
अभी स्टाफ सेलेक्शन कमिशन (SSC), रेलवे रिक्रूटमेंट बोर्ड (RRB), इंडियन बैंक पर्सनल सेलेक्शन (IBPS) में होने वाली भर्तियों को NRA के जरिये कराये जाने की बातें हो रही हैं। नॉन-टेक्निकल पदों पर ग्रुप बी व ग्रुप सी की भर्तियों के लिए योग्यता परीक्षा अब NRA की जिम्मेदारी होगी। अभी देश में 20 सेलेक्शन या रिक्रूटमेंट एजेंसियां हैं।
अभी विभिन्न संस्थाओं (एजेंसियों) द्वारा करवाई जाने वाली परीक्षाओं में भारी लापरवाही और लेट-लतीफी होती है। साथ ही बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के भी मामले सामने आते हैं। यह तब है जब 20 संस्थाओं की जिम्मेदारी अलग-अलग विभागों में भर्ती की होती है। जब कई विभागों या क्षेत्रों में भर्ती एक ही संस्था से करवाई जाएगी तो क्या होगा? लापरवाही, लेट-लतीफी और भ्रष्टाचार का केन्द्रीयकरण की विशालता में और अधिक वृद्धि।
एक बड़ी समस्या खाली पदों पर नियुक्तियां ही नहीं करने की भी है। रेलवे ने अभी कोरोना काल में साफ कर दिया है कि वह इस साल कोई भर्तियां नहीं निकालेगा, बल्कि अन्य और लोगों को नौकरी से बाहर करने की योजना बना रहा है। भर्तियों का इस साल कमोबेश यही हाल अन्य क्षेत्रों में भी है। सरकार रेलवे, सहित विभिन्न क्षेत्रों में निजीकरण करने में लगी है तो नई नियुक्तियों की संभावना और भी कम हो जाती है। अब NRA का नया झुनझुना क्या करेगा? क्या यह सरकार को निजीकरण न कर सभी रिक्त पदों को भरने की सद्बुद्धि देगा? क्या यह नए पद पैदा करेगा?
NRA द्वारा करवाये जाने वाली सामान्य योग्यता परीक्षा (CET) योग्यता तय करने वाली नई परीक्षा भर है। इसके बाद विभिन्न संस्थाएं भी परीक्षा लेंगी। इसे बीएड कर नौकरी की आस रखने वाले बेरोजगारों के उदाहरण से समझा जा सकता है। शिक्षक नियुक्ति के मामले में शिक्षक योग्यता परीक्षा (TET) को सरकार ने भर्ती के लिए जरूरी परीक्षा बना दिया। जो भर्ती के लिए योग्यता का एक नया पैमाना और नई बाधा भर है। उत्तरप्रदेश में तो TET से ऊपर एक Super TET परीक्षा ही शिक्षक नियुक्ति में और जोड़ दी गयी है। यानी सामान्य योग्यता परीक्षा के बाद तमाम अन्य टेस्ट या परीक्षाएं पास करनी ही होंगी। तो CET करवाने से भर्ती परीक्षाएं देने वालों को भला क्या लाभ?
NRA के जरिये अन्य दावे किये गये कि 20 की जगह 1 संस्था के जरिये अतिरिक्त खर्च में कमी आएगी, भ्रष्टाचार में कमी आएगी, पारदर्शिता होगी, आदि-आदि। इनमें भी केवल सरकार का अतिरिक्त खर्च कम होने वाला दावा ही सही साबित हो सकता है, यदि भ्रष्टाचार से बचा तो। अतः NRA, CET का जश्न छात्रों, बेरोजगारों के लिए नहीं बल्कि सरकार के लिए है। वह खुश है कि बेरोजगारों को नया झुनझुना थमा दिया है। अब एक-दो साल कोई कुछ नहीं बोलेगा रोजगार के बारे में, सब झुनझुने के बारे में ही सोचेंगे, तैयारी करेंगे और इस नई बाधा को पार करने में लग जाएंगे। यह बेरोजगार नौजवानों पर है कि वे सरकार के इस नए झुनझुने में फंसेंगे या सरकार के भ्रम को तोड़ते हुए बेरोजगारी के खिलाफ संघर्ष की राह चुनेंगे।

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