इसका उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों का सरकार बिना मुआवजा दिये अधिग्रहण करे।
12. फड-खोखे वालों, रिक्शा-तांगे वालों, ऑटो-इ रिक्शा वालों, गरीब किसानों एवं छोटे दुकानदारों आदि गरीब तबके के लोगों को न्यूनतम वेतनमान के बराबर मुआवजा राशि प्रदान की जाये। इनके रहने-खाने की निःशुल्क व्यवस्था की जाये।
13. दिहाड़ी मजदूरों एवं गरीब तबके के लोगों के आवास हेतु स्टेडियम, होटलों, भवनों खाली पड़े स्कूलों एवं सरकारी भवनों आदि में समूची व्यवस्था की जाये। यह आबादी बेहद चलायमान होती है। कोरोना नियंत्रण हेतु इस पर विशेष ध्यान दिया जाये।
14. केंद्र सरकार द्वारा घोषित ‘लाॅक डाउन’ के दौरान मजदूरों एवं गरीब तबके के लोगों के लिए राशन, जरूरी दवाओं एवं अन्य आवश्यक सामग्री की निःशुल्क व्यवस्था तत्काल सुनिश्चित करायी जाये।
15. ‘लाॅक डाउन’ एवं कोरोना प्रकोप के दौरान अभावग्रस्त मजदूरों एवं गरीब तबके के लोगों की समस्याओं का समाधान करने एवं आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने हेतु मोहल्लों, गांवों, तहसील, शहर, जिला एवं मंडल आदि स्तरों पर प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में तत्काल कमेटियां गठित की जायें। उपरोक्त कमेटियों में मजदूरों एवं गरीब तबकों के प्रतिनिधियों को शामिल कर एवं कमेटियों में इनका बहुमत सुनिश्चित कर योजना को बनाने एवं लागू कराने में आम जनता की प्रभावी भूमिका बनायी जाये। इसका प्रचार-प्रसार ध्वनि विस्तारित यंत्रों द्वारा किया जाये। लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को बर्खास्त कर सख्त कार्यवाही की जाये। तत्काल हेल्पलाइन नम्बर जारी किये जायें।
16. ‘लाॅक डाउन’ के दौरान राशन, दवाईयां, दूध एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं के दाम सरकार द्वारा निर्धारित किये जायें। निर्धारित दाम से अघिक मूल्य पर सामग्री बेचने वालों, कालाबाजारी एवं जमाखोरी करने वालों पर सख्त कार्यवाही की जाये।
17. सार्वजनिक क्षेत्रों, औद्योगिक केन्द्रों, स्वनिवास स्थलों में नियमित रूप से सैनेटाइजर एवं अन्य जरूरी दवाओं का छिड़काव किया जाये। स्लम बस्तियों की नियमित साफ-सफाई के विशेष प्रबंध किये जायें।
18. कोरोना वायरस के संदर्भ में किसी भी प्रकार की भ्रांतियों एवं अवैज्ञानिकता (कोरोना वायरस की रोकथाम गौमूत्र, शंख बजाने, ताली एवं थाली बजाने आदि से होने आदि) फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही कर इस पर रोक लगायी जाये।
19. गांव की तरफ पलायन करने को नियंत्रित किया जाये। अत्यन्त सावधानी बरतने एवं आवश्यक मेडिकल जांच कराने के पश्चात ही गांव की ओर पलायन करने दिया जाये। जो मजदूर या आम नागरिक अपने घर जाने के लिए रास्ते में फंसे हैं, उनकी जांच कराकर मुफ्त ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था की जाये। रबी की फसल की कटाई को ध्यान में रखते हुए भी इस संबंध में प्रावधान किये जायें।
20. दिल्ली में साम्प्रदायिक दंगों एवं हिंसा के पीड़ितों के लिए सरकार द्वारा सुरक्षित आवास एवं भोजन, दवा-दूध इत्यादि आवश्यक सामग्री की व्यवस्था की जाये।
21. एनपीआर एवं एनआरसी पर रोक लगायी जाये। सीएए को रद्द किया जाये। ‘कोरोना वायरस’ के बहाने संघर्षरत जनता पर हमले एवं दमन करना बंद किया जाये।
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)
परिवर्तनकामी छात्र संगठन (पछास)





No comments:
Post a Comment