10 April 2020

लाॅकडाउन के बहाने मजदूरों व मजदूर नेताओं का दमन-उत्पीड़न बंद करो!

मजदूर नेता अभिलाख के बाद अब इमके अध्यक्ष कैलाश भटट का उत्पीड़न!


उत्तराखंड राज्य के उधम सिंह नगर पुलिस द्वारा इंकलाबी मजदूर केन्द्र के अध्यक्ष कैलाश भटट को दिनांक 9/04/2020 को फोन कर रूद्रपुर कोतवाली बुलाया गया। कोतवाली में पुलिस ने उनके द्वारा एक व्हाट्सएप ग्रुप में डाले गये फोटो पर देशद्रोह का मुकदमा लगाने की धमकी दी है। आश्चर्य की बात यह है कि देशद्रोह का मुकदमा दर्ज करने की बात उस फोटो पर की गयी है जो कि पिछले दिनों सोशल मीडिया में लगभग पूरे ही देश में घूम रहे थे। यह फोटो लाॅकडाउन के दौरान पुलिस द्वारा मजदूरों को मुर्गा बनाकर पीटने का है। जाहिर सी बात है कि लाॅकडाउन की सबसे ज्यादा मार मजदूरों-मेहनतकशों पर पड़ी है। और जब लगभग पूरे देश में ही ये मजदूर अपने घरों की तरफ पैदल ही मार्च करने को मजबूर हुए तो पुलिस द्वारा उनके साथ मारपीट की गयी। जो पूरी तरह अमानवीय व्यवहार है। 

ज्ञात हो कि कुछ दिनों पहले पंतनगर विश्वविद्यालय में कार्यरत इंकलाबी मजदूर केन्द्र के ही एक कार्यकर्ता तथा ठेका मजदूर कल्याण समिति के सचिव अभिलाख सिंह पर भी पुलिस द्वारा राजद्रोह का अभियोग दर्ज किया है। और कैलाश भटट को रूद्रपुर कोतवाली पुलिस ने धमकी देते हुए कहा कि इस ग्रुप के अन्य सदस्यों पर भी देशद्रोह का अभियोग दर्ज करने की तैयारी चल रही है। पुलिस ने जांच के नाम पर कैलाश भटट का फोन भी जब्त कर लिया है। यह सरासर निजता के अधिकार का उल्लंघन है कि किसी के निजी फोन को जांच के नाम पर जब्त कर लिया जाये। 

पुलिस ने कैलाश भटट से यह भी कहा कि तुम सिडकुल में मजदूरों को भड़काकर अराजकता फैलाते हो, तुम्हारा यही काम है। 


सिडकुल में मजदूरों के शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ इंकलाबी मजदूर केन्द्र सहित कैलाश भटट अपनी आवाज को बुलंद करते रहे हैं। श्रम कानूनों की धज्जियां उड़ाने वाले फैक्टरी प्रबंधकों एवं इनका साथ देने वाले पुलिस प्रशासन के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करते रहे हैं। समय-समय पर अपनी न्यायपूर्ण मांगों के लिए संघर्ष करने वाले मजदूरों को राय मशविरा व कानूनी सलाह देने का काम भी कैलाश भटट करते रहे हैं। इस सब से चिढ़े पुलिस ने लाॅकडाउन को एक मौके के रूप में लेकर उनके दमन की कार्यवाही को अंजाम दिया है। 

उपरोक्त दोनों घटनाओं से यह जाहिर होता है कि पुलिस लाॅकडाउन की स्थितियों का इस्तेमाल मजदूरों-मजदूर नेताओं के दमन करने में कर रही है। जब देश के कई राज्यों के पुलिस प्रमुख/वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा स्वयं भी मजदूरों को पुलिस द्वारा मुर्गा बनाने एवं मारपीट करने की घटनाओं को सार्वजनिक रूप से गलत बताया है और पुलिस को अपना व्यवहार ठीक करने को कहा है। तो ऐसे में उत्तराखंड की रूद्रपुर पुलिस का यह काम उनके इरादों को स्वयं ही बता देता है कि वह मजदूरों के नेताओं की आवाज को राजद्रोह के मुकदमें दर्ज कर दबा देना चाहती है। ताकि मजदूर अपने शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ कोई आवाज ही न उठा सकें। 


परिवर्तनकामी छात्र संगठन पुलिस की इस दमनात्मक कार्यवाही की घोर निंदा करता है। इसके साथ ही परिवर्ततनकामी छात्र संगठन उत्तराखंड सरकार से मांग करता है कि -
1. इंकलाबी मजदूर केन्द्र के अध्यक्ष कैलाश भटट का उत्पीड़न बंद किया जाय और उनका फोन उनको वापस किया जाय।
2. इंकलाबी मजदूर केन्द्र के कार्यकर्ता व ठेका मजदूर कल्याण समिति के नेता अभिलाख सिंह पर दर्ज राजद्रोह का मुकदमा तत्काल हटाया जाये और उनका फोन उनको वापस किया जाय।
3. उत्पीड़न की इस कार्यवाही में शामिल पुलिस कर्मियों को बर्खास्त किया जाय।
4. लाॅकडाउन से प्रभावित मजदूरों-मेहनतकशों के साथ अमानवीय व्यवहार बंद किया जाय।
5. जगह-जगह लाॅकडाउन में फंसे मजदूरों की खाने-रहने की उचित व्यवस्था की जाय।

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