परिवर्तनकामी छात्र संगठन का दो दिवसीय केंद्रीय सम्मेलन सफलता पूर्वक संपन्न!
पछास का दो दिवसीय केंद्रीय सम्मेलन 25-26 दिसंबर को बरेली में सम्पन्न हो गया। इस सम्मेलन में संगठन ने दो दिनों तक अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय परिस्थितियों और शिक्षा जगत में आए बदलावों पर गहन चर्चा करते हुए राजनीतिक रिपोर्ट को पास किया। साथ ही इन बदलावों की रोशनी में संगठन के लिए नई कार्य दिशा को भी सूत्रित किया।
सम्मेलन में शहीदों को श्रद्धांजली, छात्रों पर बढ़ते फासीवादी हमलों के विरोध में, राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विरोध में, देश में बढ़ते फासीवादी हमलों के विरोध में सहित कुल 6 प्रस्ताव भी पास किए गए।
सम्मेलन ने अगले तीन सालों के लिए 18 सदस्यीय सर्वोच्च परिषद और 6 सदस्यीय केंद्रीय कार्यकारिणी का चुनाव भी किया। साथी महेंद्र संगठन के केंद्रीय अध्यक्ष, साथी महेश महासचिव, साथी कैलाश उपाध्यक्ष और साथी चंदन कोष सचिव चुने गए।
सम्मेलन के समापन पर बोलते हुए पछास के अध्यक्ष महेंद्र ने कहा कि कोरोना काल से पहले ही विश्व अर्थव्यवस्था गंभीर आर्थिक संकट की शिकार थी। कोविड काल में तो ये संकट गहरा ही हुआ है। इस संकट के दौरान भी सरकारों द्वारा पूंजीपतियों पर अथाह पैसा लुटाया गया। जिसकी भरपाई सरकारों द्वारा जन सुविधाओं में कटौती कर के की जा रही है।
ऐसे में छिनते अधिकारों और अपनी खराब होती जिंदगी के लिए लड़ रही मेहनतकश जनता के गुस्से को दूसरी तरफ मोड़ने के लिए पूंजीवादी शासकों द्वारा फासीवादी ताकतों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
आगे उन्होंने कहा भारत में भी फासीवादी मोदी सरकार मेहनतकश जनता और छात्र-नौजवानों पर निरंतर नए हमले कर रही है। निजीकरण के तहत जनता की संपतियों को बेचा जा रहा है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) लाकर मोदी सरकार शिक्षा पर बड़ा हमला बोल चुकी है।
देश में तेजी से बढ़ती बेरोजगारी छात्रों-युवाओं के सपनों को धूल धूसरित कर रही है। ऐसे में छात्र-नौजवानों के सामने बेहतर भविष्य का सिर्फ एक ही रास्ता है कि वे विभिन्न समस्याओं के खिलाफ संघर्ष करते हुए मुनाफे पर टिकी पूंजीवादी व्यवस्था को समाप्त कर समाजवादी भारत के निर्माण का संकल्प लें।
क्रांतिकारी अभिवादन के साथ
परिवर्तनकामी छात्र संगठन
(पछास)

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